उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ के गांवों में सà¥à¤¬à¤¹-सà¥à¤¬à¤¹ घना कोहरा छाया है। ठंडी हवा चल रही है। सब कà¥à¤› धà¥à¤‚धला-सा दिख रहा है। लेकिन बारह साल की अशलीन खेला को इससे कोई फरà¥à¤• नहीं पड़ता। अशलीन ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ की सबसे कम उमà¥à¤° की à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल की लेखिका हैं। वो पंजाब के गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठकाम कर रही हैं।
अपनी दो किताबों, '17 सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€à¤œ' और 'जरà¥à¤¨à¥€ थà¥à¤°à¥‚ हर जरà¥à¤¸à¥€' से मिली कमाई से वो गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को लैपटॉप, पैसे, गरà¥à¤® टà¥à¤°à¥ˆà¤•सूट, मोजे, टोपियां, फल और अपनी किताबें दे रही हैं। जनवरी के महीने में कà¥à¤› जगहों पर तापमान दो डिगà¥à¤°à¥€ तक गिर जाता है। कई सà¥à¤•ूलों की कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤°à¥‚म फà¥à¤°à¤¿à¤œ से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंडे होते हैं। लेकिन अशलीन की लगन और मेहनत देखकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के चेहरे खिल उठते हैं। उनकी बातें सà¥à¤¨à¤•र बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की आंखों में उमà¥à¤®à¥€à¤¦ की à¤à¤• नई किरण जगमगा उठती है।
इस छोटी सी लेखिका का परिवार हर साल à¤à¤¾à¤°à¤¤ आता है ताकि अपने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¤ªà¤¨ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रह सकें। अशलीन ने अपनी पहली किताब गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹ साल की उमà¥à¤° में लिखी थीं। सात साल की उमà¥à¤° में à¤à¤¾à¤°à¤¤ आने के दौरान ही उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लिखने का शौक हà¥à¤†à¥¤ कोरोना लॉकडाउन के दौरान इस शौक को और निखारा। लॉकडाउन से पहले के à¤à¤• दौरे में वो पंजाब के कà¥à¤› गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से मिलीं। यहीं से अशलीन को इन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मदद करने की चाहत हà¥à¤ˆà¥¤
उनकी किताब की कहानियों में से à¤à¤• कहानी की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सात साल की उमà¥à¤° में à¤à¤¾à¤°à¤¤ के दौरे से मिली थी। अपने परिवार के साथ कार में आनंदपà¥à¤° साहिब गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¥‡ जा रही थीं। इस दौरान रासà¥à¤¤à¥‡ में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कई पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ मजदूरों के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सड़क किनारे à¤à¥à¤—à¥à¤—ियों में रहते देखा। ये देखकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बहà¥à¤¤ बà¥à¤°à¤¾ लगा और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मदद करने की ठान ली।
गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ साहिब से वापस आते वकà¥à¤¤ उनकी मां और दादी ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ केले दिठजिससे वो रासà¥à¤¤à¥‡ के गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बांट सकें। सैकड़ों बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥à¤‚ड की तरह दौड़ते हà¥à¤ उनके पास आ गà¤, हर बचà¥à¤šà¥‡ को बस à¤à¤• केला चाहिठथा। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समठआया कि दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में, खासकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ के गांवों में, à¤à¤• केला à¤à¥€ गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठबहà¥à¤¤ बड़ी बात होती है। अशलीन कहती हैं कि उसी पल उनके मन में गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मदद करने का जजà¥à¤¬à¤¾ पैदा हà¥à¤†à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के बारे में लिखने और उनकी मदद करने के लिठकà¥à¤› बड़ा करने का फैसला किया।
ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ वापस जाने के कà¥à¤› ही समय बाद कोविड-19 महामारी शà¥à¤°à¥‚ हो गई और लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन के दौरान अशलीन ने अपनी कहानियों को लिखने में समय बिताया। पहले उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पंजाब के गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ ली। अपनी रचनातà¥à¤®à¤•ता और कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करके अपनी पहली किताब '17 सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€à¤œ' की कहानियां लिखीं।
