यह जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 2009 की बात है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के ततà¥à¤•ालीन पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ डॉ. मनमोहन सिंह चà¥à¤¨à¤¾à¤µ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° के लिठफिरोजपà¥à¤° जिले के जलालाबाद आये हà¥à¤ थे। मà¥à¤à¥‡ उनकी रैली को कवर करने का काम सौंपा गया था। चूंकि मैं उनके साथ लंबे समय से बातचीत कर रहा था, इसलिठमैंने आयोजकों से उनके साथ à¤à¤• इंटरवà¥à¤¯à¥‚ के लिठअनà¥à¤°à¥‹à¤§ किया था। अनà¥à¤°à¥‹à¤§ सà¥à¤µà¥€à¤•ार कर लिया गया।
इससे पहले कि वह रैली को संबोधित करने जाते मà¥à¤à¥‡ मà¥à¤–à¥à¤¯ मंच के à¤à¤• तरफ à¤à¤• असà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ तंबू में ले जाया गया जहां साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ के लिठकà¥à¤› कà¥à¤°à¥à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और à¤à¤• मेज की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की गई थी। जब डॉ. मनमोहन सिंह आये तो मैं पहले से ही तंबू में बैठा हà¥à¤† था। अंदर आते ही उनके पहले शबà¥à¤¦ थे- हैलो पà¥à¤°à¤à¤œà¥‹à¤¤, कैसे हैं आप?
जिस तरह से उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मेरा सà¥à¤µà¤¾à¤—त किया उससे मà¥à¤à¥‡ सà¥à¤–द आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ हà¥à¤†à¥¤ डॉ. सिंह से अपना नाम सà¥à¤¨à¤•र मैं अà¤à¤¿à¤à¥‚त हो गया कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तब à¤à¥€ मेरा नाम याद रहा। वरà¥à¤· 2004 में उनके पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ बनने के बाद मैं उनसे नहीं मिला था। à¤à¤• जमीन से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿, उनकी सादगी और दूसरों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उनके समà¥à¤®à¤¾à¤¨ ने मà¥à¤à¥‡ हमेशा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया। खैर मैंने कहा- सर, मैं ठीक हूं। और पूछा- आप कैसे हैं, आपके हृदय की अà¤à¥€-अà¤à¥€ सरà¥à¤œà¤°à¥€ हà¥à¤ˆ है।
डॉ. सिंह ने कहा- बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ हà¥à¤†à¥¤ मैं ठीक हूà¤à¥¤ मिसà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤† कैसे हैं? द टà¥à¤°à¤¿à¤¬à¥à¤¯à¥‚न कैसा काम कर रहा है? इंटरवà¥à¤¯à¥‚ शà¥à¤°à¥‚ होने से पहले उनके ये अगले पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ थे। शà¥à¤°à¥€ à¤à¤š के दà¥à¤† उस समय द टà¥à¤°à¤¿à¤¬à¥à¤¯à¥‚न समूह के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ संपादक थे।
डॉ. मनमोहन सिंह के शà¥à¤°à¥€ à¤à¤š.के. सहित द टà¥à¤°à¤¿à¤¬à¥à¤¯à¥‚न के सà¤à¥€ संपादकों और उनके पूरà¥à¤µà¤µà¤°à¥à¤¤à¥€ शà¥à¤°à¥€ हरि जयसिंह के साथ सबसे अचà¥à¤›à¥‡ संबंध थे। रैली को कवर करने के बाद जब मैं चंडीगढ़ लौटा तो सबसे पहले शà¥à¤°à¥€ दà¥à¤† ने मà¥à¤à¤¸à¥‡ पूछा कि कà¥à¤¯à¤¾ मैं उनसे मिल सका?
