इंटरनेशनल हिंदी à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ (आईà¤à¤šà¤) की तरफ से वरà¥à¤œà¥€à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में आयोजित कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में हासà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ और कविताओं की जमकर रसधाराà¤à¤‚ बहीं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के तीन पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ कवियों-कलाकारों - अरà¥à¤£ जेमिनी, शंà¤à¥‚ शिखर और मà¥à¤®à¤¤à¤¾à¤œ नसीम ने अपनी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ लोगों का मन मोह लिया।
आईà¤à¤šà¤ के हालिया कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ की इस परंपरा को बरकरार रखते हà¥à¤ तीन वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯à¤•ारों-कवियों ने हासà¥à¤¯ à¤à¤µà¤‚ कलातà¥à¤®à¤• अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के मनोरम मिशà¥à¤°à¤£ से शाम को यादगार बना दिया।
अरà¥à¤£ जेमिनी ने हासà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ में लिपटी कविताओं और चà¥à¤Ÿà¤•à¥à¤²à¥‹à¤‚ से कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की। हरियाणा के रहने वाले अरà¥à¤£ à¤à¤• लेखक, कवि, वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯à¤•ार और टीवी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥‹à¤¤à¤¾ हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हिंदी अकादमी से काका हाथरसी पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार, हरियाणा साहितà¥à¤¯ अकादमी से हरियाणा गौरव समà¥à¤®à¤¾à¤¨ जैसे पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिल चà¥à¤•े हैं।
शंà¤à¥ शिखर ने à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड अप कॉमेडियन के रूप में अपने करियर की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ की थी। वाह वाह कà¥à¤¯à¤¾ बात है, से लेकर गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ इंडियन लाफà¥à¤Ÿà¤° चैलेंज तक में वह अपनी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾ का लोहा मनवा चà¥à¤•े हैं। कॉमेडी के अलावा शंà¤à¥ लेखन à¤à¥€ करते हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कई उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ और कविताà¤à¤‚ लिखी हैं।
कवयितà¥à¤°à¥€ मà¥à¤®à¤¤à¤¾à¤œ नसीम अपनी असाधारण आवाज़ और à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¥‡à¤œà¤• कविताओं के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हैं। उनकी लेखन शैली में सरलता और गहनता की अनोखा मिशà¥à¤°à¤£ दिखता है। उनकी कविताओं में गहरी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• अनà¥à¤—ूंज सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ देती है, जो सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ वालों पर अमिट छाप छोड़ती है।
डॉ. नरेंदà¥à¤° टंडन ने कवियों का परिचय दिया। आईà¤à¤šà¤ डीसी चैपà¥à¤Ÿà¤° के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª सिंह ने समारोह का संचालन किया। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ दूतावास की तरफ से पà¥à¤°à¤¥à¤® सचिव (संसà¥à¤•ृति व शिकà¥à¤·à¤¾) नेहा सिंह, दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ सचिव (पà¥à¤°à¥‡à¤¸, सूचना व संसà¥à¤•ृति) रवीश कà¥à¤®à¤¾à¤°, अताशे राजीव आहूजा पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रहे।
कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤œà¤•ों में नेशनल काउंसिल ऑफ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ इन अमेरिका, जीआईà¤, à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ ऑफ इंडियन मà¥à¤¸à¥à¤²à¤¿à¤®à¥à¤¸, द गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² ऑरà¥à¤—नाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडियन ओरिजिन-मेटà¥à¤°à¥‹ डीसी के अलावा डॉ. विवेक वैद, मनिंदर सिंह और डॉ. सà¥à¤°à¥‡à¤¶ गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रहे।
वाशिंगटन मेटà¥à¤°à¥‹ à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की कई पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित हसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ ने इस यादगार शाम का आनंद लिया, जिनमें डॉ. à¤. अबà¥à¤¦à¥à¤²à¥à¤²à¤¾, डॉ. हरिहर सिंह, डॉ. रेणà¥à¤•ा मिशà¥à¤°à¤¾, डॉ. सà¥à¤®à¤¨ वरà¥à¤§à¤¨, डॉ. तहूरा कावाजा, डॉ. जफर इकबाल, कलीम कावाजा, सà¥à¤¨à¥€à¤² सिंह, तà¥à¤°à¤¿à¤à¥à¤µà¤¨ सिंह और नà¥à¤œà¥ˆà¤°à¤¾ आज़म पà¥à¤°à¤®à¥à¤– थे।
अमेरिका के वरà¥à¤œà¥€à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ रोजलिन में आईà¤à¤šà¤ की 1980 में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ हिंदी संसà¥à¤•ृति à¤à¤µà¤‚ साहितà¥à¤¯ के समृदà¥à¤§ विरासत का जशà¥à¤¨ मनाने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से की गई थी। तब से लेकर अब तक आईà¤à¤šà¤ à¤à¤• समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ सांसà¥à¤•ृतिक संसà¥à¤¥à¤¾ के रूप में विकसित हà¥à¤† है।
आईà¤à¤šà¤“ पूरे अमेरिका में लगातार कवि समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨à¥‹à¤‚ के आयोजन से हिंदी के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित कवियों को à¤à¤• मंच पर लाने का काम करता है। आईà¤à¤šà¤ के मंच पर अटल बिहारी वाजपेयी, काका हाथरसी, डॉ. बà¥à¤°à¤œà¥‡à¤‚दà¥à¤° अवसà¥à¤¥à¥€, डॉ. गोपाल दास 'नीरज' और विपà¥à¤² डॉ. सोम ठाकà¥à¤° जैसे दिगà¥à¤—ज शामिल हो चà¥à¤•े हैं।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login