आशलीन कहती हैं कि सिडनी में अपने घर के पिछवाड़े से लेकर गà¥à¤«à¤¾à¤“ं, पहाड़ों और पंजाब के गांवों तक उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पाठकों को à¤à¤• कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾à¤¶à¥€à¤² यातà¥à¤°à¤¾ पर आमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया। वो सामाजिक अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ और अà¤à¤¾à¤µ पर विचार करने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करती हैं। खासकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ में सड़क किनारे à¤à¥à¤—à¥à¤—ियों में रहने वाले गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सामने आने वाली चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को उजागर करती हैं।
उनकी पहली किताब '17 सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€à¤œ' में से à¤à¤• कहानी, 'à¤à¤²à¤¿à¤¸à¤¾ à¤à¤‚ड जोसेफीन', विकसित और विकासशील देशों के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के जीवनशैली में अंतर दिखाती है। दूसरी कहानी, 'जॉमà¥à¤¬à¥€ वायरस डायरी à¤à¤‚टà¥à¤°à¥€', कोविड लॉकडाउन के दौरान उनके निजी अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ को रचनातà¥à¤®à¤• रूप से पेश करती है। इसमें à¤à¤• ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ सà¥à¤•ूली बचà¥à¤šà¥‡ की घर में कैद होने की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला गया है।
अशलीन ने गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¹ साल की उमà¥à¤° में अपनी पहली किताब, '17 सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€à¤œ', पà¥à¤°à¤•ाशित की। इस किताब से मिली सारी कमाई का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ चैरिटी और विकासशील देशों के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मदद करने में किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ के रिटरà¥à¤¨ à¤à¤‚ड अरà¥à¤¨ पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® के जरिठबोतलें और डिबà¥à¤¬à¥‡ इकटà¥à¤ ा करके और पौधे बेचकर खà¥à¤¦ ही इस किताब को छापने का खरà¥à¤šà¤¾ उठाया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'मैं अपने माता-पिता से बिना किसी आरà¥à¤¥à¤¿à¤• मदद के खà¥à¤¦ को सहारा देना और इस काम के लिठपैसे जà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨à¤¾ चाहती थी।'
उनकी दूसरी किताब, 'जरà¥à¤¨à¥€ थà¥à¤°à¥‚ हर जरà¥à¤¸à¥€' पिछले महीने पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤ˆ हैं। यह खेलों में लड़कियों के सामने आने वाली बाधाओं पर चिंतन करती है। इसकी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ उनकी छोटी बहन अवलीन से मिली है। अशलीन कहती हैं, 'जब मेरी बहन सà¥à¤•ूल के कà¥à¤°à¤¿à¤•ेट कà¥à¤²à¤¬ में नहीं जा सकी कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वो सिरà¥à¤« लड़कों के लिठथा, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बहà¥à¤¤ दà¥à¤– हà¥à¤†à¥¤ उसी घटना ने मà¥à¤à¥‡ लड़कियों के लिठसमान अवसरों की वकालत करने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया। दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में अà¤à¥€ à¤à¥€ लिंग पूरà¥à¤µà¤¾à¤—à¥à¤°à¤¹ छिपा हà¥à¤† है। यह किताब महिलाओं के उपेकà¥à¤·à¤¿à¤¤ अधिकारों पर पà¥à¤°à¤•ाश डालती है। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के अमीर और गरीब दोनों हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में यà¥à¤µà¤¾ महिलाओं की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं पर जोर देती है।' इस किताब के जरिठअशलीन विकासशील देशों के गरीब बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठधन जà¥à¤Ÿà¤¾ रही हैं।
उनके पिता अमरजीत ने बताया कि अशलीन ने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठ3.5 लाख रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ खरà¥à¤š किठहैं। इसके अलावा उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी पहली किताब '17 सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€à¤œ' से ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ के कैंसर काउंसिल और सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿ चिलà¥à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤¨ फाउंडेशन के लिठजो पैसा जà¥à¤Ÿà¤¾à¤¯à¤¾ था, वो à¤à¥€ शामिल है।
