नवरातà¥à¤°à¤¿ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ हो चà¥à¤•ी है। इसी के साथ माता रानी के आगमन का उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ मन को उलà¥à¤²à¤¾à¤¸ से à¤à¤° रहा है। à¤à¤¸à¥‡ में कोलकाता की दà¥à¤°à¥à¤—ा पूजा और हाल में वहां घटी वीà¤à¤¤à¥à¤¸ घटना से मà¥à¤à¥‡ दो क़िसà¥à¤¸à¥‡ याद आ रहे हैं। दोनों ही क़िसà¥à¤¸à¥‡ लगà¤à¤— à¤à¤• जैसे हैं, बस देश काल अलग रहा है।
à¤à¤• तो गà¥à¤°à¥€à¤• कथा है और दूसरी à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ चंपारण की कहानी है। पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ चंपारण, बिहार का à¤à¤• ज़िला है। गà¥à¤°à¥€à¤• कथा कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार है- मेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ नाम की à¤à¤• लड़की थी। वह बहà¥à¤¤ रूपवान हà¥à¤† करती थी। वह गà¥à¤°à¥€à¤• देवी “à¤à¤¥à¥‡à¤¨à¤¾” के मंदिर में पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¨ थी और वहीं पर रहती थी।
वह इतनी सà¥à¤‚दर थी कि मंदिर में आने वाले कई लोग तो उसे ही देखने आते थे। उसकी सà¥à¤‚दरता का बखान करते ना थकते। उसके बालों को वे à¤à¤¥à¥‡à¤¨à¤¾ देवी के बालों से à¤à¥€ सà¥à¤‚दर कहते। मेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ के रूप की खà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¤¿ पोसाइडन तक à¤à¥€ पहà¥à¤‚च गई जो कि इस कथा के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤¥à¥‡à¤¨à¤¾ देवी का पà¥à¤°à¥‡à¤®à¥€ और समà¥à¤¦à¥à¤° का देवता था।
पोसाइडन ने जब मेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ को देखा तो उस पर मोहित हो गया। मेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ की पोसाइडन में कोई रà¥à¤šà¤¿ नहीं थी। वह कà¥à¤‚वारी रहकर à¤à¤¥à¥‡à¤¨à¤¾ के मंदिर की पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¨ बनी रहना चाहती थी। à¤à¤• दिन पोसाइडन शाम को मौका पाकर मेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ की तरफ़ बढ़ा। à¤à¤¸à¥‡ में बचने के लिठमेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ मंदिर में à¤à¤¾à¤—ी। उसने मदद के लिठà¤à¤¥à¥‡à¤¨à¤¾ देवी से गà¥à¤¹à¤¾à¤° लगाई। लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
बलातà¥à¤•ार के बाद जब पोसाइडन जा चà¥à¤•ा था, तब देवी à¤à¤¥à¥‡à¤¨à¤¾ वहां आईं। मंदिर में दà¥à¤·à¥à¤•रà¥à¤® की सजा के रूप में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बिना पूरी बात जाने ही मेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ को ही शाप दे दिया कि वह आजीवन अकेली रहेगी। उसके जिस सà¥à¤‚दर बालों पर लोग रीà¤à¤¤à¥‡ हैं, वह à¤à¥€ सांप बन जायेंगे। इसके बाद जैसे ही देवी को पूरी बात पता चली और अपनी गलती का अहसास हà¥à¤† तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मेडà¥à¤¯à¥à¤¸à¤¾ को यह वरदान à¤à¥€ दिया कि जो à¤à¥€ उसकी आंखों में ग़लत दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से देखेगा, वह पतà¥à¤¥à¤° का हो जायेगा।
अब पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ चंपारण का क़िसà¥à¤¸à¥‡ à¤à¥€ जान लीजिà¤à¥¤ इस ज़िले के सहोदरा नामक जगह पर à¤à¤• ग़रीब लड़की रहती थी। वह बहà¥à¤¤ सà¥à¤‚दर थी। गांव में उसकी सà¥à¤‚दरता के क़िसà¥à¤¸à¥‡ चरà¥à¤šà¤¿à¤¤ थे। à¤à¤• दिन वह बकरी चराने निकली तो गांव की सीमा के पार कà¥à¤› लड़कों ने उसे घेर लिया।
लड़की ने उन लोगों से काफ़ी विनती की लेकिन वो मानने को तैयार ना थे। à¤à¤¸à¥‡ में लड़की ने मां दà¥à¤°à¥à¤—ा से पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ की कि हे मां मेरी रकà¥à¤·à¤¾ करें। मां दà¥à¤°à¥à¤—ा ने उसकी रकà¥à¤·à¤¾ सà¥à¤µà¤°à¥‚प उसे उसी कà¥à¤·à¤£ पतà¥à¤¥à¤° का बना दिया और पूजित होने का वरदान दिया। तब से आज तक उस लड़की की पूजा माता सहोदरा के रूप में होती है। इस मंदिर की ख़ास बात यह है कि यहां पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¨ à¤à¥€ महिलाà¤à¤‚ ही होती हैं। यहां के à¤à¤• ख़ास समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ “थार॔ की ही महिलाà¤à¤‚ ही पà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¿à¤¨ चà¥à¤¨à¥€ जाती हैं।
इन दोनों क़िसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ को याद करके मैं सोचती हूं कि देवी ने पीड़िता को ही सजा कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ दी? कà¥à¤¯à¤¾ देवी मां उस समय महिषासà¥à¤° जैसा नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ नहीं कर सकती थीं? कई सवालों के जबाब सà¥à¤²à¤à¥‡-अनसà¥à¤²à¤à¥‡ यूं ही à¤à¤Ÿà¤•ते रहते हैं। फिर à¤à¥€ अगर आप बिहार जाà¤à¤‚ और चंपारण जाने का मौक़ा मिले तो सहोदरा माई के दरà¥à¤¶à¤¨ ज़रूर करके आà¤à¤‚।
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