दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ साहितà¥à¤¯ के पà¥à¤°à¤¶à¤‚सित विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ डॉ. कमल डी वरà¥à¤®à¤¾ का पिछले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ अमेरिका में निधन हो गया था। अपने दिवंगत पिता के लिठदिठगठà¤à¤• à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ में राजà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन और संसाधन के उप सचिव रिचरà¥à¤¡ वरà¥à¤®à¤¾ ने उन पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ बातों पर रोशनी डाली जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनके पिता को असाधारण बनाया। रिच वरà¥à¤®à¤¾ वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में मारà¥à¤š 2020 से राजà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन और संसाधन के उप सचिव के रूप में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 8 मारà¥à¤š को उनकी यादें साà¤à¤¾ कीं।
पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° कमल वरà¥à¤®à¤¾ का पिछले हफà¥à¤¤à¥‡ वाशिंगटन में 91 वरà¥à¤· की आयॠमें निधन हो गया। पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° वरà¥à¤®à¤¾ ने पेंसिलà¥à¤µà¥‡à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में जॉनà¥à¤¸à¤Ÿà¤¾à¤‰à¤¨ (यूपीजे) में पिटà¥à¤¸à¤¬à¤°à¥à¤— विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में 42 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक पढ़ाया। रिटायर होने के बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° à¤à¤®à¥‡à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¸ और विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· के सलाहकार के रूप में काम जारी रखा। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ समीकà¥à¤·à¤¾ और दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ साहितà¥à¤¯ संघ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆà¥¤
रिच वरà¥à¤®à¤¾ ने अपने पिता के बारे में बताया कि 1963 में पंजाब के à¤à¤• छोटे से गांव से नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• शहर तक केवल 14 डॉलर और जेब में à¤à¤• बस टिकट के साथ कैसे उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपना सफर शà¥à¤°à¥‚ किया। पà¥à¤°à¥‹ वरà¥à¤®à¤¾ की शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• गतिविधियों ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उतà¥à¤¤à¤°à¥€ आयोवा विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से ससà¥à¤•ेचेवान और अलà¥à¤¬à¤°à¥à¤Ÿà¤¾ तक पहà¥à¤‚चाया, बाद में वह 1971 में जॉनसà¥à¤Ÿà¤¾à¤‰à¤¨, पेंसिलà¥à¤µà¥‡à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में बस गà¤à¥¤
जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और सीखने के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अपने पिता के समरà¥à¤ªà¤£ को बताते हà¥à¤ रिच वरà¥à¤®à¤¾ ने कहा कि सीखने का उनका पà¥à¤¯à¤¾à¤° केवल शिकà¥à¤·à¤£ के उनके पà¥à¤¯à¤¾à¤° से ही मेल नहीं खाता है। यह यातà¥à¤°à¤¾ उनकी दूसरों को वापस देने के लिठथी। वरà¥à¤®à¤¾ ने कहा कि उनके पिता के जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और सीखने की ललक उनके अंतिम दिन तक बनी रही। उनके पिता के à¤à¤¾à¤ˆ-बहन उतà¥à¤¤à¤°à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के à¤à¤• छोटे से गांव में पले-बढ़े थे।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मेरे पिता का साथ कई शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• डिगà¥à¤°à¥€, तीन पà¥à¤°à¤•ाशित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ें और हजारों छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के साथ समापà¥à¤¤ होगा, à¤à¤¸à¤¾ कà¤à¥€ नहीं होना चाहिठथा। लेकिन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤—वान ने à¤à¤• विशेष पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ उपहार में दी थी। à¤à¤• जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾, सीखने का जà¥à¤¨à¥‚न, गणित और अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ साहितà¥à¤¯ दोनों की बारीकियों का पता लगाने का जà¥à¤¨à¥‚न, कोई दोनों विषयों में उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ कैसे पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकता है? रिच कहते हैं कि वह हमेशा हमसे कà¥à¤› कदम आगे रहे..à¤à¤• गहन विचारक थे..विचारों और सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों की समृदà¥à¤§ समठके साथ। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हमें ये सबक देने की कोशिश की, लेकिन मà¥à¤à¥‡ लगता है कि हम उनके सबसे अचà¥à¤›à¥‡ छातà¥à¤° नहीं थे।
