साईं शà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤µà¤¾à¤¸ रेडà¥à¤¡à¥€
अमेरिका से 100 से अधिक à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नागरिकों को सैनà¥à¤¯ विमानों से देश से बाहर à¤à¥‡à¤œà¤¾ गया, जो राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ डोनालà¥à¤¡ टà¥à¤°à¤®à¥à¤ª की निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ नीति का हिसà¥à¤¸à¤¾ था। इनमें से दो लोगों को निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ के दौरान हथकड़ी पहनाई गई, जिससे कानून पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤¨ à¤à¤œà¥‡à¤‚सियों की सखà¥à¤¤à¥€ को लेकर सवाल खड़े हो गठहैं। सà¤à¥€ 104 निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ ने अपने संवैधानिक अधिकारों के उलà¥à¤²à¤‚घन का आरोप लगाया है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दावा किया कि अमेरिकी बिल ऑफ राइटà¥à¤¸ के तहत दिठगठकई अधिकारों, जैसे अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• कठोर सजा से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾, वकील तक पहà¥à¤‚च और आतà¥à¤®-अà¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤— से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ का उलà¥à¤²à¤‚घन हà¥à¤† है।
कà¥à¤¯à¤¾ है कानूनी पेच?
अमेरिकी सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ ने निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ को आपराधिक सजा के बजाय नागरिक पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ माना है। 1893 में Fong Yue Ting v. United States केस में कोरà¥à¤Ÿ ने कहा था, "निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ किसी अपराध की सजा नहीं है, बलà¥à¤•ि à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ है।" हालांकि, निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ आपराधिक सजा से à¤à¥€ अधिक गंà¤à¥€à¤° हो सकते हैं। 1922 के Ng Fung Ho v. White केस में जसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¸ लà¥à¤ˆ बà¥à¤°à¥ˆà¤‚डिस ने कहा था कि निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ के कारण वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ "अपनी संपतà¥à¤¤à¤¿, जीवन और समà¥à¤®à¤¾à¤¨" सब कà¥à¤› खो सकता है।
संवैधानिक अधिकारों का उलà¥à¤²à¤‚घन?
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ à¤à¤• नागरिक (सिविल) पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ माना जाता है, इसलिठइसमें कई संवैधानिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ नहीं मिलतीं जो कि आपराधिक मामलों में मिलती हैं:
निःशà¥à¤²à¥à¤• वकील नहीं दिया जाता – अपराधियों को सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वकील मà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ कराया जाता है (Gideon v. Wainwright, 1963), लेकिन निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ लोगों को खà¥à¤¦ की कानूनी रकà¥à¤·à¤¾ करनी होती है।
पिछली तारीख से लागू होने वाले कानून (Retroactive Laws) लागू होते हैं – आपराधिक कानूनों को पीछे की तारीख से लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ मामलों में यह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध नहीं है (Galvan v. Press, 1954)।
मिरांडा चेतावनी नहीं दी जाती – अमेरिका में आपराधिक मामलों में गिरफà¥à¤¤à¤¾à¤°à¥€ के वकà¥à¤¤ आरोपी को उसके अधिकारों की जानकारी दी जाती है (Miranda v. Arizona, 1966), लेकिन निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ लोगों को यह सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ नहीं मिलती।
तेजी से सà¥à¤¨à¤µà¤¾à¤ˆ (Speedy Trial) का अधिकार नहीं – आपराधिक मामलों में कोरà¥à¤Ÿ को फैसला जलà¥à¤¦ देना होता है, लेकिन निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ मामलों में लंबा इंतजार करना पड़ता है।
गैर-कानूनी रूप से हासिल सबूत à¤à¥€ सà¥à¤µà¥€à¤•ार किठजाते हैं – आपराधिक मामलों में अवैध रूप से जà¥à¤Ÿà¤¾à¤ गठसबूत खारिज कर दिठजाते हैं, लेकिन निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ मामलों में à¤à¤¸à¤¾ नहीं है (INS v. Lopez-Mendoza, 1984)।
निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ के गंà¤à¥€à¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ और सà¥à¤§à¤¾à¤° की जरूरत
निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ आजीवन कारावास या अनà¥à¤¯ आपराधिक सजा से à¤à¥€ अधिक हो सकता है। सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ ने Solem v. Helm (1983) केस में कहा था कि गैर-हिंसक अपराधों के लिठआजीवन कारावास "कà¥à¤°à¥‚र और असामानà¥à¤¯ सजा" हो सकती है। लेकिन निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ कानून इस सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त का पालन नहीं करता।
इसलिठआवà¥à¤°à¤œà¤¨ कानून में सà¥à¤§à¤¾à¤° की सिफारिशें
निःशà¥à¤²à¥à¤• कानूनी सहायता उपलबà¥à¤§ कराई जाठ– खासतौर पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ और मानसिक रूप से असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ लोगों को वकील मà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾ कराया जाà¤à¥¤
पिछली तारीख से लागू किठजाने वाले निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ कानूनों को खतà¥à¤® किया जाठ– निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ के नियमों को नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¸à¤‚गत बनाया जाà¤à¥¤
मिरांडा चेतावनी और उचित कानूनी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दी जाठ– ताकि निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¤ लोग अपने अधिकारों को जान सकें।
अदालतों की दकà¥à¤·à¤¤à¤¾ बढ़ाई जाठ– केसों का तेजी से निपटारा करने के लिठनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤Ÿà¤¾à¤« बढ़ाया जाà¤à¥¤
गैर-कानूनी सबूतों को खारिज किया जाठ– जैसे कि आपराधिक मामलों में होता है।
कà¥à¤¯à¤¾ अमेरिका की निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ नीति नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¸à¤‚गत है?
निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ को नागरिक मामला मानने से आपराधिक कानून के कई संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। यह कई लोगों के लिठपरिवार से बिछड़ने, रोजगार छिनने और जीवन के लिठखतरे की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पैदा कर सकता है। विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का मानना है कि संविधानिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ उपायों को निरà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ मामलों में à¤à¥€ लागू किया जाà¤, ताकि यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अधिक नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¸à¤‚गत और मानवीय हो।
(इस लेख में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ विचार और राय लेखक के अपने हैं और जरूरी नहीं कि वे नà¥à¤¯à¥‚ इंडिया अबà¥à¤°à¥‰à¤¡ की आधिकारिक नीति या सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करते हों।)
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