मà¥à¤¸à¥à¤•ट में हà¥à¤ जूनियर पà¥à¤°à¥à¤· हॉकी à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ कप के फाइनल में à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने अपने परंपरागत पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¥à¤µà¤‚दà¥à¤µà¥€ और पड़ोसी पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को 5-3 से हराकर लगातार तीसरी बार खिताब जीता। फाइनल में चार गोल करने वाले अरजित सिंह हà¥à¤‚डल को मैन ऑफ द मैच चà¥à¤¨à¤¾ गया। à¤à¤¾à¤°à¤¤ 2004, 2008, 2015 और 2023 के à¤à¤¡à¤¿à¤¶à¤¨ का à¤à¥€ विजेता रहा है। टूरà¥à¤¨à¤¾à¤®à¥‡à¤‚ट के 11 संसà¥à¤•रणों में यह à¤à¤¾à¤°à¤¤ की पांचवीं जीत है।
हॉकी à¤à¤¾à¤°à¤¤ के लिठसाल का अंत खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤°à¤¾ रहा, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¥à¤· और महिला टीमों ने पहले ही à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ चैंपियंस टà¥à¤°à¥‰à¤«à¥€ के अपने खिताब बचा लिठहैं और जूनियर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ ने à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ जूनियर कप में हैटà¥à¤°à¤¿à¤• लगाई है। इस जीत से à¤à¤¾à¤°à¤¤ को FIH हॉकी वरà¥à¤²à¥à¤¡ कप जूनियर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में सीधी à¤à¤‚टà¥à¤°à¥€ मिल गई है। यह पूरà¥à¤µ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गोलकीपर पी.आर. शà¥à¤°à¥€à¤œà¥‡à¤¶ के कोच के तौर पर पहले खिताब की जीत है। हालांकि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस साल की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में मलेशिया में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टीम को सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨ हॉकी टूरà¥à¤¨à¤¾à¤®à¥‡à¤‚ट में ले गठथे, लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टीम को केवल कांसà¥à¤¯ पदक मिला था।
अरजित सिंह हà¥à¤‚डल (4', 18', 47', 54') शानदार फॉरà¥à¤® में थे और दिलराज सिंह (19') ने à¤à¤• और गोल किया। पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के कपà¥à¤¤à¤¾à¤¨ शाहिद हनà¥à¤¨à¤¾à¤¨ (3') और सà¥à¤«à¤¯à¤¾à¤¨ खान (30', 39') ने जबरदसà¥à¤¤ कोशिश की और खेल में अपनी टीम को बराबरी में रखा। लेकिन जैसे-जैसे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ खिलाड़ी अपने लय में आ रहे थे, पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के कपà¥à¤¤à¤¾à¤¨ शाहिद हनà¥à¤¨à¤¾à¤¨ ने शूटिंग सरà¥à¤•ल में à¤à¤• गेंद पर हमला किया और बिकà¥à¤°à¤®à¤œà¥€à¤¤ सिंह को à¤à¤•-à¤à¤• की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में हराकर पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को आगे कर दिया।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने तà¥à¤°à¤‚त पेनॉलà¥à¤Ÿà¥€ कॉरà¥à¤¨à¤° हासिल करके जवाब दिया और अरजित ने जोरदार डà¥à¤°à¥ˆà¤— फà¥à¤²à¤¿à¤• मारकर गेंद को दाà¤à¤‚ ऊपरी कोने में डालकर सà¥à¤•ोर बराबर कर दिया। पहली कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° के अंत तक दोनों टीमों ने सरà¥à¤•ल में गेंद को आगे-पीछे किया, लेकिन गोल नहीं कर पाईं। दूसरे कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° के तीन मिनट के अंदर, à¤à¤¾à¤°à¤¤ को à¤à¤• और पेनलà¥à¤Ÿà¥€ कॉरà¥à¤¨à¤° मिला। अरजित ने फिर से कमाल दिखाया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के गोलकीपर मà¥à¤¹à¤®à¥à¤®à¤¦ जंजूआ और à¤à¤• और डिफेंडर के बीच से जोरदार डà¥à¤°à¥ˆà¤— फà¥à¤²à¤¿à¤• मारकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ को बà¥à¤¤ दिला दी।
इसके बाद, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ फॉरवरà¥à¤¡à¥à¤¸ ने पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। जलà¥à¤¦ ही, दिलराज ने बाà¤à¤‚ विंग पर दो डिफेंडरों को चकमा देकर गेंद को बोरà¥à¤¡ में डाल दिया, और à¤à¤¾à¤°à¤¤ की बà¥à¤¤ 3-1 हो गई। पहले हाफ के खतà¥à¤® होने को आते-आते, पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के सà¥à¤«à¤¯à¤¾à¤¨ खान ने अपने डà¥à¤°à¥ˆà¤— फà¥à¤²à¤¿à¤• कौशल का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करते हà¥à¤ सà¥à¤•ोर 3-2 कर दिया।
तीसरे कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में अरजित ने लगातार दो मौके बनाà¤, लेकिन पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के गोलकीपर ने दोनों बार शानदार बचाव करके पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को मैच में बनाठरखा। दोनों टीमें आगे-पीछे होती रहीं। कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° में छह मिनट बचे थे, तब सà¥à¤«à¤¯à¤¾à¤¨ खान ने पेनलà¥à¤Ÿà¥€ कॉरà¥à¤¨à¤° से गेंद को à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गोल में डालकर पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को आखिरी कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° में सà¥à¤•ोर बराबर करके पहà¥à¤‚चाया।
जैसे ही आखिरी कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤° शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤†, à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने पहल कर ली। मनमीत सिंह ने अपने मारà¥à¤•र को चकमा देकर गेंद को गोल के सामने खड़े अरजित तक पहà¥à¤‚चाया, जिसने गेंद को गोल में डालकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ को फिर से बढ़त दिलाई और अपनी हैटà¥à¤°à¤¿à¤• पूरी की।दस मिनट बाकी रहते, जिकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ हयात ने काउंटर-अटैक करने की कोशिश की, लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गोलकीपर पà¥à¤°à¤¿à¤‚स दीप सिंह ने किसी à¤à¥€ खतरे को टाल दिया।
आखिरी कà¥à¤› मिनटों में à¤à¤¾à¤°à¤¤ को पेनलà¥à¤Ÿà¥€ कॉरà¥à¤¨à¤° मिला और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अरजित को फà¥à¤°à¥€ करने के लिठà¤à¤• अलग तरीका अपनाया, जिसने अपनी फà¥à¤²à¤¿à¤• से गेंद को ऊपर दाà¤à¤‚ कोने में जोरदार मारकर à¤à¤¾à¤°à¤¤ का सà¥à¤•ोर 5-3 कर दिया। इससे पहले, à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने सेमीफाइनल में मलेशिया को 3-1 और फाइनल में पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ को 5-3 से हराया था। उससे पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने थाईलैंड को 11-0, जापान को 3-2, चाइनीज ताइपे को 16-0 और कोरिया को 8-1 से हराया था।
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