à¤à¤•ल विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ फाउंडेशन यूà¤à¤¸à¤ के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• रमेश शाह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवारà¥à¤¡ से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। शाह à¤à¤•ल के इतिहास में यह समà¥à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने वाले पहले और इकलौते सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवक हैं।
शिकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤µà¤‚ सशकà¥à¤¤à¤¿à¤•रण अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के जरिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ में गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ à¤à¤µà¤‚ आदिवासी समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ में बदलाव लाने के फाउंडेशन के मिशन के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जीवनपरà¥à¤¯à¤‚त समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ सेवा करने के लिठयह पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया गया है।
रमेश शाह 1970 के दशक में अमेरिका आकर 1976 में हà¥à¤¯à¥‚सà¥à¤Ÿà¤¨ में बस गठथे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 1999 में à¤à¤•ल यूà¤à¤¸à¤ की सह-सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की। पिछले दो दशकों में इस गैर-लाà¤à¤•ारी संसà¥à¤¥à¤¾ ने काफी तरकà¥à¤•ी की है और अब यह गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में 85,000 से अधिक सà¥à¤•ूलों का संचालन कर रही है।
संसà¥à¤¥à¤¾ का अनूठा à¤à¤•-शिकà¥à¤·à¤• à¤à¤•-सà¥à¤•ूल मॉडल वंचित कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में लोगों को शिकà¥à¤·à¤¾, सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ जागरूकता के साथ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से सशकà¥à¤¤ बनाने में जà¥à¤Ÿà¤¾ है। शाह ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को इस मिशन से जोड़ने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ है जिससे पूरे à¤à¤¾à¤°à¤¤ में समगà¥à¤° गà¥à¤°à¤¾à¤® विकास का अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ सकà¥à¤·à¤® हो सका है।
शाह ने कहा कि 2004 से हम हेलà¥à¤¥à¤•ेयर, पà¥à¤°à¤¿à¤µà¥‡à¤‚टिव हेलà¥à¤¥à¤•ेयर और सशकà¥à¤¤à¤¿à¤•रण के बारे में लोगों को जानकारी दे रहे हैं। हमने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बताया कि वे किस तरह शिकà¥à¤·à¤¾ और आरटीआई (सूचना का अधिकार) अधिनियम का उपयोग करके समाज को बदल सकते हैं और सरकार से पूछ सकते हैं कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¥à¤¯à¤¾ काम किया है। लोगों को आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से सकà¥à¤·à¤® बनाना à¤à¥€ जरूरी है।
à¤à¤•ल के कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® सिरà¥à¤« शिकà¥à¤·à¤¾ तक सीमित नहीं हैं। संसà¥à¤¥à¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯, महिलाओं के कौशल विकास, डिजिटल साकà¥à¤·à¤°à¤¤à¤¾ और टिकाऊ कृषि पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं आदि से संबंधित अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ का à¤à¥€ संचालन करती है।
शाह और उनकी पतà¥à¤¨à¥€ कोकिला à¤à¤¾à¤°à¤¤ à¤à¤° के दूरदराज के गांवों में खà¥à¤¦ जाकर कारà¥à¤¯ करते हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि शहरी और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ इलाके दोनों à¤à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤ का हिसà¥à¤¸à¤¾ हैं। विदेश में बसे लोगों को à¤à¤¾à¤°à¤¤ में अपने गांव का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना चाहिठऔर यह सोचना चाहिठकि आप किस तरह वहां तरकà¥à¤•ी ला सकते हैं।
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