à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ लेखिका बानू मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• का कहना है कि सà¤à¥€ लेखक अपने अनà¥à¤à¤µ का उपयोग करते हैं। चाहे सचेत रूप से या अनजाने में। इसमें उनके अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ बà¥à¤•र पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार विजेता लघॠकहानी संगà¥à¤°à¤¹ में आतà¥à¤®à¤¦à¤¾à¤¹ के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ की शीरà¥à¤·à¤• कहानी à¤à¥€ शामिल है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾ कनà¥à¤¨à¤¡à¤¼ में लिखने वाले पहले लेखक के रूप में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित साहितà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जीतने वाली मà¥à¤¶à¥à¤¤à¤¾à¤• ने कहा कि लेखक की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करना है।
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