साइंटिसà¥à¤Ÿ दिवà¥à¤¯à¤¾ माथà¥à¤° जीन थेरेपी में सà¥à¤§à¤¾à¤° की लाने के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ के साथ अहम शोध कर रही हैं। उनकी à¤à¤• खास रिसरà¥à¤š के लिठसिंथेटिक डीà¤à¤¨à¤ नैनोकणों पर उनके शोध के लिठराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ फाउंडेशन (NSF) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ फैकलà¥à¤Ÿà¥€ अरà¥à¤²à¥€ करियर डेवलपमेंट (CAREER) पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है।
दिवà¥à¤¯à¤¾ माथà¥à¤° जीन थेरेपी में सà¥à¤§à¤¾à¤° लाने के लिठडीà¤à¤¨à¤ नैनोटेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में कारà¥à¤¯ कर रही हैं। वे à¤à¤¸à¥‡ डीà¤à¤¨à¤ नैनोकणों का विकास कर रही हैं जिनका उपयोग विशिषà¥à¤Ÿ कोशिकाओं में चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ जीन पहà¥à¤‚चाने के लिठकिया जा सकता है। उनका दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण उनà¥à¤¨à¤¤ माइकà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपी को à¤à¤•ल-कोशिका इंजेकà¥à¤¶à¤¨ के साथ जोड़कर यह निगरानी करता है कि जीवित कोशिकाओं के अंदर ये कृतà¥à¤°à¤¿à¤® डीà¤à¤¨à¤ संरचनाà¤à¤‚ कैसे वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° करती हैं।
बता दें कि दिवà¥à¤¯à¤¾ माथà¥à¤° केस वेसà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¨ रिजरà¥à¤µ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ के आरà¥à¤Ÿ à¤à¤‚ड साइंस पीजी कॉलेज में फà¥à¤°à¥ˆà¤‚क होवोरà¥à¤•ा रसायन विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ की सहायक पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° हैं। वे केस वेसà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¨ रिजरà¥à¤µ के तीन संकाय सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• उन तीन संकाय सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में शामिल हैं, जो इस बार राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ फाउंडेशन (NSF) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ CAREER पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है।
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