à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल की इतिहासकार à¤à¤µà¤‚ à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ शैलजा पाइक को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित मैकआरà¥à¤¥à¤° फैलोशिप से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। इसे आमतौर पर 'जीनियस गà¥à¤°à¤¾à¤‚ट' के रूप में जाना जाता है।फेलोशिप के तहत à¤à¤¾à¤°à¤¤ में जाति, लिंग और कामà¥à¤•ता पर पाइक के ज़बरदसà¥à¤¤ शोध कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सहयोग के लिठपांच वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक आठलाख डॉलर का अनà¥à¤¦à¤¾à¤¨ à¤à¥€ शामिल है।
शैलजा पाइक सिनसिनाटी विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° हैं। उनका फोकस à¤à¤¾à¤°à¤¤ की जाति वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में सबसे निचले सà¥à¤¤à¤° पर आने वाली दलित महिलाओं के उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रहता है जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 'अछूत' à¤à¥€ कहा जाता है। शैलजा का शोध जाति उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¨ और लैंगिक à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ है जो यह पता लगाता है कि दलित महिलाà¤à¤‚ à¤à¤¸à¥‡ दमनकारी सिसà¥à¤Ÿà¤® में कैसे सरà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤µ करती हैं।
शैलजा ने इस विषय पर काफी लिखा है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने Dalit Women’s Education in Modern India: Double Discrimination’ और ‘The Vulgarity of Caste: Dalits, Sexuality, and Humanity in Modern India’ जैसी किताबें à¤à¥€ लिखी हैं।
शैलजा पाइक ने मैकआरà¥à¤¥à¤° फैलोशिप पर कहा कि मैं इस मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ के लिठबेहद समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ महसूस कर रही हूं। यह फेलोशिप दलितों के योगदान, उनके विचारों, कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚, इतिहास और मानवाधिकारों के लिठलड़ाई का परिणाम है। यह दलित सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€à¤œ और à¤à¤• दलित महिला विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ होने के नाते मेरे योगदान का शानदार उदाहरण है।
शैलजा पाइक इस फेलोशिप को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने वाले सिनसिनाटी विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ (यूसी) की पहली पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° हैं। यूसी पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट नेविल जी पिंटो ने शैलजा पाइक की पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा करते हà¥à¤ कहा कि हम बहà¥à¤¤ रोमांचित हैं कि डॉ. पाइक को उनकी उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठमानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दी गई है। वह à¤à¤¸à¥‡ लोगों के लिठकाम कर रही हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सदियों से à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ का सामना करना पड़ा है।
विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ की तरफ से जारी बयान में बताया गया कि शैलजा पाइक, हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ के चारà¥à¤²à¥à¤¸ फेलà¥à¤ªà¥à¤¸ टैफà¥à¤Ÿ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित रिसरà¥à¤š पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° और यूसी के कॉलेज ऑफ आरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ à¤à¤‚ड साइंसेज में महिला, लिंग à¤à¤µà¤‚ कामà¥à¤•ता अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨, à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ और समाजशासà¥à¤¤à¥à¤° में à¤à¤«à¤¿à¤²à¤¿à¤à¤Ÿ हैं। वह ओहियो में मैकआरà¥à¤¥à¤° फैलोशिप पाने वाले 10 विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में से हैं। इतना ही नहीं, वह 1981 में अवॉरà¥à¤¡ के शà¥à¤°à¥‚ होने के बाद से इसे पाने वाली सिनसिनाटी शहर और सिनसिनाटी विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ की पहली विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ हैं।
मैकआरà¥à¤¥à¤° फैलोशिप à¤à¤¸à¥‡ लोगों के कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने असाधारण रचनातà¥à¤®à¤•ता के साथ कारà¥à¤¯ करते हà¥à¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ उपलबà¥à¤§à¤¿ हासिल की है और उनके कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ के और आधिक योगदान की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है।
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