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रेगेनरॉन साइंस टैलेंट सर्च में भारतीय-अमेरिकियों का जलवा, 13 स्टूडेंट्स फाइनल में

अमेरिका के प्रतिष्ठित रेगेनरॉन साइंस टैलेंट सर्च (STS) के 2025 के फाइनल में भारतीय-अमेरिकी छात्रों का दबदबा है। टॉप 40 फाइनलिस्ट्स में से 13 छात्र भारतीय मूल के हैं, जो अपने शानदार शोध और वैज्ञानिक प्रतिभा से दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं।

इस कॉम्पिटिशन में लगभग 2500 बच्चों ने हिस्सा लिया था और 300 टॉप स्कॉलर्स चुने गए थे।  / Society fopr Science

अमेरिका में 2025 के रेगेनरॉन ( Regeneron) साइंस टैलेंट सर्च (STS) के टॉप 40 फाइनलिस्ट में 13 भारतीय-अमेरिकी छात्रों ने जगह बनाई है। ये अमेरिका की सबसे पुरानी à¤¸à¤¾à¤‡à¤‚स टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) कॉम्पिटिशन है, जो हाई स्कूल के सीनियर्स के लिए होती है।

ये रेगेनरॉन STS का 84वां à¤¸à¤¾à¤² है, à¤œà¥‹ रेगेनरॉन फार्मास्युटिकल्स और सोसाइटी फॉर साइंस मिलकर चलाते हैं। इसमें बेहतरीन युवा प्रतिभा à¤•ो पहचाना जाता है, जो साइंस में कमाल का हुनर और लीडरशिप दिखाते हैं। इस कॉम्पिटिशन में लगभग 2500 बच्चों ने हिस्सा लिया था और 300 टॉप स्कॉलर्स चुने गए थे। à¤‡à¤¸à¤¸à¥‡ अंदाजा à¤²à¤—ा सकते हैं कि कितना मुश्किल कॉम्पिटिशन रहा होगा।

सोसाइटी फॉर साइंस की प्रेसिडेंट और सीईओ माया अजमेरा ने फाइनलिस्ट्स की तारीफ करते हुए कहा, 'हम रेगेनरॉन साइंस टैलेंट सर्च के इन बेहतरीन फाइनलिस्ट्स की कमाल की कामयाबी को सलाम करते हैं। ये बच्चे आने वाले वक्त में होने वाली इनोवेशन्स की नई उम्मीद हैं। साइंस और इंजीनियरिंग के आने वाले लीडर्स को तैयार करके हम एक मजबूत इकॉनमी और बेहतर कल में निवेश कर रहे हैं, जो साइंस और टेक्नोलॉजी की तरक्की से चलेगा।'

इस साल के फाइनलिस्ट्स ने बहुत अलग-अलग फील्ड्स में रिसर्च की है। उन्होंने दुनिया की बड़ी-बड़ी चुनौतियों से निपटने की कोशिश की है। à¤œà¥ˆà¤¸à¥‡ कि जानवरों का दूसरे इलाकों में जाना, फसलों की सुरक्षा का जल्दी पता लगाना, कम खर्चे में कीटों से बचाव, एआई से बीमारियों का पता लगाना और कैंसर के इलाज के तरीके।

रेगेनरॉन के को-फाउंडर और प्रेसिडेंट à¤œà¥‰à¤°à¥à¤œ डी. यानकोपोलस (एमडी, पीएचडी) ने इस कॉम्पिटिशन के असर पर जोर देते हुए अपनी 1976 की जीत को याद किया। उन्होंने कहा, 'रेगेनरॉन - उस वक्त वेस्टिंगहाउस - साइंस टैलेंट सर्च में हिस्सा लेना मेरे लिए बहुत बड़ा पल था। à¤‡à¤¸à¤¨à¥‡ मुझे दिखाया कि साइंस का इस्तेमाल लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए कैसे किया जा सकता है। मुझे इन फाइनलिस्ट्स में भी यही दुनिया बदलने की ताकत नजर आती है।'