और ये वे सबक थे जो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दशकों तक अपनी ककà¥à¤·à¤¾ में अपने छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ को दिठथे, और वे वासà¥à¤¤à¤µ में उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ थे। उनकी यातà¥à¤°à¤¾ सामाजिक समावेश की यातà¥à¤°à¤¾ थी। हां, कà¥à¤› à¤à¤¸à¤¾ था जिसने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• उपनिवेशित और जाति-विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ à¤à¥‚मि में बड़े होने, विà¤à¤¾à¤œà¤¨ के कठिन दौर से गà¥à¤œà¤°à¤¨à¥‡ और फिर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ के बारे में गहराई से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया।
वरà¥à¤®à¤¾ ने कहा कि इन बातों ने उनके लेखन को आकार दिया, जिनका उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया, और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इसकी वकालत की। वरà¥à¤®à¤¾ ने कहा, उनकी दो पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ें विशेष रूप से दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ लेखकों और दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤•ों के बीच औपनिवेशिक और उतà¥à¤¤à¤°-औपनिवेशिक विचारों पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ थीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने सà¥à¤µà¤¯à¤‚ के जीवंत अनà¥à¤à¤µ, साथ ही साथ अपनी गहरी बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ को सामने लाया।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि जब मैं इस वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को देखता हूं – मेरे पिता जो इस छोटे से शहर में रहते थे और à¤à¤• गांव से थे, मà¥à¤à¥‡ अब à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होता है कि उनके पास इस तरह का कद, à¤à¤¸à¤¾ कद और अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ था और हाशिठके लोगों के लिठअधिक सामाजिक समावेश का विचार था। वरà¥à¤®à¤¾ ने कहा, मà¥à¤à¥‡ नहीं पता था कि यह बहà¥à¤¤ ही खास वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हमारे पिता के रूप में हम सà¤à¥€ के बीच रह रहे थे - केवल जीवन में बाद मैंने उनकी यातà¥à¤°à¤¾ के इस पहलू की पूरी तरह से सराहना की।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, मà¥à¤à¥‡ इसे पहले देखना चाहिठथा, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह दूसरों की मदद करने, नठआपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, नठछातà¥à¤°à¥‹à¤‚, नठशिकà¥à¤·à¤•ों की मदद करने में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤†à¥¤ à¤à¤¸à¥‡ लोगों को महसूस कराना, यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ या अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ का सामना नहीं करना पड़े। वरà¥à¤®à¤¾ ने याद किया कि यही कारण है कि पेंसिलà¥à¤µà¥‡à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में हमारे घर के पास या उसके पास यातà¥à¤°à¤¾ करने वाला दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ मूल का कोई à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ हमारे रहने वाले कमरे में आया, उनका बहà¥à¤¤ सà¥à¤µà¤¾à¤—त और समरà¥à¤¥à¤¨ किया गया।
यही कारण है कि वह हमेशा हम सà¤à¥€ को याद दिलाने के लिठकि वासà¥à¤¤à¤µ में 'हम सà¤à¥€ à¤à¤• ही जगह से थे', चाहे नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• शहर में à¤à¤• टैकà¥à¤¸à¥€ डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¤° या पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ मंतà¥à¤°à¥€à¥¤ हां, यह à¤à¥‚गोल के बारे में था, लेकिन इससे à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बात यह है कि वह यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना चाहते थे कि हम सà¤à¥€ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ जगह से हैं जिसके लिठसमान समà¥à¤®à¤¾à¤¨, गरिमा और समानता की आवशà¥à¤¯à¤•ता है।
रिच वरà¥à¤®à¤¾ ने अपने पिता का आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किया कि जो सही था, उसके लिठवह खड़े हà¥à¤à¥¤ यह उनकी सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ यातà¥à¤°à¤¾ हो सकती है। कमल वरà¥à¤®à¤¾ को 'à¤à¤• बहादà¥à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿, मजबूत रीढ़ के साथ' के रूप में याद करते हà¥à¤, रिच वरà¥à¤®à¤¾ ने कहा कि मेरे पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ पिता के बिना दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ समान नहीं होगी, लेकिन यह à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ है जो उनकी वजह से बहà¥à¤¤ बेहतर जगह है। और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने हमें हर साधन दिया है और जिस रासà¥à¤¤à¥‡ पर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यातà¥à¤°à¤¾ की है, उसे आगे बढ़ाने के लिठहर अचà¥à¤›à¥€ यादें दी हैं।
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