वà¥à¤®à¤¨ इन द डà¥à¤¯à¥‚न, à¤à¤• जापानी फ़िलà¥à¤® है। इसकी बेहतरीन सिनेमेटोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤¼à¥€, बैकगà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤‚ड सà¥à¤•ोर और पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ का अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ आपको रोमांच से à¤à¤°à¤¤à¥‡ रहते हैं।
बेहतरीन सिनेमा, सिनेमेटोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤¼à¥€, कà¥à¤²à¥‹à¤œà¤¼ अप शॉट, पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ का चयन आदि में कमाल के रहे आंदà¥à¤°à¥‡à¤ˆ टारकोवसà¥à¤•ी, इंगमार बरà¥à¤—मान, सतà¥à¤¯à¤œà¥€à¤¤ रे, वॉन कर वाई के बाद इस फ़िलà¥à¤® के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• “हिरोसी टेसीगहारा” ने मेरा मन मोह लिया। इस फ़िलà¥à¤® की à¤à¤¡à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤‚ग à¤à¥€ कमाल की है। किसी à¤à¥€ दृशà¥à¤¯ को ज़रूरत से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खींचा नहीं गया है... चाहे डà¥à¤°à¤®à¥‡à¤Ÿà¤¿à¤• हो या लव मेकिंग।
फ़िलà¥à¤® की कहानी à¤à¤• शिकà¥à¤·à¤• की है जिसे बालू में पाये जाने वाले कीड़ों में रà¥à¤šà¤¿ है। वह उन पर शोध कर रहा है। वहीं इसकी दूसरी पातà¥à¤° à¤à¤• महिला है जो सैंड डà¥à¤¯à¥‚न (रेत की टीले) में रहती है। ‘सैंड डà¥à¤¯à¥‚न’ बालू का टीला जो आम तौर पर समà¥à¤¦à¥à¤° के किनारे बहती हवाओं से बनता है या रेगिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ में हवाओं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾à¥¤
महिला अपने जीवन यापन के लिठबालू काट कर इस डà¥à¤¯à¥‚न से थोड़ी दूर बसे गांव के लोगों को देती है। जिसके बदले में गांव के लोग उसे कà¥à¤› वकà¥à¤¤ का राशन-पानी देते हैं और इस तरह से उसका जीवन बसर होता रहता है। इस महिला का पति और बचà¥à¤šà¥€ इसी बालू में दब कर मर गठथे लिहाजा अब वह अकेली है। बालू से घिरे घर में। à¤à¤¸à¥‡ में कीड़ों की खोज में अपनी अंतिम बस को मिस कर देने वाले शिकà¥à¤·à¤• को गांव वाले रात को उस महिला के यहां ठहरने का आसरा देते हैं। गांव वाले जानते हैं कि वह महिला बहà¥à¤¤ दिनों तक अकेले बालू से ढंके कà¥à¤à¤‚नà¥à¤®à¤¾ घर में नहीं रह सकती। फिर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बालू à¤à¥€ तो चाहिठथा।
शिकà¥à¤·à¤• बेचारा फंस चà¥à¤•ा है à¤à¤• जाल में। à¤à¤•ांत के जाल में… वह à¤à¤¾à¤—ने की कोशिश करता है पर इस रेगिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ से निकल नहीं पाता। निराश होकर वह उस महिला से कहता है कि मैं फेल इसलिठहà¥à¤† कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि मà¥à¤à¥‡ à¤à¥‚गोल का जà¥à¤žà¤¾à¤¨ नहीं। पर मैं à¤à¤• दिन ज़रूर सफल होऊंगा।
शिकà¥à¤·à¤• है, उसे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ है कि वह कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ असफल हà¥à¤†à¥¤ साथ ही वह कई तरीक़ों से महिला को à¤à¥€ समà¤à¤¾à¤¨à¥‡ की कोशिश करता है कि यह जीवन à¤à¥€ कà¥à¤¯à¤¾ कोई जीवन है ? उसे इससे निकलना चाहिà¤à¥¤
इधर महिला जानती है कि उसका जीवन यही है। उसे शिकà¥à¤·à¤• से पà¥à¤°à¥‡à¤® नहीं फिर à¤à¥€ शरीर को शरीर की ज़रूरत है। शिकà¥à¤·à¤• à¤à¥€ à¤à¤¾à¤—ने की तिड़कम के बीच पà¥à¤°à¥‡à¤® का सà¥à¤µà¤¾à¤‚ग कर लेता है। महीनों à¤à¤¾à¤—ने की जà¥à¤—त लगाते -लगाते उसने मरू से पानी निकालने का तरीक़ा ढूंढ़ लिया। वह यह ख़बर महिला को दे इससे पहले दरà¥à¤¦ में तड़प रही महिला दिखती है। वह पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤Ÿ होती है पर उसकी पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤¸à¥€ आसान नहीं।
'à¤à¤•à¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¿à¤• पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी' के लकà¥à¤·à¤£ है। इस तरह की पà¥à¤°à¥‡à¤—à¥à¤¨à¥‡à¤‚सी में à¤à¤— गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ से नहीं जà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¤¾ बलà¥à¤•ि वह फैलोपियन टà¥à¤¯à¥‚ब, à¤à¤¬à¥à¤¡à¥‹à¤®à¤¿à¤¨à¤² कैविटी या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ से जाकर जà¥à¤¡à¤¼ जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में गांव वाले उसे उपचार के लिठले जाते हैं और रह जाता है अकेला शिकà¥à¤·à¤• उस बालू के गढ़ वाले घर में। उसके पास अवसर होता है à¤à¤¾à¤—ने का पर वह à¤à¤• शिकà¥à¤·à¤• है। उसे इंतजार होता है गांव वालों के लौटने का। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पीने का पानी निकालने का तरीक़ा बताने का। और इस तरह से फ़िलà¥à¤® ख़तà¥à¤® होती है।
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