लेखिका निधि ठाकà¥à¤° ने 25 साल पहले अपने सपनों को पूरा करने के लिठसात समंदर पार जाने के लिठअपनी पहली उड़ान à¤à¤°à¥€ थी। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पता था कि आगे कà¥à¤¯à¤¾ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ आने वाली हैं। लेकिन वह उनके लिठपूरी तरह तैयार थीं। वह विदेशी धरती पर अपने लिठनई जिंदगी बनाना चाहती थीं। निधि याद करती हैं कि à¤à¤• वकà¥à¤¤ था जब à¤à¤¾à¤°à¤¤ में फोन पर बात करने के लिठ5 डॉलर का सà¥à¤•à¥à¤°à¥ˆà¤š कारà¥à¤¡ खरीदना होता था, जिससे सिरà¥à¤« 20 मिनट ही बात हो पाती थी। à¤à¤¸à¥‡ में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बहà¥à¤¤ खालीपन महसूस होता था। ये खालीपन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ संसà¥à¤•ृति और नई पहचान के करीब ले गया। जब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ हà¥à¤† कि उनके अनà¥à¤à¤µ काफी अनोखे थे, तब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इसे à¤à¤• किताब का रूप दिया। यह à¤à¤¸à¥€ किताब थी जो पूरे अमेरिका में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के लोगों की आवाज बन गई। निधि ने नà¥à¤¯à¥‚ इंडिया अबà¥à¤°à¥‰à¤¡ के साथ सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² इंटरवà¥à¤¯à¥‚ में पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚, नई पहचान, लेखन और सशकà¥à¤¤à¤¿à¤•रण के अपने सफर पर खà¥à¤²à¤•र बात की।
अपने परिवार, शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ वरà¥à¤·à¥‹à¤‚, परवरिश और लेखन के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ रà¥à¤à¤¾à¤¨ के बारे में कà¥à¤› बताइà¤à¥¤
निधि ने कहा कि मैं देहरादून में पली बढ़ी हूं। सà¥à¤•ूली शिकà¥à¤·à¤¾ वहीं से हà¥à¤ˆà¤‚। छोटी उमà¥à¤° से ही साहितà¥à¤¯ और पढ़ाई की खूबसूरत दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से मेरा परिचय हो गया। à¤à¤²à¥‡ ही घर में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ किताबें नहीं थीं लेकिन मेरी गायिका मां कला की कदà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ थीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को आकार दिया। मैंने कोई औपचारिक टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग नहीं ली, फिर à¤à¥€ छोटी उमà¥à¤° में ही लेखन शà¥à¤°à¥‚ कर दिया। मà¥à¤à¥‡ जब à¤à¥€ मà¥à¤à¥‡ समय मिलता, मैं कविताओं और जरà¥à¤¨à¤² लिखती। मैं सà¥à¤•ूल की मैगजीन की संपादक थी।
निधि ने आगे बताया कि कॉलेज में अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° उनका मà¥à¤–à¥à¤¯ विषय था। अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ साहितà¥à¤¯ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सरोकार नहीं था। फिर à¤à¥€ मैंने उसे चà¥à¤¨à¤¾à¥¤ मैं पतà¥à¤°à¤•ार बनना चाहती थी। इकनोमिकà¥à¤¸ पढ़ते हà¥à¤ मैंने कई अखबारों और मैगजीनों में लेख लिखे। इनमें फिकà¥à¤¶à¤¨ और नॉन फिकà¥à¤¶à¤¨ दोनों तरह के लेख और कहानियां थीं। जेà¤à¤¨à¤¯à¥‚ से इकनोमिकà¥à¤¸ में पोसà¥à¤Ÿ गà¥à¤°à¥‡à¤œà¥à¤à¤¶à¤¨ के बाद मैं 1999 में शिकागो यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ से पोसà¥à¤Ÿ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‡à¤Ÿ और à¤à¤°à¤¿à¤œà¥‹à¤¨à¤¾ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ से पीà¤à¤šà¤¡à¥€ के लिठअमेरिका आ गई। अà¤à¥€ मैं नà¥à¤¯à¥‚जरà¥à¤¸à¥€ में पति और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ रहती हूं। मैं माता-पिता, लेखक, अरà¥à¤¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€ और सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवक की à¤à¥‚मिका में खà¥à¤¶ हूं।
दà¥à¤µà¤¿à¤à¤¾à¤·à¥€ लेखन होने के नाते आपको अपने लेखन के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ कहां से मिलती है? आप उनà¥à¤¹à¥‡ कैसे आकार देती हैं?
