परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ संबधी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से जूठरही दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लिठसà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से जमीनी सà¥à¤¤à¤° के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• आवशà¥à¤¯à¤• होते जा रहे हैं। à¤à¤¸à¥€ ही à¤à¤• पहल जोर पकड़ रही है गà¥à¤°à¤¾à¤® समृदà¥à¤§à¤¿ फाउंडेशन (GSF) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ चलाये जा रहे आम बीज दान अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ के माधà¥à¤¯à¤® से। यह अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ वà¥à¤¹à¥€à¤²à¥à¤¸ गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² फाउंडेशन- पैन आईआईटी गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² गिविंग बैक पà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤«à¥‰à¤°à¥à¤® का à¤à¤¾à¤—ीदार है। वà¥à¤¹à¥€à¤²à¥à¤¸ तेजी से विसà¥à¤¤à¤¾à¤° करने, जागरूकता पैदा करने और पहल का समरà¥à¤¥à¤¨ करने के लिठवैशà¥à¤µà¤¿à¤• आईआईटी पूरà¥à¤µ छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के पारिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤• तंतà¥à¤°, कॉरपोरेटà¥à¤¸ और सीà¤à¤¸à¤†à¤° à¤à¤¾à¤—ीदारों का लाठउठाता है।
इस पहल के तहत समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ को आम के बीज इकटà¥à¤ ा करने, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साफ करने और सà¥à¤–ाने तथा अंकà¥à¤°à¤£ के लिठGSF में à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया जाता है। फिर बीजों को उचà¥à¤š गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ वाले पौधों के रूप में तैयार किया जाता है और किसानों को वितरित किया जाता है। लैंडफिल में बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦ होने के बजाय ये बीज परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ को बचाने के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ में मदद करते हैं। अपशिषà¥à¤Ÿ को कम करके और फेंके गठबीजों को संसाधनों में बदलकर यह पहल à¤à¤• वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• टिकाऊ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ का समरà¥à¤¥à¤¨ करती है जो परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ संरकà¥à¤·à¤£ और जैव विविधता में योगदान देती है।
यह अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ कई लाठदेने वाला है। इसमें वृकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ के माधà¥à¤¯à¤® से जलवायॠपरिवरà¥à¤¤à¤¨ का मà¥à¤•ाबला करना और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• रूप से वंचित किसानों का मददगार बनना शामिल है। आम के पेड़ विविध जलवायॠमें पनपते हैं, हवा की गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ में सà¥à¤§à¤¾à¤° करते हैं, सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ गरà¥à¤®à¥€ को कम करते हैं और किसानों के लिठà¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ आय सà¥à¤°à¥‹à¤¤ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। बाजार में आम के à¤à¤• पौधे की कीमत 50 से 200 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के बीच है मगर इस पहल के माधà¥à¤¯à¤® से किसानों को केवल 5 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ में आम का पौधा मिल जाता है। यही नहीं आम के पेड़ अपेकà¥à¤·à¤¾à¤•ृत कम रखरखाव वाले होते हैं इस कारण वे छोटे किसानों के लिठà¤à¤• आदरà¥à¤¶ फसल बन जाते हैं।
विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सà¥à¤•ूलों, इलाकों, हाउसिंग सोसायटी और समूहों सहित पूरे à¤à¤¾à¤°à¤¤ के लोगों ने इस अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से à¤à¤¾à¤— लिया है। मई 2024 से यह पहल देश à¤à¤° के दानदाताओं से 10 लाख बीज à¤à¤•तà¥à¤° करने के लकà¥à¤·à¥à¤¯ तक पहà¥à¤‚चने में सफल रही है। रोपण के उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ से इन बीजों को GSF दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अंकà¥à¤°à¤£ के लिठसंसाधित किया जा रहा है। करीब 1 लाख आम के पेड़ों (सफल अंकà¥à¤°à¤¿à¤¤ बीजों की 10% दर) से à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पशà¥à¤šà¤¿à¤® बंगाल और à¤à¤¾à¤°à¤–ंड राजà¥à¤¯ के 8,000- 10,000 गरीब किसानों को लाठकी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है।
आंदोलन का नेतृतà¥à¤µ करने वाले GSF के जसमीत सिंह बताते हैं कि à¤à¤• बीज से पेड़ तक की यातà¥à¤°à¤¾ बहà¥à¤¤ लंबी है। लगà¤à¤— 3-4 साल की। GSF का यह पà¥à¤°à¥‹à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ तà¤à¥€ सफल हो सकता है जब किसान अपनी दैनिक आय को लेकर तनाव मà¥à¤•à¥à¤¤ होकर आम के पेड़ के नीचे बैठसकें। बीज दान करने जैसे सरल कारà¥à¤¯ के माधà¥à¤¯à¤® से कोई à¤à¥€ हरित और सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में योगदान दे सकता है।
WHEELS à¤à¤¸à¥‡ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ को लागू करके, 2047 तक à¤à¤• विकसित अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ बनने के à¤à¤¾à¤°à¤¤ के दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण के समरà¥à¤¥à¤¨ में 2030 तक à¤à¤¾à¤°à¤¤ की 20% 'रूरà¥à¤¬à¤¨' आबादी (यानी 180 मिलियन से अधिक लोगों) के पà¥à¤°à¥Œà¤¦à¥à¤¯à¥‹à¤—िकी-संचालित परिवरà¥à¤¤à¤¨ के साà¤à¤¾ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना चाहता है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ को लेकर चिंतित और उसे संवारने की चाहत रखने वाले à¤à¤• बड़े वरà¥à¤— से हमारा आगà¥à¤°à¤¹ है कि वे www.wheelsglobal.org पर जाकर हमारे पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ में शामिल होने और हमारी यातà¥à¤°à¤¾ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनने के लिठआगे आà¤à¤‚।
(लेखिका वà¥à¤¹à¥€à¤²à¥à¤¸ गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² फाउंडेशन की मारà¥à¤•ेटिंग और कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤•ेशंस मैनेजर हैं)
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login