टेकà¥à¤¸à¤¾à¤¸ के हà¥à¤¯à¥‚सà¥à¤Ÿà¤¨ इंडिपेंडेंट सà¥à¤•ूल डिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤Ÿ के पिन ओक मिडिल सà¥à¤•ूल में à¤à¤¾à¤°à¤¤ की समृदà¥à¤§ संसà¥à¤•ृति और सनातन धरà¥à¤® की शिकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤• साथ दी जाती है। यहां केवल हिंदी में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® संचालित किया जाता है।
इसी कà¥à¤°à¤® में सà¥à¤•ूल के हिंदी कà¥à¤²à¤¬ ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ की अयोधà¥à¤¯à¤¾ नगरी में à¤à¤—वान राम की घर वापसी की खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ दिवस के रूप में à¤à¤•-दूसरे को बिंदी और तिलक लगाकर मनाईं। इसके साथ ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बिंदी और तिलक लगाने का महतà¥à¤µ à¤à¥€ समà¤à¤¾à¤¯à¤¾ गया।
सà¥à¤•ूल की पà¥à¤°à¤¿à¤‚सिपल लिंडसे वेला ने उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ के साथ इस आयोजन में हिसà¥à¤¸à¤¾ लिया और à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परंपरा को जानकर उनà¥à¤¹à¥‡ खà¥à¤¶à¥€ à¤à¥€ हà¥à¤ˆà¥¤ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में सà¤à¥€ छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ ने à¤à¤¾à¤—ीदारी की और अपने दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के साथ à¤à¥€ इस बारे में बातें कीं।
बिंदी-तिलक कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के महतà¥à¤µ और इसकी सारà¥à¤¥à¤•ता के बारे में अरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤•ाश ने अपनी सà¤à¥€ ककà¥à¤·à¤¾à¤“ं में चरà¥à¤šà¤¾ की और विशà¥à¤µ संसà¥à¤•ृति टीचर ने à¤à¥€ अपनी कà¥à¤²à¤¾à¤¸ में इस बारे में बात की। इस अवसर पर विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने अपनी-अपनी ककà¥à¤·à¤¾à¤“ं में डोनट पारà¥à¤Ÿà¥€ की। अरà¥à¤£ पà¥à¤°à¤•ाश ने हर सà¥à¤•ूल में इसी तरह के आयोजन की आकांकà¥à¤·à¤¾ जताई।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ हैं। कई संगठन अमेरिकी शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ में à¤à¤¾à¤°à¤¤ के बारे में पढ़ाने के तरीकों में बदलाव लाने की दिशा में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से काम कर रहे हैं। सà¥à¤•ूलों में हिंदी और à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति की कà¥à¤²à¤¾à¤¸ शà¥à¤°à¥‚ करने के लिठबहà¥à¤¤ कम निवेश की जरूरत पड़ती है। उपयà¥à¤•à¥à¤¤ सोच और उनà¥à¤¨à¤¤ पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ के साथ कम पारिशà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• में à¤à¥€ काम किया जा सकता है। हालांकि इसके लिठकई कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ मगर उनमें से कई इसलिठअसफल हो गये कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वहां पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• नहीं थे अथवा पढ़ाने की इचà¥à¤›à¤¾ का अà¤à¤¾à¤µ था।
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