अमोल पोफली को उनके अनोखे और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ शोध के लिठरिचरà¥à¤¡ जे. कोकेस पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। यह पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार नॉरà¥à¤¥ अमेरिकन कैटालिसिस सोसाइटी (NACS) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दिया जाता है, जो कैटालिसिस यानी रासायनिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को तेज करने वाले पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ शोध को मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ देता है। अमोल सà¥à¤Ÿà¥‹à¤¨à¥€ बà¥à¤°à¥à¤• यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ के मैटेरियल साइंस और केमिकल इंजीनियरिंग विà¤à¤¾à¤— में पीà¤à¤šà¤¡à¥€ के छातà¥à¤° हैं। उनका शोध मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ संरकà¥à¤·à¤£ और सतत ऊरà¥à¤œà¤¾ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में कारà¥à¤¬à¤¨ डाइऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ (CO2) और कारà¥à¤¬à¤¨ मोनोऑकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ (CO) को उपयोगी ईंधन में बदलने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ है।
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