मेरा नाम रिशान नंदी है। मैं बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶à¥€-अमेरिकी हूं। मेरा जनà¥à¤® संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका में हà¥à¤†à¥¤ मेरे माता-पिता के साथ-साथ मेरा परिवार बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ से है। अपने परिवार के कारण ही मà¥à¤à¥‡ अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संगठनों के साथ हà¥à¤¯à¥‚सà¥à¤Ÿà¤¨ में 'मातृ' दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आयोजित इस रैली में à¤à¤¾à¤— लेने की पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ मिली। यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी के सदसà¥à¤¯ के रूप में à¤à¤• आंदोलन से जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¤¾ सशकà¥à¤¤ और चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ दोनों हो सकता है। जब मैंने बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ हिंदू जागरूकता विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में à¤à¤¾à¤— लिया तो जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ और तातà¥à¤•ालिकता की गहरी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ से यह अहसास बढ़ गया। यह अनà¥à¤à¤µ सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤•जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ की खोज और उन लोगों के लिठखड़े होने की इचà¥à¤›à¤¾ का मिशà¥à¤°à¤£ था जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अकà¥à¤¸à¤° चà¥à¤ª करा दिया जाता है। मेरे लिठयह सिरà¥à¤« à¤à¤• विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ नहीं थी बलà¥à¤•ि à¤à¤• बड़े आखà¥à¤¯à¤¾à¤¨ का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनने जैसा था जो बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ में अलà¥à¤ªà¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤•ों की दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करना चाहता है।
बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ हिंदू जागरूकता विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में मेरी à¤à¤¾à¤—ीदारी कई कारकों से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ रही। बहà¥à¤¸à¤¾à¤‚सà¥à¤•ृतिक वातावरण में पले-बढ़े होने के कारण मैं हमेशा उस विविध ताने-बाने से परिचित रहा हूं जो हमारी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का आधार है। हालांकि इस जागरूकता के साथ यह समठआई कि सà¤à¥€ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ समान वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° नहीं किया जाता। बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ में हिंदू अलà¥à¤ªà¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤•ों की तरह कई लोगों को वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤—त उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¨ और हिंसा का सामना करना पड़ता है। उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¨, हिंसा और जबरन विसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨ के जो किसà¥à¤¸à¥‡ मैंने सोशल मीडिया और अनà¥à¤¯ समाचार माधà¥à¤¯à¤®à¥‹à¤‚ में देखे-पढ़े हैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नजरअंदाज़ करना असंà¤à¤µ था। जितना अधिक मैंने सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बारे में जाना, उतना ही मà¥à¤à¥‡ अहसास हà¥à¤† कि यह सिरà¥à¤« à¤à¤• देश में à¤à¤• समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ का मà¥à¤¦à¥à¤¦à¤¾ नहीं था, बलà¥à¤•ि धारà¥à¤®à¤¿à¤• असहिषà¥à¤£à¥à¤¤à¤¾ और मानवाधिकारों के दà¥à¤°à¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— के वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚ब था जो दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में जारी है। यह अहसास मेरे लिठà¤à¤• शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• था। मैं जानता था कि चà¥à¤ªà¥à¤ªà¥€ कोई विकलà¥à¤ª नहीं था और यह हिसà¥à¤¸à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€, यहां तक ​​कि विरोध के रूप में à¤à¥€, à¤à¤• आवशà¥à¤¯à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ थी। विरोध सà¥à¤µà¤¯à¤‚ बड़े पैमाने पर संचार के माधà¥à¤¯à¤® से आयोजित किया गया था। à¤à¤¸à¥‡ में मेरे पिता सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ थे जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मà¥à¤à¥‡ इस विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में à¤à¤¾à¤— लेने में मदद की। वह मà¥à¤à¥‡ बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ की वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के बारे में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ जानकारी देते थे और रविवार 11 अगसà¥à¤¤ को हमने जो विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया उसमें सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ रूप से मददगार रहे।
विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में शामिल होना मेरे लिठà¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ अनà¥à¤à¤µ था जो लंबे समय तक साथ रहेगा। विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पृषà¥à¤ à¤à¥‚मियों, उमà¥à¤° और जीवन के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के लोगों को à¤à¤• समान उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ के लिठà¤à¤• साथ आते देखना अविशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ रूप से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• था। विरोध सिरà¥à¤« असहमति का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ नहीं था यह उन लोगों के लचीलेपन और अडिग à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ का उतà¥à¤¸à¤µ था जो अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ को आदरà¥à¤¶ के रूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार करने से इनकार करते हैं। सà¤à¥€ ने नारा लगाया 'नà¥à¤¯à¤¾à¤¯, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯, हमें नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ चाहिà¤!' विरोध के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•ों के साथ मैं उन लोगों की मदद तो नहीं कर सका लेकिन उन लोगों के साथ जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ की गहरी à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ महसूस कर सका जो पीड़ित हैं। हर à¤à¤• कदम उन लोगों के लिठà¤à¤• शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि की तरह महसूस हà¥à¤† जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चà¥à¤ª करा दिया गया है, और हर नारा इस बात की यादगार था कि उनके संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚ पर किसी का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ नहीं गया है। हममें से कई लोगों के लिठयह अपनी शकà¥à¤¤à¤¿ को पà¥à¤¨à¤ƒ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने और दूसरों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ सहे जाने वाले अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯ के खिलाफ बोलने के लिठअपनी आवाज का उपयोग करने का कà¥à¤·à¤£ था।
विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ में à¤à¤¾à¤— लेने से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त विकास à¤à¥€ हà¥à¤†à¥¤ इसने मà¥à¤à¥‡ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ और उसमें अपनी जगह के बारे में असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• सचà¥à¤šà¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ का सामना करने की चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ दी। इसने मà¥à¤à¥‡ सामाजिक परिवरà¥à¤¤à¤¨ लाने में सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ की à¤à¥‚मिका और जो सही है उसके लिठखड़े होने के महतà¥à¤µ के बारे में गंà¤à¥€à¤° रूप से सोचने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया, à¤à¤²à¥‡ ही यह आसान न हो। विरोध ने परिवरà¥à¤¤à¤¨ लाने की यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी की शकà¥à¤¤à¤¿ में मेरे विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ की à¤à¥€ पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ की। हमें अकà¥à¤¸à¤° यह कहकर खारिज कर दिया जाता है कि हम अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• आदरà¥à¤¶à¤µà¤¾à¤¦à¥€ हैं या वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता से कटे हà¥à¤ हैं लेकिन मेरा मानना ​​है कि यह वासà¥à¤¤à¤µ में हमारा आदरà¥à¤¶à¤µà¤¾à¤¦ ही है जो हमें à¤à¤• बेहतर दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की मांग करने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता है। हम उस संशयवाद से बंधे नहीं हैं जो कà¤à¥€-कà¤à¥€ उमà¥à¤° के साथ आता है। इसके बजाय हम इस विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ होते हैं कि परिवरà¥à¤¤à¤¨ संà¤à¤µ है, और यह हमसे शà¥à¤°à¥‚ होता है।
(रिशान नंदी यूटी ऑसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨ में तीसरे वरà¥à¤· के छातà¥à¤° हैं और वह बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶à¥€-अमेरिकी हैं)
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login