कोई à¤à¤• साल पहले सनी सिंह गिल अपने करियर के दोराहे पर खड़े थे। उनके पास दो विकलà¥à¤ª थे। जेल अधिकारी बने रहें या फिर अपने परिवार की समृदà¥à¤§ फà¥à¤Ÿà¤¬à¥‰à¤² विरासत को आगे बढ़ाने पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करके हà¥à¤ रेफरी बनने के अपने यà¥à¤µà¤¾ काल के सपने का पीछा करें। सनी ने अपने सपने को साकार करने का विकलà¥à¤ª चà¥à¤¨à¤¾à¥¤
आज 2024 में 39 साल के सनी ने इतिहास रच डाला है। बीते शनिवार सेलहरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ पारà¥à¤• में सनी सिंह गिल इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤° लीग मैच (कà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¤² पैलेस बनाम लà¥à¤¯à¥‚टन) में रेफरी बनने वाले पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल और बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ बने। कà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¤² पैलेस को लà¥à¤¯à¥‚टन टाउन ने 1-1 से बराबरी पर रोका।
कà¥à¤› ही दिन पहले बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ पीà¤à¤® ऋषि सà¥à¤¨à¤• ने à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ मीडिया गà¥à¤°à¥à¤ª की ओर से आयोजित à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार समारोह को संबोधित करते हà¥à¤ कहा था कि इस सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¾à¤‚त मà¥à¤à¥‡ सनी सिंह गिल को पहले दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ के रूप में मैदान पर उतरते हà¥à¤ देखकर गरà¥à¤µ होगा। सà¥à¤¨à¤• ने कहा कि यह हमारी अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ और हमारे समाज में दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ लोगों के अविशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ योगदान की याद ताजा करता है। यह हमारे साà¤à¤¾ मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ याद दिलाता है। यानी कड़ी मेहनत, परिवार, शिकà¥à¤·à¤¾ और उदà¥à¤¯à¤®à¥¤ हमारे पास जशà¥à¤¨ मनाने के लिठबहà¥à¤¤ कà¥à¤› है।
à¤à¤¸à¤¾ पहली बार नहीं है जब गिल परिवार के किसी सदसà¥à¤¯ ने इतिहास के किसी पनà¥à¤¨à¥‡ पर अपना नाम लिखा हो। सनी के पिता जरनैल सिंह इंगà¥à¤²à¤¿à¤¶ लीग फà¥à¤Ÿà¤¬à¥‰à¤² के इतिहास में पहले पगड़ीधारी रेफरी थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 2004 से 2010 के बीच 150 मैचों में रेफरींग की। इसीलिठसनी सिंह कहते हैं कि फà¥à¤Ÿà¤¬à¥‰à¤² हमेशा से हमारे परिवार में दौड़ती रही है। सनी के à¤à¤¾à¤ˆ à¤à¥‚पिंदर पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤° लीग के सहायक रेफरी के रूप में काम करने वाले पहले सिख-पंजाबी थे जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पिछले साल साउथेमà¥à¤ªà¥à¤Ÿà¤¨ बनाम नॉटिंघम फॉरेसà¥à¤Ÿ गेम के दौरान मैदान में दौड़ लगाई थी।
सनी कहते हैं कि मैं और मेरा à¤à¤¾à¤ˆ इस खेल को पसंद करते हà¥à¤ बड़े हà¥à¤ हैं और अधिकांश छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की तरह हम सिरà¥à¤« खेलना चाहते थे लेकिन हमारे घर में मामला कà¥à¤› अलग था कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि जब हम पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में जा रहे थे तो हमें पता था कि हमारे पिता वीकेंड पर रेफरींग के लिठबाहर जा रहे होते थे। कई बार वह पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤° लीग में चौथे अधिकारी होते थे और हमारे दोसà¥à¤¤ कहते थे कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनà¥à¤¹à¥‡ दिन के मैच में देखा था!
लेकिन सनी के सफर में à¤à¤• दिलचसà¥à¤ª बात और है। वह यह कि बचपन में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने रेफरी बनने का सपना नहीं देखा था। बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ के अनगिनत बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की तरह सनी à¤à¥€ पेशेवर रूप से फà¥à¤Ÿà¤¬à¥‰à¤² खेलना चाहते थे!
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login