चार साल पहले अमेरिका, कनाडा और यूके में जब रोजगार के अवसर सीमित होने लगे थे, तब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ खासकर पंजाब के यà¥à¤µà¤¾ गà¥à¤°à¥€à¤¸ का रà¥à¤– करने लगे थे। वहां उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¥‹à¤‚ का नया संसार दिख रहा था। लेकिन इनमें से अधिकतर अवैध टà¥à¤°à¥ˆà¤µà¤² à¤à¤œà¥‡à¤‚टों के चंगà¥à¤² में फंसकर अपनी जिंदगी बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦ कर बैठे। इसी को देखते हà¥à¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के à¤à¤• कारोबारी ने मदद का अनोखा मिशन शà¥à¤°à¥‚ किया।
दà¥à¤¬à¤ˆ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ परोपकारी सà¥à¤°à¤¿à¤‚दर पाल सिंह ओबेरॉय à¤à¤• धरà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤¥ संसà¥à¤¥à¤¾ सरबत दा à¤à¤²à¤¾ टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ (à¤à¤¸à¤¡à¥€à¤¬à¥€à¤Ÿà¥€) चलाते हैं। गà¥à¤°à¥€à¤¸ में पंजाबी यà¥à¤µà¤¾à¤“ं की दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ देखकर इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने वहां à¤à¥€ अपने टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ का कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ खोला। इसका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ पकड़े गठà¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ यà¥à¤µà¤¾à¤“ं को वापस लाना है। ये यà¥à¤µà¤¾ अकà¥à¤¸à¤° सà¥à¤¨à¤¹à¤°à¥‡ सपनों के à¤à¤¾à¤‚से में आकर बिना उचित दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥‹à¤‚ के गà¥à¤°à¥€à¤¸ पहà¥à¤‚चा दिठजाते हैं। लेकिन वहां जाकर वे कानूनी à¤à¤œà¥‡à¤‚सियों के चंगà¥à¤² में फंस जाते हैं।
सà¥à¤°à¤¿à¤‚दर पाल बताते हैं कि लगà¤à¤— 12 हजार अवैध पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से 8 हजार से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जेल में हैं। बहà¥à¤¤ से यà¥à¤µà¤¾ जेल की यातनाà¤à¤‚ सह नहीं पाते और दम तोड़ देते हैं। उनके परिजन आरà¥à¤¥à¤¿à¤• मजबूरियों की चलते उनके शवों को वापस à¤à¤¾à¤°à¤¤ ले जाने में सकà¥à¤·à¤® नहीं होते। हम à¤à¤¸à¥‡ लोगों की मदद करते हैं और उनके शवों को पंजाब तक पहà¥à¤‚चाते हैं। इतना ही नहीं, हमारी संसà¥à¤¥à¤¾ à¤à¤¸à¥‡ यà¥à¤µà¤¾à¤“ं के परिजनों के खाते में पैसा à¤à¥€ जमा कराती है ताकि उनकी मदद हो सके।
गà¥à¤°à¥€à¤¸ में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ राजदूत रà¥à¤¦à¥à¤°à¥‡à¤‚दà¥à¤° टंडन बताते हैं कि परोपकारी सà¥à¤°à¤¿à¤‚दर पाल सिंह की मदद से यूà¤à¤ˆ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ शहरों से अब तक लगà¤à¤— 350 शवों को पंजाब पहà¥à¤‚चाया जा चà¥à¤•ा है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि हमने 21 सदसà¥à¤¯à¥€à¤¯ समिति बनाई है, जो गà¥à¤°à¥€à¤¸ की जेलों में बंद यà¥à¤µà¤¾à¤“ं की जानकारी जà¥à¤Ÿà¤¾à¤•र हमें देती है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि अवैध रूप से गà¥à¤°à¥€à¤¸ पहà¥à¤‚चने वालों में सिरà¥à¤« पंजाबी यà¥à¤µà¤• ही नहीं होते बलà¥à¤•ि बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में यà¥à¤µà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ जाती हैं। लेकिन वहां जाकर इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ न तो नौकरी मिलती है और न ही इनका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ पूरा होता है। à¤à¤¸à¥‡ में ये लड़कियां गलत हाथों में पड़कर अपनी जिंदगी खराब कर लेती हैं।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login