à¤à¤• दौर था जब हासà¥à¤¯-वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ मनोरंजन के साथ-साथ समाज को जागरूक करने और गहरी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं को वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ का सशकà¥à¤¤ माधà¥à¤¯à¤® था, लेकिन आज यह अपनी दिशा बदलता नज़र आ रहा है। चारà¥à¤²à¥€ चैपलिन, लॉरेल à¤à¤‚ड हारà¥à¤¡à¥€ और किशोर कà¥à¤®à¤¾à¤° जैसे महान कलाकारों ने हासà¥à¤¯ को à¤à¤• कला का रूप दिया था। यह सिरà¥à¤« हंसने-हंसाने तक सीमित नहीं था बलà¥à¤•ि उसमें सामाजिक संदेश, à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• गहराई और सांसà¥à¤•ृतिक समरसता à¤à¥€ थी। लेकिन आज के दौर में सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड-अप कॉमेडी ने à¤à¤• अलग ही राह पकड़ ली है जिसमें अरà¥à¤¥à¤¹à¥€à¤¨ चà¥à¤Ÿà¤•à¥à¤²à¥‡, आपतà¥à¤¤à¤¿à¤œà¤¨à¤• कंटेंट और सतही हासà¥à¤¯ का बोलबाला है।
जब हासà¥à¤¯ में गहराई हà¥à¤† करती थी
चारà¥à¤²à¥€ चैपलिन की मॉडरà¥à¤¨ टाइमà¥à¤¸ और द गà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ डिकà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿà¤° जैसी फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚ ने मूक होते हà¥à¤ à¤à¥€ हासà¥à¤¯ के माधà¥à¤¯à¤® से सामाजिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ को उठाया था। उनकी अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ शैली ने दरà¥à¤¶à¤•ों को हंसाने के साथ-साथ गरीबी, असमानता और शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों के संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ की तरफ à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ खींचा था। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सिनेमा में महमूद और जॉनी वॉकर जैसे हासà¥à¤¯ कलाकारों ने साफ-सà¥à¤¥à¤°à¥€ और पारिवारिक कॉमेडी को जन-जन तक पहà¥à¤‚चाया। उनकी कॉमेडी सामानà¥à¤¯ जिंदगी के पलों, टाइमिंग और चतà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤ªà¥‚रà¥à¤£ नजरिठपर आधारित था।
वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड-अप का बदलता रूप
सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड-अप कॉमेडी ने जब मà¥à¤–à¥à¤¯à¤§à¤¾à¤°à¤¾ में कदम रखा तो इसमें à¤à¤• नई ऊरà¥à¤œà¤¾ और ताजगी थी। रॉबिन विलियमà¥à¤¸ और जॉरà¥à¤œ कारà¥à¤²à¤¿à¤¨ जैसे कलाकारों ने सामाजिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ को चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ और विचारोतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤• ढंग से पेश किया। लेकिन हाल के वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड-अप का सà¥à¤¤à¤° गिरता जा रहा है। अब कई कलाकार सतही हासà¥à¤¯, गाली-गलौज और सोशल मीडिया टà¥à¤°à¥‡à¤‚डà¥à¤¸ पर निरà¥à¤à¤° होकर ससà¥à¤¤à¥€ लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ हासिल करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ कर रहे हैं।
अधिकतर सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड-अप कॉमेडी में आजकल अपमानजनक मजाक, राजनीतिक विवादों पर तंज और धारà¥à¤®à¤¿à¤• या सांसà¥à¤•ृतिक मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ पर पà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤° किया जा रहा है। वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ हमेशा से हासà¥à¤¯ का हिसà¥à¤¸à¤¾ रहा है, लेकिन आज का वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ अकà¥à¤¸à¤° मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ की सीमा लांघता हà¥à¤† नजर आता है जिससे समाज में अनावशà¥à¤¯à¤• विà¤à¤¾à¤œà¤¨ पैदा हो रहा है।
कà¥à¤¯à¤¾ यह बदलाव खतरनाक है?
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का मानना है कि मौजूदा सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड-अप कॉमेडी à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ पीढ़ी को जनà¥à¤® दे रही है, जो हासà¥à¤¯ को केवल मज़ाक उड़ाने के रूप में देखती है। सोशल मीडिया ने इस चलन को और à¤à¥€ बढ़ावा दिया है, जहां वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ के नाम पर अपमानजनक टिपà¥à¤ªà¤£à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ तेजी से वायरल हो जाती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यà¥à¤µà¤¾ दरà¥à¤¶à¤• इस कंटेंट को बिना किसी आलोचनातà¥à¤®à¤• सोच के गà¥à¤°à¤¹à¤£ कर रहे हैं। इससे उनके मन में यह धारणा बन रही है कि अपमान और गाली-गलौज ही हासà¥à¤¯ का असली रूप है।
समाधान कà¥à¤¯à¤¾ है?
अगर हासà¥à¤¯ को उसकी मूल à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ में वापस लाना है तो इसे à¤à¤Ÿà¤ªà¤Ÿ लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ के लिठससà¥à¤¤à¥‡ कंटेंट पर निरà¥à¤à¤°à¤¤à¤¾ छोड़कर फिर से कथातà¥à¤®à¤•ता, परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤œà¤¨à¥à¤¯ कॉमेडी और सारà¥à¤¥à¤• वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ की ओर लौटना होगा। सचà¥à¤šà¥‡ हासà¥à¤¯ कलाकार केवल हंसाने तक ही सीमित नहीं रहते, वे सोचने पर à¤à¥€ मजबूर करते हैं।
समाजशासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और सांसà¥à¤•ृतिक विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤•ों का मानना है कि अब समय आ गया है कि हासà¥à¤¯ फिर से अपनी जड़ों की ओर लौटे, जहां यह केवल मनोरंजन का माधà¥à¤¯à¤® नहीं था बलà¥à¤•ि समाज को जोड़ने और सकारातà¥à¤®à¤• बदलाव लाने का सशकà¥à¤¤ साधन था।
(रिपोरà¥à¤Ÿ- जागृति शरà¥à¤®à¤¾, नई दिलà¥à¤²à¥€)
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