à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी बाल साहितà¥à¤¯ लेखिका सीता सिंह को उनके चितà¥à¤° पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• ‘मैंगो मेमोरीज़’ के लिठफà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¡à¤¾ बà¥à¤• अवारà¥à¤¡à¥à¤¸ (FBA) में यà¥à¤µà¤¾ बाल साहितà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में गोलà¥à¤¡ मेडल से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। यह पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार उनकी अदà¥à¤à¥à¤¤ कहानी कहने की शैली को मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ देता है, जो परिवार, परंपरा और सांसà¥à¤•ृतिक विरासत को à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ लड़की की नजरों से दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है।
सीता सिंह अपनी रचनाओं में दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ संसà¥à¤•ृति, विविधता और सामाजिक-à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• शिकà¥à¤·à¤¾ को महतà¥à¤µ देती हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साहितà¥à¤¯ के माधà¥à¤¯à¤® से पारंपरिक विरासत को जीवंत रखने की कला के लिठयह समà¥à¤®à¤¾à¤¨ मिला।
‘मैंगो मेमोरीज़’ की कहानी
यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• à¤à¤• छोटी बचà¥à¤šà¥€ की अपनी पहली आम तोड़ने की याद बनाने की यातà¥à¤°à¤¾ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है। परिवार की कहानियों और सांसà¥à¤•ृतिक विरासत से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ होकर वह यह अनà¥à¤à¤µ पाना चाहती है।
लड़की अपने à¤à¤¾à¤ˆ की पहली आम तोड़ने की यादें सà¥à¤¨à¤¤à¥€ है और अपनी दादी से पतà¥à¤¥à¤° का उपयोग करने की सलाह à¤à¥€ लेती है। हालांकि, कई पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ के बावजूद, वह आम तोड़ने में सफल नहीं हो पाती। फिर à¤à¥€, वह हार नहीं मानती और अपनी अनूठी "मैंगो मेमोरी" बनाने के लिठदृढ़ रहती है।
परिवार, धैरà¥à¤¯ और संसà¥à¤•ृति का संदेश
यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• à¤à¤• सà¥à¤‚दर आम के बागान की पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि में सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ है और à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ बचà¥à¤šà¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ गई है। इसमें पारिवारिक परंपराओं का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ किया गया है और छोटे पाठकों को दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ संसà¥à¤•ृति से परिचित कराया गया है। धैरà¥à¤¯, लगन और पारिवारिक संबंधों की अहमियत को उजागर करने वाली यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अपनी सांसà¥à¤•ृतिक जड़ों को अपनाने और साà¤à¤¾ अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ के महतà¥à¤µ को समà¤à¤¨à¥‡ के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करती है।
साहितà¥à¤¯ में दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ पहचान को सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने की पहल
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शहर अहमदाबाद में जनà¥à¤®à¥€à¤‚ सीता सिंह अब दकà¥à¤·à¤¿à¤£ फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¡à¤¾ में निवास करती हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की किताबें लिखना इसलिठशà¥à¤°à¥‚ किया कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि साहितà¥à¤¯ में दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ की कमी को उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने महसूस किया। उनकी पहली पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• ‘बरà¥à¤¡à¥à¤¸ ऑफ ठफीदर’ को पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ डॉली पारà¥à¤Ÿà¤¨ की इमैजिनेशन लाइबà¥à¤°à¥‡à¤°à¥€ (Dolly Parton’s Imagination Library) में शामिल किया गया।
बचपन से लेखन का शौक
सीता सिंह को बचपन से ही अपनी दादी की मौखिक कथाओं और बहà¥-पीढ़ी वाले परिवार में रहने के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ मिली। वह अपनी कहानियों के माधà¥à¤¯à¤® से इन पारिवारिक यादों को साà¤à¤¾ करना पसंद करती हैं।
समà¥à¤®à¤¾à¤¨ समारोह और फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¡à¤¾ बà¥à¤• अवारà¥à¤¡à¥à¤¸
सीता सिंह और अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार विजेताओं को 3 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² 2025 को टलहासी के कैसà¥à¤•ेडà¥à¤¸ पारà¥à¤• में आयोजित ‘अबिटà¥à¤œà¤¼ फैमिली डिनर à¤à¤‚ड अवारà¥à¤¡à¥à¤¸ बैंकेट’ में समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया जाà¤à¤—ा। फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¡à¤¾ बà¥à¤• अवारà¥à¤¡à¥à¤¸, जिसे फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¡à¤¾ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ लाइबà¥à¤°à¥‡à¤°à¥€à¤œà¤¼ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समनà¥à¤µà¤¿à¤¤ किया जाता है, 2024 में पà¥à¤°à¤•ाशित उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों को समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ करने वाली à¤à¤• राजà¥à¤¯à¤µà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—िता है। इस वरà¥à¤·, 11 शà¥à¤°à¥‡à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में 190 योगà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से 31 विजेताओं का चयन किया गया।
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