निधि ने बताया कि मैंने दोनों à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं में लेखन किया है। अपनी अपनी रचनातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के बारे में बताते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मà¥à¤à¥‡ इसकी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ अंदर से मिलती है। मà¥à¤à¥‡ इसकी बाहर तलाश नहीं करनी पड़ती। मेरी कहानियां शायद कालà¥à¤ªà¤¨à¤¿à¤• हैं लेकिन गहराई से à¤à¤• वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ हैं। मेरी कहानियों रचनातà¥à¤®à¤• होती हैं, साथ ही उनमें कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾à¤“ं और वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ की à¤à¤²à¤• होती है। रचनातà¥à¤®à¤• लेखन के साथ समसà¥à¤¯à¤¾ यह है कि कहानी का अंत अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ होता है। मैं सिरà¥à¤« कथा, पातà¥à¤°à¥‹à¤‚, दृशà¥à¤¯à¥‹à¤‚ आदि पर फोकस करती हूं, यह जाने बिना कि यह कहां तक ले जाà¤à¤—ा। इसलिठमेरी कहानियां पूरà¥à¤µ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ अंत के बजाय अंतरà¥à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨ से मोड़ लेती हैं।
लेखन ने आपके वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त विकास को कैसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ किया है? आप लेखन में विविधता का सामंजसà¥à¤¯ कैसे बनाती हैं?
मेरा अधिकतर पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• लेखन मेरे उस समय के परिवेश के आसपास केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ था। उससे मà¥à¤à¥‡ अपने आसपास की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को समà¤à¤¨à¥‡ में मदद मिली, मेरे विचारों और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ मिली। परिवरà¥à¤¤à¤¨ ने मà¥à¤à¥‡ चीजों को सटीकता के साथ देखने में सकà¥à¤·à¤® बनाया। खासकर विदेशी धरती पर आने और à¤à¤• अपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ के रूप में यहां फिट होने की कोशिश ने मà¥à¤à¥‡ à¤à¤• वैशà¥à¤µà¤¿à¤• समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बना दिया है। मैं अलग अलग विषयों और अलग अलग शैलियों में लिखती हूं, लेकिन यह कà¤à¥€ जानबूà¤à¤•र नहीं होता। मैं à¤à¤¸à¥‡ विषयों को चà¥à¤¨à¤¤à¥€ हूं, जिनके पà¥à¤°à¤¤à¤¿ मेरा सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• à¤à¥à¤•ाव है। जैसे कि अपशिषà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन। à¤à¤• मधà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤—ीय परिवार में पली बढ़ी होने के नाते हम जानते हैं कि चीजों को कैसे फिर से इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने लायक बनाया जाà¤à¥¤ इसी तरह लिंग जैसे अनà¥à¤¯ विषय हैं। मेरे परिवार में मां और बहनों के बीच पिता इकलौते पà¥à¤°à¥à¤· थे। फिर à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बेटियों का सपोरà¥à¤Ÿ करने के लिठसà¤à¥€ रूढ़ियों को तोड़ा, मानदंडों को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ दी। इससे मà¥à¤à¥‡ लैंगिक संवेदनशीलता की गहरी समठमिली।
साहितà¥à¤¯ में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ का कà¥à¤¯à¤¾ महतà¥à¤µ है, खासकर आज की वैशà¥à¤µà¥€à¤•ृत और परसà¥à¤ªà¤° दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में?
साहितà¥à¤¯ हमें अपने अतीत और वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ को आकार देने वाले कारकों पर आतà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¥€à¤•à¥à¤·à¤£ करने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करता है। जब हम विविध पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि वाले लोगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखे साहितà¥à¤¯ को पढ़ते हैं और उससे जà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¥‡ हैं तो हम न केवल उनकी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करते हैं बलà¥à¤•ि यह à¤à¥€ समà¤à¤¤à¥‡ हैं कि हम दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को कैसे देखते हैं। हम सवाल करते हैं। हम चीजों को परखते हैं। पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करते हैं और अंततः बदलते हैं। सलमान रà¥à¤¶à¥à¤¦à¥€, अमृता पà¥à¤°à¥€à¤¤à¤®, खालिद हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨à¥€, à¤à¤®à¥€ टैन, पà¥à¤°à¥‡à¤® चंद जैसे कà¥à¤› नाम हैं, जो आपको विराम देते हैं और सोचने पर विवश करते हैं। कोई à¤à¥€ परिदृशà¥à¤¯ धीरे-धीरे विकसित होता है। मà¥à¤à¥‡ इस गतिशील समाज का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनने का सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ मिला à¤à¤• आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ के रूप में, अशà¥à¤µà¥‡à¤¤ महिला के रूप में, à¤à¤• मां के रूप में। मैं चीजों और संवेदनाओं पर बात कर सकती हूं और मà¥à¤à¥‡ यह पसंद है।
आपकी नवीनतम कृति 'When She Married Dr Patekar' है। आपको इसका विचार कैसे आया? ये पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤à¤µ से कैसे जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ है?
