मेरा जनà¥à¤® और पालन-पोषण à¤à¤¾à¤°à¤¤ में हà¥à¤†, हमेशा बाहर, हमेशा खोजबीन करते हà¥à¤à¥¤ खेलने के लिठकोई à¤à¥€ दिन बहà¥à¤¤ गरà¥à¤® नहीं होता था। चंडीगढ़ में पले-बढ़े होने के कारण, मैं अपनी बाइक से कहीं à¤à¥€ जाने के लिठसà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° था, अपनी जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ का अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करते हà¥à¤ जहां à¤à¥€ ले जाऊं.
वहीं मेरी फैमिली के साथ छà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ हमेशा रोड टà¥à¤°à¤¿à¤ª होती थीं। हम अपनी छोटी मारà¥à¤¤à¤¿ 800 में à¤à¤°à¤•र जाते थे। मेरे माता-पिता, मेरे à¤à¤¾à¤ˆ-बहन, हमारा कà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¾ और यहां तक कि हमारी नौकरानी à¤à¥€ हमारे साथ रोड टà¥à¤°à¤¿à¤ª पर जाती थी और हम सà¤à¥€ रोड टà¥à¤°à¤¿à¤ª के जरिठपूरा देश घूमते थे।
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