आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ और बेसà¥à¤Ÿ सैलिंग लेखक संत राजिंदर सिंह जी महाराज 5 और 6 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को अमेरिकावासियों को आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• शांति की राह दिखाà¤à¤‚गे। इसके लिठआयोजकों ने सबको आमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया है।
जानकारी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° संत राजिंदर सिंह जी महाराज शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤°, 5 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ, शाम 7:00 बजे 'पीस à¤à¤‚ड जॉय वेट यू विदइन' (सà¥à¤ªà¥‡à¤¨à¤¿à¤¶ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ के साथ) शीरà¥à¤·à¤• से à¤à¤• à¤à¤¾à¤·à¤£ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करेंगे। शनिवार, 6 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ, 3 बजे संत राजिंदर सिंह जी हिंदी में आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ देंगे (अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ और सà¥à¤ªà¥‡à¤¨à¤¿à¤¶ अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ के साथ)। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® हयात रीजेंसी नà¥à¤¯à¥‚ बà¥à¤°à¤‚सविक होटल, रीजेंसी बॉलरूम, 2 अलà¥à¤¬à¤¾à¤¨à¥€ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤Ÿ, नà¥à¤¯à¥‚ बà¥à¤°à¤‚सविक, à¤à¤¨à¤œà¥‡ में होगा। खास बात यह है कि दोनों कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® निशà¥à¤²à¥à¤• हैं।
विà¤à¤¾à¤œà¤¨, तनाव और दैनिक चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के इस समय में आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– अंतरà¥à¤¦à¥ƒà¤·à¥à¤Ÿà¤¿ और तकनीकों की पेशकश करेंगे जैसा कि उनकी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों में बताया गया है। अमेज़ॅन बेसà¥à¤Ÿà¤¸à¥‡à¤²à¤° डीटॉकà¥à¤¸ द माइंड, इनर à¤à¤‚ड आउटर पीस थà¥à¤°à¥‚ मेडिटेशन और à¤à¤®à¥à¤ªà¤¾à¤µà¤°à¤¿à¤‚ग योर सोल थà¥à¤°à¥‚ मेडिटेशन जैसी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों ने खासी खà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¿ हासिल की है।
वह दिखाà¤à¤‚गे कि कैसे आंतरिक जागृति का यह अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ हमारे जीवन को शारीरिक, à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• रूप से समृदà¥à¤§ कर सकता है और यह न केवल हमारे अपने जीवन बलà¥à¤•ि हमारे परिवारों, सहकरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ और उससे परे के जीवन को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने के लिठशांति और खà¥à¤¶à¥€ की रूपरेखा पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर सकता है।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ के माधà¥à¤¯à¤® से जीवन को बदलने के लिठसमरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ à¤à¤• विशà¥à¤µà¤µà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• संगठन साइंस ऑफ सà¥à¤ªà¤¿à¤°à¤¿à¤šà¥à¤…लिटी के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– के रूप में संत राजिंदर सिंह जी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में यातà¥à¤°à¤¾ करते हैं और लोगों को बताते हैं कि वे धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ की वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• विधि के साथ अपने à¤à¥€à¤¤à¤° आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•ता के खजाने को कैसे उजागर कर सकते हैं।
वह इस बात पर जोर देते हैं कि à¤à¤• शांतिपूरà¥à¤£ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ पहली आधारशिला से शà¥à¤°à¥‚ होता है। और वह आधारशिला हैं हम सà¥à¤µà¤¯à¤‚। बाहरी शांति में योगदान देने से पहले हमें अपने à¤à¥€à¤¤à¤° शांति ढूंढनी होगी।
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