मैंने कहा- जी सर, मैंने उनका à¤à¤• छोटा इंटरवà¥à¤¯à¥‚ लिया है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› अनà¥à¤¯ चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥€ रैलियों में जाना था। फिर मैं उस इंटरवà¥à¤¯à¥‚ को फाइल करने में जà¥à¤Ÿ गया। मà¥à¤à¥‡ पता था कि डॉ. सिंह अगली सà¥à¤¬à¤¹ द टà¥à¤°à¤¿à¤¬à¥à¤¯à¥‚न और उसके साथ मेरे उस इंटरवà¥à¤¯à¥‚ की तलाश करेंगे।
डॉ. मनमोहन सिंह को अकà¥à¤¸à¤° यह कहते हà¥à¤ उदà¥à¤§à¥ƒà¤¤ किया जाता था कि वह सà¥à¤¬à¤¹ की चाय के साथ सबसे पहली चीज टà¥à¤°à¤¿à¤¬à¥à¤¯à¥‚न का अंक देखना चाहते थे। द टà¥à¤°à¤¿à¤¬à¥à¤¯à¥‚न के अलावा उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चंडीगढ़ से पà¥à¤¯à¤¾à¤° था जहां उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पंजाब विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° के पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° के रूप में काम किया। पंजाब विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ परिसर के करीब ही उनका à¤à¤• घर था।
पंजाब विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के अलावा उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ विकास से संबंधित विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ में à¤à¤¾à¤— लेने के लिठCRRID में रहना पसंद था। वह CRRID के ततà¥à¤•ालीन निदेशक डॉ रचà¥à¤›à¤ªà¤¾à¤² मलà¥à¤¹à¥‹à¤¤à¥à¤°à¤¾ ​​के करीबी थे, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पहले पंजाब विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में à¤à¥€ काम किया था।
तब डॉ. सिंह ने चंडीगढ़ में सेकà¥à¤Ÿà¤° 19 सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ सेंटर फॉर रिसरà¥à¤š इन रूरल à¤à¤‚ड इंडसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤² डेवलपमेंट (CRRID) का दौरा किया। मà¥à¤à¥‡ हमेशा उनके कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ को कवर करने और उनका इंटरवà¥à¤¯à¥‚ लेने का दायितà¥à¤µ दिया जाता था।
वरà¥à¤· 2004 में डॉ. सिंह à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ बने। हमारी बातचीत जारी रही। बेशक, वह राजनेताओं की खांटी शैली वाले शखà¥à¤¸ नहीं थे। वह à¤à¤• शिकà¥à¤·à¤¾à¤µà¤¿à¤¦à¥, à¤à¤• विशà¥à¤µ सà¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€ थे, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 10 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक या लगातार दो कारà¥à¤¯à¤•ालों तक देश का नेतृतà¥à¤µ किया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने गठबंधन सरकार का नेतृतà¥à¤µ करके अपने राजनीतिक कौशल का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया और à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• शà¥à¤°à¥€ फतेहगढ़ साहिब से असंतà¥à¤·à¥à¤Ÿ अकाली सांसद à¤à¤¸à¤à¤¸ लिबरा की बदौलत अविशà¥à¤µà¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ से बच गà¤à¥¤
उनके पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ का पद संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ के बाद मेरा मिलना-जà¥à¤²à¤¨à¤¾ काफी कम हो गया था। जलालाबाद के अलावा मà¥à¤à¥‡ उनसे बातचीत करने का à¤à¤• और मौका तब मिला जब वह हिमाचल पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के पांवटा साहिब आये। वह चà¥à¤¨à¤¾à¤µ पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ पर थे।
हालांकि डॉ. मनमोहन सिंह कà¤à¥€ à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसद के निचले सदन यानी लोकसà¤à¤¾ के सदसà¥à¤¯ नहीं बन सके लेकिन उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने तीन दशक से अधिक समय के कारà¥à¤¯à¤•ाल के बाद इस साल अपà¥à¤°à¥ˆà¤² में सांसद के रूप में सेवानिवृतà¥à¤¤ होने तक ऊपरी सदन राजà¥à¤¯à¤¸à¤à¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ किया।
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