दीवाली के बाद à¤à¤¾à¤°à¤¤ का दूसरा सबसे बड़ा तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° वैशाखी कà¥à¤¯à¤¾ कनाडा में होने वाले संघीय चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के करीब 50 पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की किसà¥à¤®à¤¤ का सितारा बà¥à¤²à¤‚द करेगा? इन चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का समय इसलिठà¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ खासकर पंजाबी समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ इस वकà¥à¤¤ वैशाखी के जशà¥à¤¨ में डूबा है। पंजाबी में इसे खालसा सृजन दिवस à¤à¥€ कहा जाता है।
1699 में इसी दिन सिखों के दसवें गà¥à¤°à¥ शà¥à¤°à¥€ गà¥à¤°à¥ गोबिंद सिंह जी ने पंजाब के à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• नगर आनंदपà¥à¤° साहिब में खालसा पंथ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की थी। गà¥à¤°à¥ नानक देव जी के जनà¥à¤® के लगà¤à¤— 230 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ बाद गà¥à¤°à¥ गोबिंद सिंह ने सिखों को संत-सिपाही की पहचान दी थी और खालसा पंथ की नींव रखी थी।
खालसा की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की सालगिरह के अलावा वैशाखी को पारंपरिक रूप से उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ में गेहूं की फसल की कटाई के मौसम की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से जोड़ा जाता है। यह उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ के किसानों की सामाजिक और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤—ति का à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। कई à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ में यह नववरà¥à¤· की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ का à¤à¥€ समय होता है।
वैशाखी का मà¥à¤–à¥à¤¯ धारà¥à¤®à¤¿à¤• आयोजन तख़à¥à¤¤ शà¥à¤°à¥€ केसगढ़ साहिब (शà¥à¤°à¥€ आनंदपà¥à¤° साहिब), सà¥à¤µà¤°à¥à¤£ मंदिर (अमृतसर) और तख़à¥à¤¤ शà¥à¤°à¥€ दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) में होता है। सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के सदसà¥à¤¯ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤° में गà¥à¤°à¥à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ में विशेष सà¤à¤¾à¤“ं के माधà¥à¤¯à¤® से ही नहीं बलà¥à¤•ि सामाजिक, राजनीतिक, कला, संसà¥à¤•ृति, खेल à¤à¤µà¤‚ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤—ति को पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ करके हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक जशà¥à¤¨ मनाते हैं।
विदेशों में बसे पंजाबी समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के लिठवैशाखी à¤à¤• सांसà¥à¤•ृतिक उतà¥à¤¸à¤µ बन चà¥à¤•ा है। हाल ही में उतà¥à¤¤à¤°à¥€ अमेरिकी के कà¥à¤› शहरों में छोटे विमानों से पà¥à¤·à¥à¤ª वरà¥à¤·à¤¾ की परंपरा à¤à¥€ शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ˆ है।
इस साल कनाडा में वैशाखी का महतà¥à¤µ इसलिठà¤à¥€ अधिक है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि संसदीय चà¥à¤¨à¤¾à¤µ इसी महीने के अंतिम सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में होने हैं। 2025 के संघीय चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में हिसà¥à¤¸à¤¾ ले रहे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¤µà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ में 60 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक सिख हैं।
सिख कनाडा में उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ राजनीतिक अलà¥à¤ªà¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤• हैं इसलिठकनाडा के पà¥à¤°à¤¾à¤‚तीय और संघीय दोनों सà¥à¤¤à¤°à¥‹à¤‚ के राजनीतिक दलों के नेता टोरंटो, वैंकूवर, सरे, कैलगरी, à¤à¤¡à¤®à¤‚टन और बà¥à¤°à¥ˆà¤®à¥à¤ªà¤Ÿà¤¨ में होने वाले नगर कीरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ या सà¤à¤¾à¤“ं में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ दरà¥à¤œ कराते हैं। मतदान से à¤à¤• दिन पहले गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤° टोरंटो à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में सिखों का विशाल नगर कीरà¥à¤¤à¤¨ निकलेगा।
यूके, कनाडा, ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ और नà¥à¤¯à¥‚जीलैंड जैसे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‚ ने न केवल सिख उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ को मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दी है बलà¥à¤•ि कई देशों ने वैशाखी पर सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• अवकाश à¤à¥€ घोषित किया है। 2015 में मलेशिया सरकार ने वैशाखी पर अवकाश की घोषणा की थी। 1999 में खालसा के 300 वरà¥à¤· पूरे होने पर कनाडा ने सà¥à¤®à¤¾à¤°à¤• डाक टिकट जारी किया था।
अब वैशाखी उतà¥à¤¸à¤µ कनाडाई संसद सहित कॉमनवेलà¥à¤¥ देशों की विधानसà¤à¤¾à¤“ं में à¤à¥€ मनाया जाता है। अमेरिका में नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤•, सैन फà¥à¤°à¤¾à¤‚सिसà¥à¤•ो, लॉस à¤à¤‚जेलिस आदि में सिख परेड हर साल निकाली जाती है। इंगà¥à¤²à¥ˆà¤‚ड में लंदन के अलावा बरà¥à¤®à¤¿à¤‚घम में à¤à¥€ यह उतà¥à¤¸à¤µ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– रूप से मनाया जाता है।
कनाडा में सिखों को अपनी पहचान बनाने के लिठकड़ा संघरà¥à¤· करना पड़ा है। 1907 में बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कोलंबिया में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ से मतदान का अधिकार तक छीन लिया गया था। 40 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के संघरà¥à¤· के बाद 1947 में मतदान का अधिकार वापस मिला।
1950 में जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥€ निरंजन सिंह गà¥à¤°à¥‡à¤µà¤¾à¤² बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ कोलंबिया के मिशन शहर की सिटी काउंसिल में चà¥à¤¨à¥‡ जाने वाले पहले सिख बने। गà¥à¤°à¤¬à¤•à¥à¤¶ सिंह माली कनाडा की हाउस ऑफ कॉमनà¥à¤¸ में पहले पगड़ीधारी सिख सांसद बने।
कनाडा में पहला नगर कीरà¥à¤¤à¤¨ 19 जनवरी 1908 को वैंकूवर की सेकंड à¤à¤µà¥‡à¤¨à¥à¤¯à¥‚ पर निकाला गया था। 28 अगसà¥à¤¤ 1912 को हरदयाल सिंह अटवाल कनाडा में जनà¥à¤®à¥‡ पहले सिख थे। 1978 से कनाडा में बड़े सà¥à¤¤à¤° पर नगर कीरà¥à¤¤à¤¨ होने लगे। तब गà¥à¤°à¥ अमर दास जी की 500वीं जयंती पर विशाल नगर कीरà¥à¤¤à¤¨ निकाला गया था। तà¤à¥€ से यह परंपरा जारी है।
वैशाखी केवल धारà¥à¤®à¤¿à¤• परà¥à¤µ नहीं बलà¥à¤•ि सांसà¥à¤•ृतिक संवाद, विविधता का उतà¥à¤¸à¤µ और सिख समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की पहचान का वैशà¥à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• बन चà¥à¤•ा है।
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