पेरिस ओलंपिक में हॉकी के दूसरे सेमीफाइनल में à¤à¤¾à¤°à¤¤ को विशà¥à¤µ चैंपियन जरà¥à¤®à¤¨à¥€ के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। 44 साल के बाद à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ ओलंपिक हॉकी के फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहा। अब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टीम तोकà¥à¤¯à¥‹ में जीते कांसà¥à¤¯ पदक का बचाव करने के लिठगà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° को सà¥à¤ªà¥‡à¤¨ के खिलाफ मैदान में उतरेगी।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने पहले कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° फाइनल में गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ को 3-2 से हराया था लेकिन सेमीफाइनल में जरà¥à¤®à¤¨à¥€ के खिलाफ अपने à¤à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤®à¤‚द डीप डिफेंडर और डà¥à¤°à¥ˆà¤—-फà¥à¤²à¤¿à¤•र अमित रोहिदास की गैरमौजूदगी का नà¥à¤•सान à¤à¥‡à¤²à¤¨à¤¾ पड़ा। 43 मिनट तक 10 खिलाड़ियों के साथ à¤à¤• दà¥à¤°à¥à¤œà¥‡à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¥à¤µà¤‚दà¥à¤µà¥€ के खिलाफ खेलने, बचाव करने और जीतने की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ काफी मनमोहक थी।
लेकिन à¤à¤¸à¥‡ कारनामों को दोहराना आसान नहीं है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ और जरà¥à¤®à¤¨à¥€ के बीच दूसरे सेमीफाइनल से यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ à¤à¥€ हो गया। à¤à¤¾à¤°à¤¤ को मौके à¤à¥€ अधिक मिले। à¤à¤¾à¤°à¤¤ को 11 पेनलà¥à¤Ÿà¥€ कॉरà¥à¤¨à¤° मिले जबकि जरà¥à¤®à¤¨à¥€ को सिरà¥à¤« चार। मैदान पर à¤à¥€ उसकी अचà¥à¤›à¥€ पकड़ थी। हालांकि इस सबका फायदा नहीं हà¥à¤† और à¤à¤¾à¤°à¤¤ कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° फाइनल में मिली जीत को दोहराने में नाकाम रहा।
पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¸à¥à¤ªà¤°à¥à¤§à¥€ खेलों में बचाव के बजाय हमले को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बेहतर माना जाता है। जरà¥à¤®à¤¨à¥‹à¤‚ को हॉकी के सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ रणनीतिकारों में से à¤à¤• माना जाता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने गेम पà¥à¤²à¤¾à¤¨ को समà¤à¤¾ और आखिरी सीटी बजने से छह मिनट पहले मैच को निरà¥à¤£à¤¾à¤¯à¤• मोड़ तक ले जाने में कामयाब रहे। उसके बाद मैच पर अपनी पकड़ बनाठरखी। वहीं à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने कई मौके गंवाà¤à¥¤ फिर बी यह à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ तरह से लड़ा गया मैच कहा जा सकता है।
अमित रोहिदास की अनà¥à¤ªà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¤¾à¤°à¤¤ जरà¥à¤®à¤¨à¥€ की विशिषà¥à¤Ÿ खेल रणनीति का सामना नहीं कर पाया जिसने गोंजालो पेइलाट का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करके पेनलà¥à¤Ÿà¥€ कारà¥à¤¨à¤° हासिल किà¤à¥¤ गोंजालो ने चार अवसरों को गोल में बदलकर बाजी पलट दी।
अब गà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° को कांसà¥à¤¯ पदक के लिठसà¥à¤ªà¥‡à¤¨ के साथ मà¥à¤•ाबले से पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टीम पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन को अचà¥à¤›à¥€ रणनीति बनानी होगी। उसके पास अपने विरोधियों के अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¿à¤¤ गेम पà¥à¤²à¤¾à¤¨ का मà¥à¤•ाबला करने की योजना होनी चाहिà¤à¥¤ उसे मैन-टू-मैन और ज़ोन मारà¥à¤•िंग के साथ पूरा टीमवरà¥à¤• करने की जरूरत है। आकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• हॉकी के लिठमशहूर टीम के खिलाफ खेलते हà¥à¤ सà¥à¤•ोरिंग के अवसरों का सदà¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— करना और विरोधियों को विफल करना काफी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होगा।
टीम इंडिया अगर कांसà¥à¤¯ पदक जीतने में कामयाब रहती है तो यह उसके लिठबड़ी सांतà¥à¤µà¤¨à¤¾ होगी। अब तक के मैचों में उसने सराहनीय पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया है। अमित रोहिदास पà¥à¤°à¤•रण और थोड़ी की किसà¥à¤®à¤¤ के फेर ने उसे इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पहà¥à¤‚चाया है। अब पिछली गलतियों से सबक लेकर और बेहतर खेल दिखाकर वह अपने पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ रà¥à¤¤à¤¬à¥‡ को कायम रख सकता है।
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