छतà¥à¤¤à¥€à¤¸à¤—ढ़ के बसà¥à¤¤à¤° इलाके में नकà¥à¤¸à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के खिलाफ चल रही सबसे बड़ी सैनà¥à¤¯ कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ अब à¤à¤• नई दिशा ले चà¥à¤•ी है। सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गठित ‘डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤Ÿ रिजरà¥à¤µ गारà¥à¤¡’ (DRG) फोरà¥à¤¸ में शामिल आदिवासी यà¥à¤µà¤¾ और पूरà¥à¤µ माओवादी लड़ाके ही अब बसà¥à¤¤à¤° के जंगलों में नकà¥à¤¸à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के खिलाफ मोरà¥à¤šà¤¾ संà¤à¤¾à¤²à¥‡ हà¥à¤ हैं।
DRG में कई à¤à¤¸à¥‡ यà¥à¤µà¤¾ हैं, जिनके परिजन कà¤à¥€ नकà¥à¤¸à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के हाथों मारे गठथे। 21 वरà¥à¤·à¥€à¤¯ à¤à¤• DRG जवान ने AFP से बातचीत में कहा, "वे कहते हैं कि वे हमारे लिठलड़ते हैं, लेकिन असल में वे हमें ही मारते हैं।" यह फोरà¥à¤¸ जंगल और इलाके की गहराई से जानकार है, जिससे ऑपरेशन को तेज गति मिली है। गृहमंतà¥à¤°à¥€ अमित शाह ने à¤à¤²à¤¾à¤¨ किया है कि अगले अपà¥à¤°à¥ˆà¤² तक नकà¥à¤¸à¤²à¤µà¤¾à¤¦ को पूरी तरह खतà¥à¤® कर दिया जाà¤à¤—ा।
नकà¥à¤¸à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की जगह निरà¥à¤¦à¥‹à¤· गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ निशाने पर?
यह सैनà¥à¤¯ अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ विवादों से à¤à¥€ घिरा है। सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£à¥‹à¤‚ और मानवाधिकार कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं का आरोप है कि कई बार सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ बल निरà¥à¤¦à¥‹à¤· गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£à¥‹à¤‚ को नकà¥à¤¸à¤²à¥€ बताकर फरà¥à¤œà¥€ मà¥à¤ à¤à¥‡à¤¡à¤¼à¥‹à¤‚ में मार देते हैं। पेडिया गांव में हà¥à¤ˆ 12 मौतों को लेकर DRG के à¤à¤• जवान ने खà¥à¤¦ सà¥à¤µà¥€à¤•ारा कि "वह à¤à¤• गलती थी।"
यह à¤à¥€ पढ़ें- माओवादी विदà¥à¤°à¥‹à¤¹ कà¥à¤¯à¤¾ है? à¤à¤¾à¤°à¤¤ की दशकों पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ पर अब निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• हमला
पà¥à¤²à¤¿à¤¸ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पी. सà¥à¤‚दरराज का कहना है कि सà¤à¥€ ऑपरेशन कानून के दायरे में होते हैं और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ बल केवल आतà¥à¤®à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ में कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ करते हैं। लेकिन सामाजिक कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ सोनी सोरी ने कहा, "अब आदिवासी ही आदिवासियों को मार रहे हैं। नकà¥à¤¸à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की हिंसा में à¤à¥€ आम लोग ही मारे जाते थे, अब फोरà¥à¤¸ की कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ में à¤à¥€ वही हो रहा है।"
विकास या खनन की तैयारी?
बसà¥à¤¤à¤° में तेजी से बनाठजा रहे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ कैंपों को लेकर à¤à¥€ सवाल उठरहे हैं। पà¥à¤²à¤¿à¤¸ का दावा है कि ये कैंप विकास के केंदà¥à¤° बनेंगे, जहां से सड़कों और मोबाइल टावरों जैसे बà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦à¥€ ढांचे का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होगा। लेकिन आदिवासी समाज को आशंका है कि यह सब जंगलों में बड़े पैमाने पर खनन की तैयारी है। 2022 में रोघाट खदान की मंजूरी के बाद से विरोध की लहर और तेज हो गई है।
खतà¥à¤® होगा नकà¥à¤¸à¤²à¤µà¤¾à¤¦?
हाल ही में माओवादी संगठन ने संघरà¥à¤·à¤µà¤¿à¤°à¤¾à¤® के बदले शांति वारà¥à¤¤à¤¾ की पेशकश की थी, जिसे सरकार ने ठà¥à¤•रा दिया। कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं का मानना है कि सिरà¥à¤« सैनà¥à¤¯ कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ से सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ समाधान नहीं निकल सकता। DRG के à¤à¤• जवान ने खà¥à¤¦ कहा, "अगर ये सब खनन के लिठहो रहा है और लोग उजाड़े गठतो वे कहेंगे कि नकà¥à¤¸à¤²à¥€ ही बेहतर थे।"
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