ये फाइनलिस्ट 6 से 12 मार्च, 2025 तक वाशिंगटन डी.सी. में 1.8 मिलियन डॉलर से ज्यादा à¤•ी इनाम राशि के लिए मुकाबला करेंगे। हर फाइनलिस्ट को कम से कम 25,000 डॉलर मिलेंगे। à¤Ÿà¥‰à¤ª 10 विनर्स को 40,000 डॉलर से लेकर 250,000 डॉलर तक मिलेंगे। कुल मिलाकर, इस कॉम्पिटिशन में 3 मिलियन डॉलर से ज्यादा की इनाम राशि बांटी जाएगी।

फाइनलिस्ट 9 मार्च को अपनी रिसर्च जनता के सामने ऑनलाइन और ऑफलाइन à¤¦à¥‹à¤¨à¥‹à¤‚ तरीके से पेश करेंगे। विजेताओं का ऐलान 11 मार्च को लाइव स्ट्रीम किए जाने वाले अवॉर्ड सेरेमनी में होगा। à¤¹à¤° फाइनलिस्ट के स्कूल को STEM शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 2,000 डॉलर मिलेंगे।

भारतीय-अमेरिकी फाइनलिस्ट ये हैं:

  • लास्या आचार्य, 17 साल, विलियम मेसन हाई स्कूल, ओहियो - AI से फसलों में होने वाली बीमारियों का पता लगाना
  • विद्या अंबाती, 17 साल, अल्बेर्मार्ले हाई स्कूल, वर्जीनिया - हालोपेरीडोल (गठिया के खतरे को कम करती है) à¤ªà¤° रिसर्च।
  • प्रिशा प्रकाश भट्ट, 17 साल, प्लेनो ईस्ट सीनियर हाई स्कूल, टेक्सास - सूखे और आर्सेनिक से बचाव के लिए चावल में जेनेटिक बदलाव।
  • इशाना चड्ढा, 17 साल, कॉमैक हाई स्कूल, न्यूयॉर्क - दिमाग के विकास में न्यूरोनल माइग्रेशन का अध्ययन।
  • विश्वम कपाड़िया, 17 साल, यूनिवर्सिटी स्कूल, ओहियो - दिल के वाल्व की मरम्मत कराने वाले मरीजों के परिणामों की भविष्यवाणी करना।
  • ऋतिक केतिनेनी, 17 साल, वेस्टव्यू हाई स्कूल, ओरेगॉन - लॉजिक सर्किट ऑप्टिमाइजेशन के लिए क्वांटम एल्गोरिथ्म का विकास। 
  • विवेक मलिक, 17 साल, हैकली स्कूल, न्यूयॉर्क - इम्यून रिस्पांस रेगुलेशन में प्लेक्सिन D1 की भूमिका का विश्लेषण।
  • अत्रेय मनस्वी, 19 साल, ऑरलैंडो साइंस मिडिल/हाई स्कूल, फ्लोरिडा - IoT आधारित मधुमक्खी कीट प्रबंधन प्रणाली।
  • सिद्धार्थ निरगुडकर, 17 साल, एक्टन-बॉक्सबरो रीजनल हाई स्कूल, मैसाचुसेट्स - संसाधन-सीमित सेटिंग्स में AI-चालित भविष्य कहनेवाला मॉडलिंग। 
  • थानुष पट्लोल्ला, 17 साल, विलियम जी. एनलो हाई स्कूल, नॉर्थ कैरोलिना - इलेक्ट्रॉन स्कैटरिंग डेटा का उपयोग करके परमाणु मॉडल विकास।
  • यश रंजीत, 18 साल, वेस्टमोंट हाई स्कूल, कैलिफोर्निया - न्यूरल नेटवर्क के साथ प्रदूषण फैलाव की मॉडलिंग।
  • अकिलन शंकरन, 17 साल, अल्बुकर्क अकादमी, न्यू मैक्सिको - भौतिकी में पायलट-वेव डायनामिक्स की खोज।
  • संदीप सावनी, 18 साल, हेरिक्स हाई स्कूल, न्यूयॉर्क - DNA-आधारित क्रिस्टल का उपयोग करके कैंसर चिकित्सा अनुसंधान।

 

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