विखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ लेखक अमिताव घोष ने अपने शानदार लेखन के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित डच इरासà¥à¤®à¤¸ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जीता है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यह पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ और मानवता पर लिखी किताब के लिठमिला है। इस किताब में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ उपमहादà¥à¤µà¥€à¤ª पर इसके पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ को बताया है।
पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार समिति ने à¤à¤• बयान में कहा, "घोष ने इस पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ पर गहराई से विचार किया है कि इस असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µà¤—त खतरे के साथ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ कैसे किया जाà¤, जो हमारी कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ से परे है।" बता दें कि डच किंग विलेम-अलेकà¥à¤œà¥‡à¤‚डर दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाने वाला इरासà¥à¤®à¤¸ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार "यूरोप और उसके बाहर सामाजिक विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ या कला के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में असाधारण योगदान" के लिठदिया जाता है। विजेता को 150,000 यूरो (157,000 डॉलर) का नकद पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार à¤à¥€ मिलेगा।
पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने वाली संसà¥à¤¥à¤¾ पà¥à¤°à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤® à¤à¤°à¤¾à¤¸à¥à¤®à¤¿à¤à¤¨à¤® फाउंडेशन ने कहा कि घोष ने बताया कि जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ उपमहादà¥à¤µà¥€à¤ª में मानव नियति से "अटूट रूप से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡" हैं। इसमें उनकी कृति "द हंगà¥à¤°à¥€ टाइड" का हवाला दिया गया है, जिसमें दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ गया है कि कैसे समà¥à¤¦à¥à¤° का बढ़ता सà¥à¤¤à¤° दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के सबसे बड़े मैंगà¥à¤°à¥‹à¤µ वन, सà¥à¤‚दरबन में जीवन को तबाह कर रहा है।
68 वरà¥à¤·à¥€à¤¯ राइटर घोष ने अपने लेखन में राजनीति को लेकर à¤à¥€ आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल लिखे हैं, जिसमें उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने "द गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ डिरेंजमेंट" में यà¥à¤¦à¥à¤§ और वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° के संदरà¥à¤ में जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ पर लिखा है। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार समिति ने कहा, "समठऔर कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से वह आशा की जगह बनाते हैं, जो परिवरà¥à¤¤à¤¨ के लिठà¤à¤• पूरà¥à¤µà¤¾à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤·à¤¾ है।"
गौरतलब है कि कोलकाता में जनà¥à¤®à¥‡ घोष ने कई साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जीते हैं, जिनमें 2018 में जीता à¤à¤¾à¤°à¤¤ का शीरà¥à¤· पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤ªà¥€à¤ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार à¤à¥€ शामिल है।
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