खून की कमी टà¥à¤°à¥‰à¤®à¤¾ के मरीजों की मौत का सबसे बड़ा कारण है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वकà¥à¤¤ पर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ खून नहीं मिल पाता। इस गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ का हल ढूंढने के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• दीपांजन और उनकी टीम फà¥à¤°à¥€à¤œ डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¡ सिंथेटिक खून विकसित करने पर काम कर रही है।
पेन सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ में नैनोमेडिसिन के पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° दीपांजन और उनकी मलà¥à¤Ÿà¥€ इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚शनल टीम को नेशनल इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤¸ ऑफ हेलà¥à¤¥ (NIH) से खून के नैनो आरबीसी नामक विकलà¥à¤ª पर शोध के लिठ27 लाख डॉलर का गà¥à¤°à¤¾à¤‚ट मिला है। यह पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‹à¤Ÿà¤¾à¤‡à¤ª लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की तरह ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ ले जाने में सकà¥à¤·à¤® नैनोपारà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल पर आधारित है।
दीपांजन की टीम इससे पहले à¤à¤°à¤¿à¤¥à¥à¤°à¥‹à¤®à¤° नामक नकली खून उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ विकसित कर चà¥à¤•ी है जो लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की तरह ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ को बांधने और छोड़ने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखता है। इस शोध को à¤à¤¨à¤†à¤ˆà¤à¤š से 14 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग मिल चà¥à¤•ी है।
दीपांजन कहते हैं कि गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ या यà¥à¤¦à¥à¤§à¤—à¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ इलाकों में खून सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° करने की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ न होने के कारण बà¥à¤²à¤¡ टà¥à¤°à¤¾à¤‚सफà¥à¤¯à¥‚जन संà¤à¤µ नहीं होता। à¤à¤¸à¥‡ में कृतà¥à¤°à¤¿à¤® ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ वाहक की सखà¥à¤¤ जरूरत होती है जो खून का विकलà¥à¤ª बन सके।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि उनका लकà¥à¤·à¥à¤¯ à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤, ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ थेरेपà¥à¤¯à¥‚टिक विकसित करना है जो उन हालात में जान बचा सके जहां सà¥à¤Ÿà¥‹à¤° किया गया खून उपलबà¥à¤§ न हो पाà¤à¥¤ उनकी टीम अब नठमटीरियलà¥à¤¸ बना रही है जो लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं की नकल करने में सकà¥à¤·à¤® होंगे।
दीपांजन ने पेन सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ को बताया कि हेलà¥à¤¥ और मेडिसिन में मटीरियल रिसरà¥à¤šà¤°à¥à¤¸ की रचनातà¥à¤®à¤•ता असीमित है। हम इस महतà¥à¤µà¤¾à¤•ांकà¥à¤·à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ में यही साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह शोध दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में इमरजेंसी मेडिकल सरà¥à¤µà¤¿à¤¸à¥‡à¤œ को मजबूत बनाने और लाखों लोगों की जानें बचाने की दिशा में à¤à¤• बड़ा कदम साबित हो सकता है।
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