यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ ऑफ नेबà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥à¤•ा मेडिकल सेंटर, कॉलेज ऑफ मेडिसिन (UNMC) ने पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° शांताराम जोशी को साल 2025 का सà¥à¤ªà¤¿à¤°à¤¿à¤Ÿ ऑफ कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ सरà¥à¤µà¤¿à¤¸ अवॉरà¥à¤¡ देने का à¤à¤²à¤¾à¤¨ किया है।
शांताराम जोशी जेनेटिकà¥à¤¸, सेल बायोलॉजी और à¤à¤¨à¤¾à¤Ÿà¥‰à¤®à¥€ विà¤à¤¾à¤— में पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यह समà¥à¤®à¤¾à¤¨ 16 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² को फैकलà¥à¤Ÿà¥€ सीनेट की सालाना बैठक में पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाà¤à¤—ा।
यह पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार à¤à¤¸à¥‡ फैकलà¥à¤Ÿà¥€ मेंबरà¥à¤¸ को दिया जाता है जो अपने अकादमिक कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ से आगे बढ़कर समाजसेवा में समय, जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और संसाधन लगाते हैं। जोशी 1983 से UNMC से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हैं। नेबà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥à¤•ा में आने के बाद से वह सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहे हैं।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि जब मैं नेबà¥à¤°à¤¾à¤¸à¥à¤•ा आया तो à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ बहà¥à¤¤ छोटा था लेकिन जलà¥à¤¦à¥€ ही हमें महसूस हà¥à¤† कि हमें à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ जगह चाहिठजहां पूजा, शिकà¥à¤·à¤¾ और सांसà¥à¤•ृतिक गतिविधियां हो सकें।
करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤• के गोकरà¥à¤£ में पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के परिवार में पले-बढ़े जोशी ने सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ सेंटर में धारà¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤·à¥à¤ ान शà¥à¤°à¥‚ किà¤à¥¤ इसे ओमाहा में à¤à¤• मंदिर की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ में मदद मिली। यह मंदिर आज आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• और सांसà¥à¤•ृतिक का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– केंदà¥à¤° बन चà¥à¤•ा है।
जोशी ने बताया कि ओमाहा में सà¤à¥€ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ और सहयोग की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया कि वे à¤à¥€ इसी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ के साथ लोगों को जोड़ें। हमने हमेशा à¤à¤¸à¥‡ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® आयोजित किठजो सà¤à¥€ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठथे ताकि सà¤à¥€ को लगे कि वे हमारे साथ जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ हैं।
चार दशकों तक अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ के दौरान उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कई छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया है। आरà¥à¤¥à¤¿à¤• कठिनाइयों से पीà¤à¤šà¤¡à¥€ तक का सफर तय करने वाले जोशी का कहना है कि वे चाहते थे कि उनके अनà¥à¤à¤µ अगली पीढ़ी के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ बनें।
जोशी नà¤-नठपढ़ाई के तरीके और तकनीक अपनाते हैं ताकि छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ को मजबूत अकादमिक नींव मिल सके। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि सबसे खास पल वह होता है जब कोई छातà¥à¤° बरसों बाद मà¥à¤à¤¸à¥‡ संपरà¥à¤• करता है और कहता है कि मैंने उसके करियर को दिशा देने में मदद की थी।
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