तपसà¥à¤¯à¤¾ चौबे
मेरा नाम तपसà¥à¤¯à¤¾ चौबे है। मैं यहां फà¥à¤²à¥‹à¤°à¤¿à¤¡à¤¾ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ में रहती हूं। अमेरिका के कई सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ में रहने का अवसर मिला लेकिन इस सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ में आ कर लगा जैसे à¤à¤¾à¤°à¤¤ के किसी राजà¥à¤¯ में आ गà¤à¥¤ समय के साथ आप अपनी मिटà¥à¤Ÿà¥€ से जितना दूर होते हैं, जड़े उतनी ही गहरी धंसती जाती हैं। सपनों की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में रहने वालों की मेहनतकश जिंदगी के साथ यहां कई क़िसà¥à¤¸à¥‡-कहानियां चलती रहती हैं। à¤à¤• संसà¥à¤®à¤°à¤£ यहां लिख रही हूं, उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है आप सबका पà¥à¤¯à¤¾à¤° मिलेगा।
वह, फà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¾ कालो के देश से थी। बालों में गà¥à¤¥à¥‡ रंग-बिरंगे रिबन देख कर à¤à¤• बार को लगा जैसे वह सामने पड़ी कलर पैलेट के रंगों को ख़à¥à¤¦ पर फेर रही हो… हमने à¤à¤• दूसरे को देखा अà¤à¤¿à¤µà¤¾à¤¦à¤¨ सà¥à¤µà¤°à¥‚प मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤à¥¤ आगे बढ़ने से पहले उसकी नज़र मेरी पावों पर थी और मेरी उसकी पेंटिंग पर। हम कà¥à¤› कहते कि इससे पहले आरती की धà¥à¤¨ मेरी कानों में पड़ी और मैं तेज कदमों से मंदिर की सीढ़ियां चढ़ने लगी…।
सावन का पहला सोमवार था। मंदिर में सोमवार की वजह से à¤à¥€à¤¡à¤¼ थी। à¤à¤•दम अंतिम पंकà¥à¤¤à¤¿ में खड़े होने की जगह मिली। à¤à¥‹à¤²à¥‡ बाबा फूल- बेलपतà¥à¤°, चंदन-à¤à¤à¥‚त से सजे-धजे आज कà¥à¤› अलग लग रहे थे। मेरा मन हो आया, “ओह! काश आज मां यहां होतीं” निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ ही à¤à¤¾à¤µ विà¤à¥€à¤° हो जातीं।
मंदिर की परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ करते हà¥à¤ हमने देखा, बादल घिर आठथें। यहां रोज़ दिन के तीसरे पहर से बारिश शà¥à¤°à¥‚ होती है। काली घटा बरस कर साफ़ दमकती हà¥à¤ˆ वापस छा जाती है। मानो जैसे नाना पà¥à¤°à¤•ार के उबटन लगा कर खूब नहाई हो। खिली-खिली, चमकती-दमकती सारे आमसान में छा गई हो। मन इन घटाओं को निहारते नहीं थकता…।
हम जलà¥à¤¦à¥€ सीढ़ियों से नीचे उतर रहे थे। आशंका थी कि बरखा रानी पारà¥à¤•िंग तक पहà¥à¤‚चते-पहà¥à¤‚चते बरस ना जाठकि किसी ने हेलो कहा। वह मंदिर की अंतिम सीढ़ी पर बैठी मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾ रही थी। हेलो, कह कर मैं आगे बढ़ने ही वाली थी कि उसने फिर टोका- आपके पैर, उसपर लगे रंग और आपके पायल की संगीत ने मà¥à¤à¥‡ यहां रोक कर रखा है। मैं à¤à¥‡à¤‚प गई। à¤à¤• लड़की इतने पà¥à¤°à¥‡à¤® से दूसरी लड़की की तारीफ़ करे, à¤à¥‡à¤‚प तो होगी ही। अगर किसी लड़के ने इसी लहज़े में यह बात की होती तो मेरे पैरों का रंग मेरे मà¥à¤– पर चढ़ आता।
मैंने मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾ कर धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ कहा। मंदिर की बनाई उसकी पेंटिंग को देखने की इचà¥à¤›à¤¾ ज़ाहिर की। इसी बीच मालूम हà¥à¤† कि वह आरà¥à¤Ÿ सà¥à¤Ÿà¥‚डेंट है। किसी पà¥à¤°à¥‰à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ के तहत इस मंदिर को चà¥à¤¨à¤¾ है उसने। साथ ही वह फà¥à¤°à¥€à¤¦à¤¾ को अपना आदरà¥à¤¶ मानती है और उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ के देश, मैकà¥à¤¸à¤¿à¤•ो से है। पेंटिंग उसने सच में सà¥à¤‚दर बनाई थी।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मंदिर की पेंटिंग में बड़ा डिटेलिंग होता है। उसने मंदिर के किनारे पर बने à¤à¤•-à¤à¤• फूल, मोर, गाय आदि चीज़ों को बड़े धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ और संयम से उकेरा था। ख़ैर इसी बीच बूंदा-बांदी शà¥à¤°à¥‚ हो गई। साथी पहले ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को लेकर पारà¥à¤•िंग की तरफ़ जा चà¥à¤•े थे। अंधेरा à¤à¥€ घिर आया था। मैंने चलने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ मांगी कि उसने फिर टोका- काश बारिश ना होती, रात ना घिरती, कà¥à¤› वकà¥à¤¤ आप रà¥à¤• पाती तो आपके पैरों को उकेरती इन सीढ़ियों से उतरते।
मैं हंस पड़ी। कोई पà¥à¤°à¥à¤· होता तो वह सवाल कर बैठता मेरी हंसी पर। लेकिन वह नारी थी। सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ मन को समà¤à¤¨à¤¾ जानती थी शायद इसलिठउसने कà¥à¤› पूछा नहीं। मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾ कर कहा, ऑरà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ और उसके खà¥à¤µà¤¾à¤¬à¥¤ मैंने कहा- आप à¤à¤• काम करें, तसà¥à¤µà¥€à¤° ले लें। वापस जाकर मन में फिर à¤à¥€ इचà¥à¤›à¤¾ हà¥à¤ˆ कि इन पैरों की तसà¥à¤µà¥€à¤° बनानी है तो देख कर बना सकती हैं। वैसे इनमें कà¥à¤› अलग या ख़ास नहीं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में महिलाओं का इस तरह पैरों पर रंग लगाना, गहने-ज़ेवर पहना आम है। ख़ास कर तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ पर तो और। यह à¤à¤• आम à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ महिला के पैर हैं और आपकी सà¥à¤‚दर कलातà¥à¤®à¤• दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¥¤ वह खà¥à¤¶ हो गई। उसने à¤à¤•-दो तसà¥à¤µà¥€à¤°à¥‡à¤‚ ली और विदा के साथ मैं चल पड़ी, ख़ाली पैर अपनी यातà¥à¤°à¤¾ पर…...
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