अमेरिका के पूरà¥à¤µ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ जिमी कारà¥à¤Ÿà¤° का अंतिम संसà¥à¤•ार अगले हफà¥à¤¤à¥‡ वॉशिंगटन में होगा। वॉशिंगटन से हजारों मील दूर उनके नाम पर à¤à¤¾à¤°à¤¤ में à¤à¤• गांव बसा है। गांव के लोग कारà¥à¤Ÿà¤° की 50 साल पहले की यातà¥à¤°à¤¾ को याद कर रहे हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि दे रहे हैं।
कारà¥à¤Ÿà¤° 1977 में à¤à¤• कारà¥à¤¯à¤•ाल के लिठराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ थे। उनका निधन 29 दिसंबर, 2024 को 100 साल की उमà¥à¤° में हो गया। उनका राजकीय अंतिम संसà¥à¤•ार 9 जनवरी को वॉशिंगटन नेशनल कैथेडà¥à¤°à¤² में होगा। 'कारà¥à¤Ÿà¤°à¤ªà¥à¤°à¥€' यानी 'कारà¥à¤Ÿà¤° का गांव', दिलà¥à¤²à¥€ से लगà¤à¤— 32 किलोमीटर दूर à¤à¤• छोटा सा गांव है। इसका पहले नाम दौलतपà¥à¤° नसीराबाद था। 1960 के दशक में कारà¥à¤Ÿà¤° की मां लिलियन कà¥à¤› समय के लिठयहां नरà¥à¤¸ और वॉलंटियर के तौर पर रहीं थीं।
अतीत की सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ को याद करते हà¥à¤ इस गांव के निवासी मोती राम ने बताया, 'गांव वालों ने कारà¥à¤Ÿà¤° की पतà¥à¤¨à¥€ को पारमà¥à¤ªà¤°à¤¿à¤• कपड़ों में सजाया था... । उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने (कारà¥à¤Ÿà¤° ने) हà¥à¤•à¥à¤•ा à¤à¥€ पीने की कोशिश की।' कारà¥à¤Ÿà¤° अपनी पतà¥à¤¨à¥€ रोसालिन के साथ गांव में घूमे थे। कà¥à¤› गांव वालों ने समाचार à¤à¤œà¥‡à¤‚सी ANI (जिसमें रॉयटरà¥à¤¸ की मामूली हिसà¥à¤¸à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ है) को बताया कि 3 जनवरी, 1978 को उनकी यातà¥à¤°à¤¾ से कई महीने पहले ही तैयारियां शà¥à¤°à¥‚ हो गई थीं। गांव को सजाया-संवारा गया था और मà¥à¤–à¥à¤¯ चौक में सà¥à¤µà¤¾à¤—त कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® रखे गठथे।
कारà¥à¤Ÿà¤° की यातà¥à¤°à¤¾ से गांव वाले इतने पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤ कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने गांव का नाम उनके समà¥à¤®à¤¾à¤¨ में बदल दिया। मीडिया रिपोरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, इस हफà¥à¤¤à¥‡ कारà¥à¤Ÿà¤° के निधन की खबर सà¥à¤¨à¤•र गांव वालों ने उनकी तसà¥à¤µà¥€à¤° पर मालà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤ªà¤£ किया और फूल चढ़ाकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि दी।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अमेरिकी राजदूत à¤à¤°à¤¿à¤• गारà¥à¤¸à¥‡à¤Ÿà¥€ ने कारà¥à¤Ÿà¤° के निधन के बाद à¤à¤•à¥à¤¸ (टà¥à¤µà¤¿à¤Ÿà¤°) पर इस गांव का जिकà¥à¤° करते हà¥à¤ लिखा कि यह 'à¤à¤¾à¤°à¤¤ में उनके पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरे समà¥à¤®à¤¾à¤¨ का पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£' है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उस यातà¥à¤°à¤¾ की à¤à¤• तसà¥à¤µà¥€à¤° à¤à¥€ पोसà¥à¤Ÿ की जिसमें रोसालिन पारंपरिक कपड़ों में हंस रही हैं और कारà¥à¤Ÿà¤° उनके बगल में गांव वालों की à¤à¥€à¤¡à¤¼ से घिरे हà¥à¤ हैं।
कारà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बाद में à¤à¥‡à¤œà¤¾ गया à¤à¤• पतà¥à¤°, जिसमें उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® को 'सफल और वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त रूप से संतोषजनक' बनाने के लिठगाà¤à¤µ वालों के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ के लिठधनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ दिया था। यह इस गांव की सबसे कीमती चीजों में से à¤à¤• है, साथ ही तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ à¤à¥€à¥¤
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login