नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• में रहने वाले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के लेखक अमिताव घोष (Amitav Ghosh) को इरासà¥à¤®à¤¸ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार 2024 (Erasmus Prize) से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ करने का à¤à¤²à¤¾à¤¨ किया गया है। यह पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार डच सांसà¥à¤•ृतिक संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¤® इरासà¥à¤®à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¤® फाउंडेशन (Praemium Erasmianum Foundation) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाता है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के अमिताव घोष ने कहा कि पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करके मैं खà¥à¤¦ को बेहद समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ महसूस कर रहा हूं। इस पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार के तहत 163,947.75 अमेरिकी डॉलर (150,000 यूरो) की राशि पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की जाती है। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार 2024 की शरद ऋतॠमें पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाà¤à¤—ा।
So this just happened... needless to say, I am delighted and hugely honored! It's an incredible privilege to follow in the footsteps of legends like @Trevornoah, A.S. Byatt and Barbara Ehrenreich. More here: https://t.co/NIxzxQbqcy pic.twitter.com/4eIQJfz2Jq
— Amitav Ghosh (@GhoshAmitav) March 7, 2024
जारी बयान के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, अमिताव घोष को जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ के अà¤à¥‚तपूरà¥à¤µ वैशà¥à¤µà¤¿à¤• संकट पर इमेजिन द अनथिंकेबल थीम में उनके योगदान के लिठमानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ मिली। घोष ने इस सवाल पर गहराई से विचार किया है कि असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के इस खतरे को लेकर किस तरह नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ किया जा सकता है। वह अतीत के बारे में समà¥à¤®à¥‹à¤¹à¤• कहानियों के माधà¥à¤¯à¤® से अनिशà¥à¤šà¤¿à¤¤ à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ को सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ करके à¤à¤• उपाय दिखाते हैं। वह अपनी कलम का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करके यह दिखाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं कि जलवायॠसंकट असल में à¤à¤• सांसà¥à¤•ृतिक समसà¥à¤¯à¤¾ है जो कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ की कमी के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प जनà¥à¤® लेता है।
कोलकाता में साल 1956 में जनà¥à¤®à¥‡ घोष ने ऑकà¥à¤¸à¤«à¥‹à¤°à¥à¤¡ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से सामाजिक मानव विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ की पढ़ाई की है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इमिगà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨, डायसà¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¾ और सांसà¥à¤•ृतिक पहचान जैसे विषयों पर मानवीय पहलू को समाहित करते हà¥à¤ कई à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ और पतà¥à¤°à¤•ारीय निबंध लिखे हैं।
अमिताव घोष को 2007 में à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार की तरफ से पदà¥à¤® शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया जा चà¥à¤•ा है। वह 2009 में रॉयल सोसाइटी ऑफ लिटरेचर के फेलो रहे हैं। 2015 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फोरà¥à¤¡ फाउंडेशन आरà¥à¤Ÿ ऑफ चेंज फेलो नामित किया जा चà¥à¤•ा है। 2018 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤ªà¥€à¤ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिला था। 2019 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मासà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤š विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‡à¤Ÿ की मानद उपाधि मिल चà¥à¤•ी है। फॉरेन पॉलिसी पतà¥à¤°à¤¿à¤•ा दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ वैशà¥à¤µà¤¿à¤• विचारकों में से à¤à¤• के रूप में मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दी जा चà¥à¤•ी है।
उनका पहला उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ द सरà¥à¤•ल ऑफ रीज़न 1986 में जारी हà¥à¤† था। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने द शैडो लाइनà¥à¤¸, द कलकतà¥à¤¤à¤¾ कà¥à¤°à¥‹à¤®à¥‹à¤¸à¥‹à¤®, द गà¥à¤²à¤¾à¤¸ पैलेस, द हंगà¥à¤°à¥€ टाइड और गन आइलैंड जैसी रचनाà¤à¤‚ की हैं। नॉन-फिकà¥à¤¶à¤¨ में उनकी पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कृतियों में इन à¤à¤¨ à¤à¤‚टीक लैंड, डांसिंग इन कंबोडिया à¤à¤‚ड à¤à¤Ÿ लारà¥à¤œ इन बरà¥à¤®à¤¾, काउंटडाउन और द इमाम à¤à¤‚ड द इंडियन आदि पà¥à¤°à¤®à¥à¤– हैं।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने द इबिस टà¥à¤°à¤¿à¤²à¤œà¥€ à¤à¥€ तैयार की है, जिसकी पहली किसà¥à¤¤ सी ऑफ पॉपीज़ को 2008 के मैन बà¥à¤•र पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार के लिठचà¥à¤¨à¤¾ गया था। इसके बाद रिवर ऑफ सà¥à¤®à¥‹à¤• और उसके बाद फà¥à¤²à¤¡ ऑफ फायर को यह समà¥à¤®à¤¾à¤¨ मिला था।
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