अपà¥à¤°à¥ˆà¤² का महीना कई à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤• खास समय होता है। यह बैसाखी (पंजाब), पà¥à¤¥à¤¾à¤‚डॠ(तमिलनाडà¥), विशॠ(केरल), पोहेला बोइशाख (बंगाल), बोहाग बिहू (असम) जैसे जीवंत तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के साथ सौर नव वरà¥à¤· के आगमन का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के हर राजà¥à¤¯ की अपनी परंपराà¤à¤‚, à¤à¥‹à¤œà¤¨ और रीति-रिवाज हैं जो à¤à¤• सामानà¥à¤¯ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ साà¤à¤¾ करते हैं- नवीनीकरण, समृदà¥à¤§à¤¿ और पारिवारिक à¤à¤•जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾à¥¤
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठविशेष रूप से सैन फà¥à¤°à¤¾à¤‚सिसà¥à¤•ो खाड़ी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° जैसे विविधतापूरà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर ये तà¥à¤¯à¥Œà¤¹à¤¾à¤° अंतर-सांसà¥à¤•ृतिक विवाह और बहà¥à¤¸à¤¾à¤‚सà¥à¤•ृतिक घरों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आकार दिठगठà¤à¤• अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¦ का अवसर पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ विरासत वाले परिवार विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚- या यहां तक कि विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ देशों के रीति-रिवाजों को à¤à¤• साथ लाते हैं- उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गहराई से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त और सांसà¥à¤•ृतिक रूप से समृदà¥à¤§ उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ में à¤à¤•ाकार करते हैं।
बे à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ परिवार कैसे मनाते हैं अपने उतà¥à¤¸à¤µ
बहà¥à¤¸à¤¾à¤‚सà¥à¤•ृतिक परिवेश में तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° अकà¥à¤¸à¤° समावेशी पारिवारिक समारोह बन जाते हैं जहां à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ और गैर-à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परिवार के सदसà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤— लेते हैं। उदाहरण के लिà¤...
इस अवसर के लिठबनाठगठविशेष वà¥à¤¯à¤‚जन
बहà¥à¤¸à¤¾à¤‚सà¥à¤•ृतिक परिवार के लिठà¤à¤• फà¥à¤¯à¥‚जन रेसिपी
परिवार अपनी विविध पाककला पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि को जोड़कर à¤à¤¸à¥‡ फà¥à¤¯à¥‚जन वà¥à¤¯à¤‚जन बनाते हैं जो दोनों पकà¥à¤·à¥‹à¤‚ का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करते हैं। यहां à¤à¤• सरल लेकिन सारà¥à¤¥à¤• मैंगो-कोकोनट पायसम है जिसमें कैलिफोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की ताजगी के सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ के साथ तमिलियन और मलयाली सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का मिशà¥à¤°à¤£ है।
आम-नारियल पायसम (खीर) : सामगà¥à¤°à¥€
विधि:
इस वà¥à¤¯à¤‚जन में मैंगो पचड़ी (तमिलनाडà¥) और नारियल पायसम (केरल) का सार मिलाया जाता है और साथ ही कैलिफोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में उगाठगठआमों का उपयोग किया जाता है जो इसे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी परिवार का सचà¥à¤šà¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ बनाता है।
यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी इन तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ से कैसे जà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¥€ है...
पहली पीढ़ी के à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अमेरिकियों के लिठसांसà¥à¤•ृतिक परंपराओं को बनाठरखना कà¤à¥€-कà¤à¥€ à¤à¤• चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ हो सकती है। हालांकि कई यà¥à¤µà¤¾ और वयसà¥à¤• इन तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ को आधà¥à¤¨à¤¿à¤• तरीकों से अपनाते हैं। जैसे कि...
विरासत का जशà¥à¤¨ मनाना
बे à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में जहां संसà¥à¤•ृतियां आपस में मिलती हैं मधà¥à¤¯ अपà¥à¤°à¥ˆà¤² में नठसाल का जशà¥à¤¨ सिरà¥à¤« à¤à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ परंपरा से कहीं बढ़कर है। यह मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤-विरासत वाले परिवारों के लिठअपनी जड़ों से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहने का à¤à¤• तरीका बन गया है और साथ ही नà¤, समावेशी रीति-रिवाज à¤à¥€ बनाता है। à¤à¥‹à¤œà¤¨, संगीत या साधारण पारिवारिक अनà¥à¤·à¥à¤ ानों के माधà¥à¤¯à¤® से इन तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ को संजोया जाता है, आगे बढ़ाया जाता है और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की पीढ़ियों के लिठफिर से तैयार किया जाता है।
अंतर-सांसà¥à¤•ृतिक परिवारों के लिठपरंपराओं को मिलाना और विरासत का जशà¥à¤¨ मनाने के नठतरीके खोजना खà¥à¤¶à¥€ की बात है। à¤à¤¸à¥‡ में सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨ से बेहतर तरीका और कà¥à¤¯à¤¾ हो सकता है? हमारे पास à¤à¤• अनूठा और किफायती मेनू है जो सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨ की आपकी लालसा को संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ करेगा।
(शेफ रंजन डे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नà¥à¤¯à¥‚ दिलà¥à¤²à¥€ रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट à¤à¤• आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ और मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤-परिवार के सà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤µ वाला रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट है। यह सैन फà¥à¤°à¤¾à¤‚सिसà¥à¤•ो का सबसे पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट है और 1988 से à¤à¤• विरासत वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ à¤à¥€ है)
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