जब उपनिवेशवाद à¤à¤¾à¤°à¤¤ को दीमक की तरह चाट रहा था, तो à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ था जो चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परंपरा को उपनिवेशवादियों के केंदà¥à¤° में फैला रहा था। उस शखà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¤ का नाम है दीन मोहमà¥à¤®à¤¦à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उपनिवेशवादियों की राजधानी के केंदà¥à¤° में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पाक उदà¥à¤¯à¥‹à¤— की नींव रखी। 34 जॉरà¥à¤œ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤Ÿ पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ लंदन का पहला à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट, द हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ कॉफी हाउस 1810 में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया गया था।
शेख दीन मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ का जनà¥à¤® 1759 में बिहार, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में हà¥à¤† था। वह सांसà¥à¤•ृतिक मिलन की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• थे। ईसà¥à¤Ÿ इंडिया कंपनी की सैनà¥à¤¯ संसà¥à¤•ृति में डूबी उनकी परवरिश ने उनके उदà¥à¤¯à¤® की नींव रखी। कॉरà¥à¤•, आयरलैंड में पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ करने और बाद में लंदन के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित पोरà¥à¤Ÿà¤®à¥ˆà¤¨ सà¥à¤•à¥à¤µà¤¾à¤¯à¤° में बसने के बाद दीन ने à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट की कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ की, जिसने लंदन के महानगरीय जीवन को अपनी मातृà¤à¥‚मि की खान-पान की परंपराओं को पाट दिया।
à¤à¤• à¤à¤‚गà¥à¤²à¥‹-आयरिश अधिकारी कैपà¥à¤Ÿà¤¨ गॉडफà¥à¤°à¥‡ इवान बेकर के संरकà¥à¤·à¤£ में दीन ने अपने कौशल का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ किया और औपनिवेशिक समाज के जटिल गलियारों को करीब से समà¤à¤¾à¥¤ à¤à¤• आयरिश महिला जेन डेली से उनकी शादी ने बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ दà¥à¤µà¥€à¤ªà¥‹à¤‚ के साथ उनके संबंधों को और मजबूत किया।
हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ कॉफी हाउस महज à¤à¤• खानपान की जगह ही नहीं था, यह à¤à¤¾à¤°à¤¤ के जीवंत परिदृशà¥à¤¯ के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤• संवेदी यातà¥à¤°à¤¾ थी। दीन मोहमà¥à¤®à¤¦ ने सावधानीपूरà¥à¤µà¤• à¤à¤• माहौल को तैयार किया, जो संरकà¥à¤·à¤•ों को दूर के तटों तक पहà¥à¤‚चाता था, जिसमें बांस-बेंत के सोफे, अलंकृत हà¥à¤•à¥à¤•े और दीवारों को सजाने वाले शानदार चितà¥à¤° थे।
उस समय के पारंपरिक कॉफी हाउसों के विपरीत हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ कॉफी हाउस ने à¤à¥‹à¤œà¤¨ को फिर से परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ करने का साहस किया। लोगों को हà¥à¤•à¥à¤•ा पीने की सदियों पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ परंपरा में शामिल होने का अवसर मिला। इसके साथ ही à¤à¤¾à¤°à¤¤ के टॉप के रसोइये दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सावधानीपूरà¥à¤µà¤• तैयार किठगठपà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जनों का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ चखने का मौका मिला। यह उस समय à¤à¤• सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• होम डिलीवरी सेवा के साथ लोगों के घरों तक à¤à¥€ पहà¥à¤‚चा।
हालांकि दीन मोहमà¥à¤®à¤¦ के उदà¥à¤¯à¤®à¤¶à¥€à¤²à¤¤à¤¾ के उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ को विकट चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का à¤à¥€ सामना करना पड़ा, जिसकी परिणति दिवालियापन के कारण 1812 में हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ कॉफी हाउस के बंद होने के रूप में हà¥à¤ˆà¥¤ इस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ान के समापन ने लंदन के खानपान परिदृशà¥à¤¯ में à¤à¤• अंतराल को उजागर किया, जिसमें à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨à¤¾à¤²à¤¯ आगामी आठदशकों तक सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से अनà¥à¤ªà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ रहे।
फà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¡à¥‡ टाइमà¥à¤¸ के à¤à¤• लेख के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° 20 वीं शताबà¥à¤¦à¥€ तक à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जनों के पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¤à¥à¤¥à¤¾à¤¨ ने आकार लेना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया था। 1911 में हॉलबोरà¥à¤¨ में सैलà¥à¤¯à¥‚ट-à¤-हिंद के उदà¥à¤˜à¤¾à¤Ÿà¤¨ के साथ इसका पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤° हà¥à¤†, जिसने लंदन में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ खानपान के कला के à¤à¤• नठयà¥à¤— की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की। बाद के दशकों में 1920 में रोपर सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤Ÿ में द कोहिनूर और कमरà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤² सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤Ÿ में करी कैफे जैसे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ानों का उदय हà¥à¤†à¥¤
लंदन के पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ रेसà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤‚ के पीछे अगà¥à¤°à¤£à¥€ उदà¥à¤¯à¤®à¥€ दीन मोहमà¥à¤®à¤¦ का 91 साल की आयॠमें फरवरी 1851 में बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ में निधन हो गया, जो à¤à¤• समृदà¥à¤§ और बहà¥à¤®à¥à¤–ी विरासत को पीछे छोड़ गठथे। वह न केवल बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जनों को पेश करने वाले पथ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤• थे, बलà¥à¤•ि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ लेखक होने का गौरव à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है। यह शायद à¤à¤¸à¥‡ अगà¥à¤°à¤¦à¥‚तों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रखी गई नींव है कि समकालीन बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ संसà¥à¤•ृति अब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚जनों को गले लगाती है।
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