यà¥à¤¤à¥‹à¤°à¥€ (yutori) à¤à¤• जापानी अवधारणा है। इसका करीब-करीब अरà¥à¤¥ है कà¥à¤› कà¥à¤·à¤£ के लिठही आराम या सà¥à¤•à¥à¤¨ की सांस लेना। कà¥à¤› कà¥à¤·à¤£ के लिठही सब कà¥à¤› à¤à¥‚ल कर अपनी मानसिक शांति को महसूस करना। वैसे तो यह शबà¥à¤¦ हर किसी के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है फिर à¤à¥€ महिलाओं के लिये यह खास हो जाती है।
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ चाहे जितना à¤à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को महान बना दे पर बहà¥à¤¤ कम ही महिलाà¤à¤‚ यà¥à¤¤à¥‹à¤°à¥€ को महसूस कर पाती हैं। बीते दिनों 'मदरà¥à¤¸ डे' बीता। माताओं की खूब तारीफ हà¥à¤ˆà¥¤ खूब तोहफे दिठगà¤à¥¤ पर à¤à¤• मां के रोज़मरà¥à¤°à¤¾ के जीवन को समà¤à¤¨à¤¾ इतना आसान कहां?
कोविड के समय जो वरà¥à¤• फà¥à¤°à¥‰à¤® होम शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤† उसने कà¥à¤› हद तक माताओं का जीवन थोड़ा आसान कर दिया था। अब अमेरिका में अमूमन हर ऑफिस ने तीन दिन ऑफिस जाना जरूरी कर दिया है। à¤à¤¸à¥‡ में सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ दिकà¥à¤•त यहां की कामकाजी महिलाओं को हो रही है। à¤à¤• तो मà¥à¤¶à¥à¤•िल से यहां वीजा लगता है, उसपर मन माफिक़ जॉब मिलना और à¤à¥€ मà¥à¤¶à¥à¤•िल है। à¤à¤¸à¥‡ में जॉब छोड़ना कई बार दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ में डाल जाता है।
हम सोचतीं है कि कैसे à¤à¥€ मैनेज कर लेंगी। यहीं हम गलती कर बैठती हैं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ होता तो फिर à¤à¥€ कोई परिवार का वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ या परिवार जैसा पड़ोसी थोड़ी देर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को देख लेता।
हाउस हेलà¥à¤ª आती और घर के काम में हाथ बटा देती। पर यहां पर तो डे केयर या आफà¥à¤Ÿà¤° सà¥à¤•ूल के सहारे ही माताà¤à¤‚ करियर और गिलà¥à¤Ÿ के बीच जूठरही हैं। à¤à¤¸à¥‡ में चैन की सांस की कà¥à¤¯à¤¾ उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करे कोई...
अचà¥à¤›à¤¾, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में रहने वाले लोग कहते हैं कि वहां सारा काम तो मशीन करती है। खाना à¤à¥€ तà¥à¤® दो दिन का बासी खा लेते हो फिर दिक़à¥à¤•त कà¥à¤¯à¤¾ है?
दिकà¥à¤•त कà¥à¤› नहीं पर यह समà¤à¤¨à¥‡ में दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को इतनी दिकà¥à¤•त कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है कि मशीन खà¥à¤¦ नहीं चलती। उसे चलाने से पहले कई जतन करने होते है। बासी ही सही पर ख़ाना तो पकाना ही होता है।
फिर यह बात à¤à¤¾à¤°à¤¤ और अमेरिका की नहीं, यह बात à¤à¤• मां की है। उसके मानसिक सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ की है। वैसे यह दिकà¥à¤•त तो अब à¤à¤¾à¤°à¤¤ के महानगरों में à¤à¥€ होने लगी है।
हम महिलाà¤à¤‚ परिवार और करियर के बीच à¤à¤¸à¥‡ चल रही हैं जैसे रेलगाड़ी के टà¥à¤°à¥ˆà¤•। हम सकà¥à¤¸à¥‡à¤¸à¤«à¥à¤²à¥€ अपने गंतवà¥à¤¯ तक तो धीरे-धीरे पहà¥à¤‚च रहें हैं पर यह रासà¥à¤¤à¤¾ कई बार बड़ा पीड़ादायक हो जाता है।
à¤à¤¸à¥‡ में दिन के किसी à¤à¥€ पल, कà¥à¤› देर को ही सही जापानी शबà¥à¤¦ 'यà¥à¤¤à¥‹à¤°à¥€' की हम पर मेहरबानी होती रहे तो हम खिलते रहें।
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