आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ शà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ रविशंकर का कहना है कि 2025 की वरà¥à¤²à¥à¤¡ हैपà¥à¤ªà¥€à¤¨à¥‡à¤¸ रिपोरà¥à¤Ÿ में à¤à¤¾à¤°à¤¤ की रैंकिंग, देश की असली खà¥à¤¶à¥€ को नहीं दिखाती। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'गरीबी का खà¥à¤¶à¥€ या नाखà¥à¤¶à¥€ से कोई खास कनेकà¥à¤¶à¤¨ नहीं है। आप देखेंगे, à¤à¤¾à¤°à¤¤ की à¤à¥à¤—à¥à¤—ियों में à¤à¥€ à¤à¤¸à¥‡ लोग हैं जो बहà¥à¤¤ खà¥à¤¶ हैं।' उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'वहां आपस में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ है, सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ कम है। गरीब लोग अपने संसाधन अमीरों से कहीं जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बांटते हैं।'
20 मारà¥à¤š को मीडिया से बात करते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ को 118वें नंबर पर देखकर हैरानी जताई। उनका कहना है कि देश में खà¥à¤¶à¥€ का पैमाना, इस गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² इंडेकà¥à¤¸ में इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² होने वाले पैमानों से बहà¥à¤¤ अलग है।
शà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ रविशंकर ने कहा, 'हालांकि मà¥à¤à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¤¤ को 118वें नंबर को लेकर मतà¤à¥‡à¤¦ है...। मà¥à¤à¥‡ लगता है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ इससे कहीं बेहतर है।' उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने रैंकिंग के पीछे की मेथडोलॉजी पर à¤à¥€ सवाल उठाà¤à¥¤
हर साल संयà¥à¤•à¥à¤¤ राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ खà¥à¤¶à¥€ दिवस पर जारी होने वाली वरà¥à¤²à¥à¤¡ हैपà¥à¤ªà¥€à¤¨à¥‡à¤¸ रिपोरà¥à¤Ÿ में 147 देशों को रैंक किया जाता है। ये रैंकिंग सोशल सपोरà¥à¤Ÿ, हेलà¥à¤¥, आजादी, दूसरों की मदद करने की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ (generosity), à¤à¥à¤°à¤·à¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤° के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ नजरिया और GDP जैसे फैकà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ पर आधारित होती हैं। इस साल फिर से फिनलैंड आठवीं बार टॉप पर रहा, उसके बाद डेनमारà¥à¤•, आइसलैंड, सà¥à¤µà¥€à¤¡à¤¨ और नीदरलैंडà¥à¤¸ हैं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ पिछले साल के 126वें नंबर से ऊपर जरूर आया है, लेकिन फिर à¤à¥€ रैंकिंग में बहà¥à¤¤ नीचे है।
रविशंकर ने बताया कि पिछले दस सालों में à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सà¥à¤•ोर में सà¥à¤§à¤¾à¤° हà¥à¤† है, खासकर सोशल सपोरà¥à¤Ÿ में। लेकिन उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि आजादी के मामले में à¤à¤¾à¤°à¤¤ का रैंक बहà¥à¤¤ खराब है। 'आजादी' से उनका मतलब है कि कà¥à¤¯à¤¾ लोगों को लगता है कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ समाज में अपनी पसंद का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ करने की आजादी है। लेकिन उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने तà¥à¤°à¤‚त ही ये à¤à¥€ कहा कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के मजबूत परिवार और सामदà¥à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤•à¥à¤šà¤° खà¥à¤¶à¥€ में बहà¥à¤¤ बड़ा योगदान देते हैं, और रिपोरà¥à¤Ÿ में इस बात को कम आंका गया है।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'मैं पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ घूम चà¥à¤•ा हूं। और मà¥à¤à¥‡ लगता है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इंसानी वैलà¥à¤¯à¥‚ बहà¥à¤¤, बहà¥à¤¤ ऊंचे हैं। दया, मेहमानों के साथ पेश आने का तरीका, लोगों का संसाधन बांटने का तरीका – ये सब वाकई कमाल की बात है। अगर आपके परिवार में कोई मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤ आती है, तो पूरा गांव मदद के लिठआ जाता है।'
ये पूछने पर कि कà¥à¤¯à¤¾ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लगता है कि पशà¥à¤šà¤¿à¤® और à¤à¤¾à¤°à¤¤ में खà¥à¤¶à¥€ की समठअलग है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'खà¥à¤¶à¥€ तो हर जगह à¤à¤• ही होती है।' लेकिन उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने तरà¥à¤• दिया कि मà¥à¤‚बई, दिलà¥à¤²à¥€ या लखनऊ जैसे कà¥à¤› बड़े शहरों का सतही विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में खà¥à¤¶à¥€ को तय करने वाली गहरी सामाजिक संरचनाओं को नहीं दिखा सकता।
रवि शंकर ने जोर देकर कहा कि à¤à¤• मà¥à¤–à¥à¤¯ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि सिरà¥à¤« आरà¥à¤¥à¤¿à¤• तरकà¥à¤•ी से खà¥à¤¶à¥€ नहीं मिलती। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'शांति के बिना खà¥à¤¶ नहीं रहा जा सकता। तनाव में रहने वाला इंसान कà¤à¥€ खà¥à¤¶ नहीं हो सकता।' मेडिटेशन लोगों को अकेलेपन से उबरने, आंतरिक शांति पाने में मदद करता है।'
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दूसरे देशों से तà¥à¤²à¤¨à¤¾ करते हà¥à¤, रैंकिंग के तरà¥à¤• पर सवाल उठाà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'मेकà¥à¤¸à¤¿à¤•ो 10वें नंबर पर है। मैं कहूà¤à¤—ा कि अगर मेकà¥à¤¸à¤¿à¤•ो को 10 दिया गया है, तो à¤à¤¾à¤°à¤¤ को कम से कम 9, शायद 8 या 5 मिलना चाहिà¤à¥¤' उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने आगे कहा कि à¤à¤²à¥‡ ही सà¥à¤•ैंडिनेवियाई देश ऊपर हैं, लेकिन उनकी खà¥à¤¶à¥€ की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की चिंता की कमी से बनती है।
रवि शंकर ने ये à¤à¥€ बताया कि à¤à¥‚टान को रैंकिंग से ही बाहर रखा गया है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'मैं कहूंगा कि à¤à¥‚टान टॉप देशों में से à¤à¤• है।'
उनके लिà¤, वरà¥à¤²à¥à¤¡ हैपà¥à¤ªà¥€à¤¨à¥‡à¤¸ रिपोरà¥à¤Ÿ से सीख ये है कि इसे फाइनल जजमेंट की बजाय समसà¥à¤¯à¤¾ पहचानने का à¤à¤• तरीका के तौर पर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करना चाहिà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा, 'अगर आपको ये नहीं पता कि आप में कà¥à¤¯à¤¾ गलत है, तो आप उसे ठीक नहीं कर सकते।' उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि अमेरिका जैसे समाजों में बढ़ते मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‡, अकेलापन और बेचैनी के लिठतà¥à¤°à¤‚त समाधान की जरूरत है।
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