इस छोटी सी लड़की के नेक कामों में सरकारी हाई सà¥à¤•ूल कौलगठ(बलाचौर), जिला à¤à¤¸à¤¬à¥€à¤à¤¸ नगर को 10,000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡, तीन लैपटॉप और अपनी किताबें शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी सीनियर सेकेंडरी सà¥à¤•ूल सिमà¥à¤¬à¤²à¥‡ माजरा, जिला à¤à¤¸à¤¬à¥€à¤à¤¸ नगर को 10,000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡, दो लैपटॉप और किताबें। सरकारी पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤•ूल सजावलपà¥à¤° (जिला à¤à¤¸à¤¬à¥€à¤à¤¸ नवांशहर) को गरà¥à¤® टà¥à¤°à¥ˆà¤•सूट, टोपियां, मोजे, फल और लैपटॉप। हाई सà¥à¤•ूल कालà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¾à¤° (जिला होशियारपà¥à¤°) को दो लैपटॉप और किताबें। सरकारी पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤•ूल पंडोरी खजूर (जिला होशियारपà¥à¤°) को à¤à¤• लैपटॉप, गरà¥à¤® कपड़े और अपनी किताबें। सरकारी पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤•ूल हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨à¤ªà¥à¤° गà¥à¤°à¥ को (जिला होशियारपà¥à¤°) को à¤à¤• लैपटॉप, गरà¥à¤® कपड़े और अपनी किताबें। सरकारी पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤•ूल मलà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ नंगल (जिला होशियारपà¥à¤°) को à¤à¤• लैपटॉप, गरà¥à¤® कपड़े और अपनी किताबें। सरकारी पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤•ूल नूरपà¥à¤° (जिला जालंधर) को तीन लैपटॉप और अपनी किताबें देना शामिल है। अशलीन ने सड़क किनारे à¤à¥à¤—à¥à¤—ी में रहने वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¥€ गरà¥à¤® टà¥à¤°à¥ˆà¤•सूट, टोपियां, मोजे, फल और अपनी किताबें दीं। इन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ ने ही कà¥à¤› साल पहले होशियारपà¥à¤° रूपनगर हाईवे पर चंकौया गांव में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लिखने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया था।
उनके परिवार ने बताया कि अशलीन देश छोड़ने से पहले कà¥à¤› और सà¥à¤•ूलों में जाने और जरूरतमंद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को और लैपटॉप, गरà¥à¤® कपड़े और पैसे देने की योजना बना रही है। आशलीन कहती हैं, 'अपनी जड़ों से जà¥à¤¡à¤¼à¤•र और अपने माता-पिता के मूल सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के लोगों के लिठकà¥à¤› करने से मà¥à¤à¥‡ बहà¥à¤¤ संतà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ मिलती है। मà¥à¤à¥‡ अपने देश ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ से बहà¥à¤¤ पà¥à¤¯à¤¾à¤° है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं वहीं पैदा हà¥à¤ˆ हूं। लेकिन मà¥à¤à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल की होने पर à¤à¥€ बहà¥à¤¤ गरà¥à¤µ है। उमà¥à¤° महज à¤à¤• संखà¥à¤¯à¤¾ है। अगर हम दृढ़निशà¥à¤šà¤¯à¥€ और समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ हों, तो हम किसी à¤à¥€ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में कà¤à¥€ à¤à¥€ कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¥à¤¯ हासिल कर सकते हैं। वापस देने और समाज में योगदान करने की संतà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ है।'
पिछले कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‹ में अशलीन ने कई सà¥à¤•ूलों की सà¤à¤¾à¤“ं को संबोधित किया और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया कि वे अपने चà¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में अपना सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ दें और अपने जà¥à¤¨à¥‚न या पेशे के माधà¥à¤¯à¤® से समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की सेवा करें।अशलीन की पहली किताब '17 सà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥€à¤œ' ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ के 300 से अधिक सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ालयों के संगà¥à¤°à¤¹ का हिसà¥à¤¸à¤¾ है।
उनके पिता अमरजीत से बताते हैं कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पंजाब विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, पंजाब के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कला और सांसà¥à¤•ृतिक संघों और à¤à¤¸à¤¬à¥€à¤à¤¸ नगर के बà¥à¤²à¤¡ बैंक à¤à¤¨à¤œà¥€à¤“ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ में उनकी उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय उपलबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 'यंग ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¨ सिख ऑफ द ईयर अवारà¥à¤¡ 2024' के लिठफाइनलिसà¥à¤Ÿ के तौर पर नामांकित किया गया है। महिला मामलों की NSW मंतà¥à¤°à¥€ जोडी हैरिसन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जारी à¤à¤• विजà¥à¤žà¤ªà¥à¤¤à¤¿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, NSW सरकार 6 मारà¥à¤š, 2025 को सिडनी के इंटरनेशनल कनà¥à¤µà¥‡à¤‚शन सेंटर में NSW वà¥à¤®à¤¨ ऑफ द ईयर अवारà¥à¤¡à¥à¤¸ समारोह 2025 के दौरान अशलीन को राजà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करेगी।
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