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क्लीन एनर्जी की चुनौतियां-समाधान, प्रोफेसर आशीष आफले ऐसे दे रहे हैं योगदान

अमेरिका में जॉर्जिया के केनेसॉ स्टेट यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के प्रोफेसर आशीष आफले क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में बेहतरीन काम कर रहे हैं। वह बेहतर बैटरियां और फ्यूल सेल्स बनाने पर काम कर रहे हैं ताकि क्लीन एनर्जी को अधिक किफायती और भरोसेमंद बनाया जा सके।

केनेसॉ (Kennesaw) स्टेट यूनिवर्सिटी (KSU) में भारतीय मूल के प्रोफेसर आशीष आफले। / Website—kennesaw.edu

अमेरिका की जॉर्जिया में केनेसॉ (Kennesaw) स्टेट यूनिवर्सिटी (KSU) में भारतीय मूल के à¤†à¤¶à¥€à¤· आफले à¤¸à¤¹à¤¾à¤¯à¤• प्रोफेसर हैं। à¤µà¤¹ क्लीन एनर्जी पर काम कर रहे हैं। इनका फोकस है बेहतर एनर्जी स्टोरेज और कन्वर्जन सिस्टम बनाना। नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) से इनको ग्रांट भी मिली हुई है। à¤‡à¤¸à¤¸à¥‡ ये बैटरियों, फ्यूल सेल्स और दूसरी एनर्जी टेक्नोलॉजी के लिए बेहतर मटेरियल डेवलप कर रहे हैं।

KSU में à¤†à¤«à¤²à¥‡ 'क्लीन एनर्जी मटेरियल्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च लैब' (CEMER) चलाते हैं। यहां à¤…लग-अलग बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स मिलकर एनर्जी रिसर्च करते हैं। इनकी टीम में पीएचडी करने वाले छात्र और फर्स्ट-ईयर स्कॉलर भी हैं, जो अभी-अभी इस फील्ड में कदम रख रहे हैं। 

आफले कहते हैं, 'एनर्जी स्टोरेज और कन्वर्जन सिस्टम क्लीन एनर्जी को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं। एनर्जी सिस्टम में इलेक्ट्रोड मटेरियल का परफॉर्मेंस बेहतर करने से इनकी कुल लागत कम हो सकती है। इससे ये बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए अधिक à¤®à¥à¤¨à¤¾à¤¸à¤¿à¤¬ हो जाएंगे और क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी एक और भरोसेमंद पावर सोर्स बन जाएगी।'

आफले और उनकी टीम ये स्टडी कर रहे हैं कि हाइड्रोजन का असर मेटल ऑक्साइड नैनोस्ट्रक्चर के ग्रोथ पर कैसे पड़ता है। इनका मकसद है इलेक्ट्रोड का परफॉर्मेंस बेहतर करना ताकि एनर्जी स्टोरेज डिवाइस ज्यादा कारगर बन सकें। साथ ही, वो KSU के साउदर्न पॉलिटेक्निक कॉलेज ऑफ à¤‡à¤‚जीनियरिंग एंड इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी में पढ़ाते भी हैं। 

इस रिसर्च के अलावा à¤†à¤«à¤²à¥‡ एनर्जी स्टोरेज में कार्बन नैनोमटेरियल्स के इस्तेमाल पर भी काम कर रहे हैं। उनकी टीम मॉलिक्यूलर लेवल पर इन मटेरियल्स को बेहतर करके à¤…गली पीढ़ी के ऐसे डिवाइस बनाने पर काम कर रही है जो ज्यादा दिन चलें, बेहतर परफॉर्म करें और बनाने में सस्ते हों।

इनका रिसर्च फॉसिल फ्यूल से जुड़ी पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने में भी मदद करता है। क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, जैसे सॉलिड ऑक्साइड फ्यूल सेल्स (SOFCs), के लिए एक बड़ी चुनौती ये है कि हवा में मौजूद प्रदूषक इनकी एफिशिएंसी और लाइफस्पैन को कम कर देते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए à¤†à¤«à¤²à¥‡ की लैब ऐसे मटेरियल्स डेवलप कर रही है जो इन प्रदूषकों का विरोध करते हैं, जिससे फ्यूल सेल का परफॉर्मेंस बेहतर होता है।

इंटरडिसिप्लिनरी इंजीनियरिंग में पीएचडी कर रहे Duy Pham à¤¨à¥‡ केनेसॉ स्टेट यूनिवर्सिटी को लैब में काम करने के अपने अनुभव के बारे में बताया। Pham ने कहा, 'डॉक्टर आफले और जुनून से भरे रिसर्चर्स की टीम के साथ काम करना वाकई प्रेरणादायक है। ये लोग क्लीन एनर्जी सॉल्यूशन्स को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। यहां à¤®à¥à¤à¥‡ जो प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस मिला है, उसने न सिर्फ à¤®à¥‡à¤°à¥€ एनर्जी टेक्नोलॉजी की समझ को गहरा किया है, बल्कि मुझे ऐसे सस्टेनेबल विकल्प बनाने के लिए भी प्रेरित किया है जो दुनिया में असल में बदलाव ला सकें।'

अपनी यूनिवर्सिटी रिसर्च के अलावा à¤†à¤«à¤²à¥‡ à¤†à¤‰à¤Ÿà¤°à¥€à¤š प्रोग्राम फॉर अर्ली रिसर्च एक्सपीरियंस ऑपॉर्च्युनिटी (OREO) के जरिए स्टूडेंट्स को मेंटर भी करते हैं। ये प्रोग्राम अटलांटा इलाके के हाई स्कूल के स्टूडेंट्स को रिसर्च इंटर्नशिप देता है, जिससे उन्हें STEM फील्ड्स में अनुभव मिलता है। इनमें से कई स्टूडेंट्स कॉलेज में साइंस और इंजीनियरिंग पढ़ते हैं। à¤•ुछ तो अपनी रिसर्च जारी रखने के लिए KSU में अंडरग्रेजुएट के तौर पर वापस भी आते हैं।

आफले à¤•हते हैं, 'मेरे स्टूडेंट्स लैब में हमारे काम का एक अहम हिस्सा हैं। मुझे उनको गाइड à¤•रने और उन्हें असली दुनिया की रिसर्च में हिस्सा बनने का मौका देने में यकीन है। इनमें से कई आगे जाकर एनर्जी सेक्टर में अपनी पढ़ाई और करियर को आगे बढ़ाते हैं।'

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