जैसा कि मैंने पिछले यातà¥à¤°à¤¾ वृतà¥à¤¤à¤¾à¤‚त में बताया था कि हम लोगों ने रैपिड सिटी के लिठफà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿ ली थी। रैपिड सिटी à¤à¤• ठीक-ठाक शहर है यहां का। à¤à¤¯à¤°à¤ªà¥‹à¤°à¥à¤Ÿ से कà¥à¤› 15-20 मिनट की दूरी पर हमने होटल ली थी।
हमारे होटल के पास वेज खाने में ऑपà¥à¤¶à¤‚स के नाम पर कà¥à¤¡à¥‹à¤¬à¤¾, पीतà¥à¤œà¤¾ और à¤à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट था, जो कि बंद हो गया था। हमने कà¥à¤¡à¥‹à¤¬à¤¾ में खाना खाया और अगले दिन के इंतजार में जलà¥à¤¦à¥€ सो गà¤à¥¤
यहां दिन बहà¥à¤¤ लमà¥à¤¬à¥‡ होते है। सà¥à¤¬à¤¹ पांच बजे ही इतना सवेरा कि जैसे चांद को कहीं काम पार जाने की जलà¥à¤¦à¥€ हो। सà¥à¤¬à¤¹ तो जलà¥à¤¦à¥€ होती ही है, रात à¤à¥€ बड़ी देर से। रात को 8:45- 9 बजे के आस पास सूरज ढलता। इस हिसाब से घूमने को खूब वकà¥à¤¤ मिला।
अगले दिन सà¥à¤¬à¤¹ सात बजे ही हम 'माउंट रशà¥à¤®à¥‹à¤° नेशनल मेमोरियल' के लिठनिकल पड़े। यह होटल के बहà¥à¤¤ पास था। हमारे पास नेशनल पारà¥à¤• का इयरली कारà¥à¤¡ है तो पारà¥à¤• का टिकट नहीं लगा पर पारà¥à¤•िंग 10 डॉलर देना पड़ा। पारà¥à¤• का चारà¥à¤œ 25 डॉलर à¤à¤• सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक के लिठहै।
बà¥à¤²à¥ˆà¤• हिलà¥à¤¸ माउंटेन के हिसà¥à¤¸à¥‡ पर ऊंची चटà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨ के ऊपर अमेरिका के चार राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ की आकृति उकेरी गई है। इस पहाड़ी के चारों तरफ टà¥à¤°à¥‡à¤² बने है। सामने की तरफ हर राजà¥à¤¯ का à¤à¤‚डा और राजà¥à¤¯ कब बना इसकी जानकारी लिखी हà¥à¤ˆ है। शाम को यहां लाइट शो à¤à¥€ होता
है पर हम आगे बढ़ चà¥à¤•े थे।
अगला पड़ाव 'कसà¥à¤Ÿà¤° सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ पारà¥à¤•' था। इस पारà¥à¤• की इंटà¥à¤°à¥€ फी 20 डॉलर है। पूरे पारà¥à¤• में आप चाहें तो पूरा दिन बिता सकते हैं या फिर विजिटर सेंटर से महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ जगहों की à¤à¤• सूची ले लें। हमें कà¥à¤¯à¤¾à¤‚क या कोई और वॉटर à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ करनी नहीं थी तो हम टà¥à¤°à¥ˆà¤• करते रहे, सà¥à¤‚दर नजारों, जानवरों, बाइसन के à¤à¥à¤‚ड देखते रहे।
इस पारà¥à¤• में à¤à¤• निडिल हाईवे à¤à¥€ है जो नà¥à¤•ीले पहाड़ों के बीच से जाता है। इसके बीच à¤à¤• टनल है जो आकरà¥à¤·à¤£ का केंदà¥à¤° है। इसे पार करने के लिठआपको दो-दो गाड़ियों को पास देना फिर आगे बढ़ना है। टनल से निकलते वकà¥à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ बहà¥à¤¤ खà¥à¤¶ होते हैं। अचरज से à¤à¤° उठते हैं।
आगे हमें लीजन लेक टà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¹à¥‡à¤¡ मिला जहां पांच लेक छोटे-बड़े पहाड़ों से घिरी हैं। इसके बाद हम 'बà¥à¤²à¥ˆà¤• इलà¥à¤• पीक' गठजो साउथ डकोटा का सबसे ऊंचाई वाला ठिकाना है। गाड़ी से इसकी चढ़ाई थोड़ा मà¥à¤à¥‡ डरा रही थी। रोड के नाम पर समतल किठकंकड़ और दूसरी तरफ गहरी खाई। à¤à¤• बार को तो मैंने कहा- न हो तो वापस चल लें पर गाड़ी मोड़ने की जगह ही कहां थी।
वैसे इसकी इंटà¥à¤°à¥€ पर ही लिखा है- à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¥€à¤°à¤¿à¤à¤‚स डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¤° ऑनली। ऊपर टॉप पर पहà¥à¤‚च कर à¤à¤• वà¥à¤¯à¥‚ पॉइंट है जहां, पहाड़ों के रंग-रूप और निखरे से नजर आते हैं।
इसके बाद हम 'बैडलैंड' पहà¥à¤‚चते हैं सनसेट देखने। कल वापस फिर आना है बैडलैंड। सूरà¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤¯ देखने और पूरा दिन बिताने।
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें...
दिन के खाने के लिठहम कसà¥à¤Ÿà¤° सिटी में वापस आठथे। वहां पीतà¥à¤œà¤¾ मिला हमें। इसके बाद हम वाइलà¥à¤¡à¤²à¤¾à¤‡à¤« वà¥à¤¯à¥‚वे गठजहां बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ ने खूब इंजॉय किया। आगे, 'बैजन होल हिसà¥à¤Ÿà¥‰à¤°à¤¿à¤• साइट' है। यहां कवि बेजरकà¥à¤²à¤¾à¤°à¥à¤• का केबिन है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login