अमेरिका में रहने के हिसाब से हम à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ डाउनटाउन को कम ही पà¥à¤°à¥€à¤«à¤° करते हैं। इसका पहला कारण है महंगे घर और दूसरा सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾à¥¤ वैसे, इसका à¤à¤• तीसरा कारण यह à¤à¥€ है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ किराना दà¥à¤•ान, मंदिर आदि जगहें à¤à¥€ डाउनटाउन से कई शहरों में दूर पड़ती हैं।
पर इन सबके बावजूद अपने à¤à¤¾à¤°à¤¤ जैसी चहल-पहल आपको डाउनटाउन में ही जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिखेगी। अगर कोई à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ यहां पहली बार आया और अपटाउन में रहने को मिल गया उसे तो उसे लगेगा यह किस सà¥à¤¨à¤¸à¤¾à¤¨ शहर में आ गया।
à¤à¤¸à¥‡ में मà¥à¤à¥‡ à¤à¤• बार डाउनटाउन में रहने का मौका मिला। जगह थी, सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤®à¤«à¥‹à¤°à¥à¤¡, कनेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ट। पहली बार मैं किसी नई बहà¥à¤®à¤‚जिला बिलà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग में यहां रह रही थी। नीचे उतरते ही बाजार, चमक-धमक। वॉकिंग-जॉगिंग करते लोग। à¤à¤¸à¥‡ में दिलà¥à¤²à¥€ की याद कि हां, यह जगह कà¥à¤›-कà¥à¤› हमारे à¤à¤¾à¤°à¤¤ सी है। रोज़मरà¥à¤°à¤¾ के जीवन में रौनक है।
हम घूमते-फिरते कई बार मà¥à¤–à¥à¤¯ बाजार के गोलंबर तक पहà¥à¤‚च जाते। यहां शाम को खूब चहल-पहल होती। à¤à¤• छोटा सा पारà¥à¤• और उसको घेरे कई खाने-पीने की दà¥à¤•ानें। खà¥à¤²à¥‡ में फूलों की डाली से सजी कà¥à¤°à¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और उनके ऊपर à¤à¤¿à¤²à¤®à¤¿à¤² रौशनी की छत जिससे आसमान à¤à¤¾à¤‚कता, मà¥à¤à¥‡ यह सब बड़ा सà¥à¤‚दर लगता। मैं वहीं पारà¥à¤• के बीच किसी बेंच पर बैठजाती।
पारà¥à¤• के आस-पास कई छोटी-छोटी दà¥à¤•ानें हैं। इसके ठीक सामने à¤à¤• सिनेमाघर है। कà¥à¤› दà¥à¤•ानों की दूरी पर ही à¤à¤• खूबसूरत पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ालय। उसके बग़ल में बैंक और कोने में à¤à¤• चरà¥à¤šà¥¤ वैसे कनेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ट के छोटे से डाउनटाउन में तीन-चार खूबसूरत छोटे-छोटे चरà¥à¤š हैं।
कनेकà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ट डाऊनटाउन में कà¥à¤›-कà¥à¤› जगहों पर लोहे की पतà¥à¤¤à¤° जैसा बॉकà¥à¤¸ बना हà¥à¤† है। हर कà¥à¤› महीनों में लोकल या इंटरनेशनल आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ यहां अपनी कला का नमूना पेश करते रहते हैं। à¤à¤• शाम यूं ही घूमते हà¥à¤ मà¥à¤à¥‡ कà¥à¤› पेंटिंगà¥à¤¸ दिखीं, बैंक और पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ालय के बीच।
हां, तो उन पेंटिंग को देख कर मैं चहक उठी। 'अरे... यह तो किसी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ की कला लग रही है।' पेंटिंग देख इतना तो मालूम हो गया की मधà¥à¤¬à¤¨à¥€ आरà¥à¤Ÿ है पर कलाकार का नाम नही मालूम था मà¥à¤à¥‡à¥¤ मैं इन पेंटिंग को देख कर बहà¥à¤¤ ख़à¥à¤¶ थी। इनकी तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ लीं और घर आकर गूगल की मदद से ऑरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ का नाम पता करने लगी।
कà¥à¤› देर बाद ली गई तसà¥à¤µà¥€à¤° से मिलती-जà¥à¤²à¤¤à¥€ कà¥à¤› तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ गूगल पर मिलीं तब जाकर मालूम हà¥à¤† कि ये पेंटिंग जैमिनी रॉय की हैं। उस दिन मैंने इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पहली बार जाना।
अपà¥à¤°à¥ˆà¤² में इनका जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ बीता है। आज मà¥à¤à¥‡ यह धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ आया। जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ बीत गया तो कà¥à¤¯à¤¾? कà¥à¤¯à¤¾ कà¤à¥€ किसी कलाकार की कला बीतती है।
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