तिबà¥à¤¬à¤¤à¥€ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ दलाई लामा ने अपने 90वें जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ की पूरà¥à¤µ संधà¥à¤¯à¤¾ पर करà¥à¤£à¤¾ और आंतरिक शांति पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने का आहà¥à¤µà¤¾à¤¨ किया। 5 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को दिठअपने संदेश में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मानवता और धारà¥à¤®à¤¿à¤• सौहारà¥à¤¦ को बढ़ावा देने के अपने संकलà¥à¤ª को दोहराया।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि वह आमतौर पर अपना जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ नहीं मनाते, लेकिन दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤° में तिबà¥à¤¬à¤¤à¥€ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ और समरà¥à¤¥à¤•ों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठजा रहे आयोजनों को देखकर वह यह संदेश देने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ हà¥à¤à¥¤ खà¥à¤¦ को “à¤à¤• साधारण बौदà¥à¤§ à¤à¤¿à¤•à¥à¤·à¥” बताते हà¥à¤ दलाई लामा ने कहा कि वह इस बात की सराहना करते हैं कि लोग इस अवसर को करà¥à¤£à¤¾, सहृदयता और परोपकार जैसे मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को उजागर करने के लिठउपयोग कर रहे हैं।
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