मेरा अमेरिका आना 1999 में हà¥à¤† था। सैन फà¥à¤°à¤¾à¤‚सिसà¥à¤•ो या नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• के उलट à¤à¤°à¤¿à¤œà¤¼à¥‹à¤¨à¤¾ में रहना काफी अलग था। à¤à¤¸à¥‡ में अमेरिका में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कैसे दिखते हैं और रहते हैं, इसकी कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ ही की जा सकती थी। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में घर पर बात करना काफी महंगा था। à¤à¤¸à¥‡ में मेरा अकेलापन मà¥à¤à¥‡ अपनी संसà¥à¤•ृति और पहचान के करीब लेकर आया। गà¥à¤°à¥ˆà¤œà¥à¤à¤¶à¤¨ करने के बाद मैं दूसरे शहर में चली गई। लेकिन शादी के बाद मैंने कई और डायसà¥à¤ªà¥‹à¤°à¤¾ देखे। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ देखकर मà¥à¤à¥‡ à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ हà¥à¤† कि मेरे अनà¥à¤à¤µ कितने सारà¥à¤µà¤à¥Œà¤®à¤¿à¤• थे। मà¥à¤à¥‡ à¤à¤¸à¥€ हर उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय यातà¥à¤°à¤¾ के पीछे की विसà¥à¤®à¤¯à¤•ारी ताकत महसूस हà¥à¤ˆà¥¤ मैंने उसी को अपनी कहानियों में पिरोया। मेरी कहानियां अपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ अनà¥à¤à¤µ और मानव असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के विविध आयामों की à¤à¤²à¤• पेश करती है।
आपकी कई कहानियां विदेशी धरती पर महिलाओं की मजबूत नायक वाली छवि और उनके विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पहलà¥à¤“ं को दिखाती हैं। आप पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ महिलाओं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ और सशकà¥à¤¤à¤¿à¤•रण को किस तरह देखती हैं?
मैं जानबूà¤à¤•र महिलाओं की कहानियां नहीं लिखती। फिर à¤à¥€ मेरे अधिकांश नायक महिलाà¤à¤‚ बन जाती हैं। कà¥à¤› टà¥à¤°à¤¿à¤—र करता है और मà¥à¤à¥‡ लिखने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता है। मेरी नई किताब की शीरà¥à¤·à¤• कहानी 'जब शी मैरिड डॉ पाटेकर' à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ बॉलीवà¥à¤¡ अदाकारा के वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• जीवन से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ है। इसी तरह à¤à¤• अनà¥à¤¯ कहानी में à¤à¤• चाचा के हाथों बचपन का दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— à¤à¤• आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ मां के लिठ'परिवार' शबà¥à¤¦ की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ को आकार देता है, जो अपनी बेटी को सशकà¥à¤¤ और मजबूत बनाना चाहती है। किताबों में आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की अलग अलग यातà¥à¤°à¤¾à¤“ं का वरà¥à¤£à¤¨ है। उनमें केंदà¥à¤°à¥€à¤¯ पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के रूप में महिलाà¤à¤‚ à¤à¥€ हैं, पà¥à¤°à¥à¤· à¤à¥€ हैं।
आप अपने काम को पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ और साहितà¥à¤¯ में सांसà¥à¤•ृतिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ के विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ नजरिठसे कैसे देखती हैं?
मà¥à¤à¥‡ लगता है कि मेरी किताब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की कहानियों को अचà¥à¤›à¥‡ से दिखाती हैं। यह मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से à¤à¤¸à¥‡ लोगों से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हैं जो अनजान कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में फिट होने, नठजीवन बनाने और अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरी कहानी में महिला नायकों की अलग-अलग यातà¥à¤°à¤¾à¤à¤‚ हैं। विवाह, उमà¥à¤° और मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की कहानियां हैं। इनमें से हर कहानी में हिंदी à¤à¤¾à¤·à¤¾ का पà¥à¤Ÿ है। यह काफी सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• à¤à¥€ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मैं à¤à¤• दà¥à¤µà¤¿à¤à¤¾à¤·à¥€ लेखक हूं। इसलिठजब पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पढ़ते हैं तो वे खà¥à¤¦ को इनसे जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ पाते हैं।
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