गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥€ à¤à¤¸à¤¾ समय है जिसका साल à¤à¤° से लोगों को इंतजार रहता है। यह वह समय होता है जब लोग अलग-अलग उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठअलग-अलग जगहों की यातà¥à¤°à¤¾ करते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में मंदिरों जैसे पवितà¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर शांति, आतà¥à¤®à¤¿à¤• आनंद पाने का अपना ही à¤à¤• अलग तरह का आकरà¥à¤·à¤£ है। इस बार आप गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के दौरान à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– राम मंदिरों की यातà¥à¤°à¤¾ कर सकते हैं। यहां आपको à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पौराणिक कथाओं को समà¤à¤¨à¥‡ का अवसर मिलेगा। आइये इन मंदिरों के बारे में जानते हैं।
राम जनà¥à¤®à¤à¥‚मि मंदिर, अयोधà¥à¤¯à¤¾ : यह शà¥à¤°à¥€ राम जनà¥à¤®à¤à¥‚मि तीरà¥à¤¥ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है। अयोधà¥à¤¯à¤¾ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® मंदिर सरयू नदी के तट पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ की मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि जिस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर यह मंदिर बनाया गया है वह à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® का जनà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। मंदिर कई कारणों से चरà¥à¤šà¤¾ में रहा है और जनवरी 2024 में इसका उदà¥à¤˜à¤¾à¤Ÿà¤¨ किया गया था। यह मंदिर दूर-दूर से तीरà¥à¤¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ कर रहा है। à¤à¤—वान राम की काले रंग की मूरà¥à¤¤à¤¿ वासà¥à¤¤à¤µ में à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ कलाकृति है। à¤à¤• असीम आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• आनंद के लिठआप यहां की यातà¥à¤°à¤¾ कर सकते हैं।
कोंडांडा रामासà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ मंदिर, चिकमंगलूर : करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• के चिकमंगलूर जिले में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤, कोंडांडा रामासà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ मंदिर होयसल और दà¥à¤°à¤µà¤¿à¤¡à¤¼ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¤à¥à¤¯ कला के à¤à¤• आकरà¥à¤·à¤• जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ के रूप में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ है। इसकी खास विशेषता इसकी मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में निहित है, जहां मां सीता à¤à¤—वान राम के दाईं ओर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हैं और लकà¥à¤·à¥à¤®à¤£ उनके बाईं ओर। यह उनके शाशà¥à¤µà¤¤ बंधन का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है।
शà¥à¤°à¥€ रामनाथसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ मंदिर, रामेशà¥à¤µà¤°à¤®, तमिलनाडॠ: रामेशà¥à¤µà¤°à¤® दà¥à¤µà¥€à¤ª पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रामनाथसà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ मंदिर दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के सबसे लंबे गलियारे का घर होने के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ है। पौराणिक मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, रावण से यà¥à¤¦à¥à¤§ में विजय हासिल करने के बाद à¤à¤—वान राम और उनकी पतà¥à¤¨à¥€ सीता ने हनà¥à¤®à¤¾à¤¨ के साथ यहां à¤à¤—वान शिव की पूजा की थी। यह à¤à¤¾à¤°à¤¤ के शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¥‡à¤¯ चार धाम मंदिरों में से à¤à¤• है।
राम मंदिर, à¤à¥à¤µà¤¨à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° : ओडिशा के जीवंत शहर à¤à¥à¤µà¤¨à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ राम मंदिर दिवà¥à¤¯ है। मंदिर à¤à¤—वान राम, उनकी पतà¥à¤¨à¥€ सीता और à¤à¤¾à¤ˆ लकà¥à¤·à¥à¤®à¤£ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ मूरà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से सà¥à¤¶à¥‹à¤à¤¿à¤¤ है। यह मंदिर अपनी आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• आà¤à¤¾ से à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ और परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों को आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करता है।
सीता रामचंदà¥à¤°à¤¸à¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ मंदिर, कà¥à¤‚à¤à¤•ोणम : तमिलनाडॠके कà¥à¤‚à¤à¤•ोणम में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ यह मंदिर à¤à¤—वान राम को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ है। इसे करीब 400 साल पहले राजा रघà¥à¤¨à¤¾à¤¥ नायकर ने बनाया था। इस मंदिर को महाकावà¥à¤¯ रामायण के दृशà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को चितà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने वाली अदà¥à¤à¥à¤¤ नकà¥à¤•ाशी और चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ से सजाया गया है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login