दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शहर चेनà¥à¤¨à¤ˆ के लोगों के लिठदिन की सही शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ तब तक नहीं होती जब तक ताज़ी बनी हà¥à¤ˆ फिलà¥à¤Ÿà¤° कॉफी की सà¥à¤—ंध चारों ओर न फैल जाà¤à¥¤ यह सिरà¥à¤« à¤à¤• पेय नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• परंपरा, à¤à¤• विशà¥à¤°à¤¾à¤® का पल और घर से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ का अहसास है, चाहे इंसान दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के किसी à¤à¥€ कोने में कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो। फिर चाहे वह मायलापà¥à¤° की वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ गलियां हों, लंदन का शांत उपनगर या फिर हैदराबाद की बरसात में à¤à¥€à¤—ी सड़कें, दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ का 'कापी' पà¥à¤°à¥‡à¤® कà¤à¥€ नहीं बदलता।
सà¥à¤¬à¤¹ की शानदार शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤
मायलापà¥à¤° के à¤à¤• पारंपरिक तमिल बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ घर में, जब सूरज की पहली किरणें शहर को छूती हैं, तो नाना और अमà¥à¤®à¤¾ का रोज़ाना का रूटीन शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। अमà¥à¤®à¤¾, खिचड़ी कांचीवरम साड़ी पहने, घर के पूजा ककà¥à¤· में जाकर दीप जलाती हैं। चारों ओर ताज़े चमेली के फूलों और चंदन की महक फैल जाती है। उधर नाना, सफेद वेसà¥à¤Ÿà¥€ और अंगवसà¥à¤¤à¥à¤°à¤® पहने, सबà¥à¤œà¤¼à¥€ खरीदने निकलते हैं और रासà¥à¤¤à¥‡ में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ सबà¥à¤œà¥€à¤µà¤¾à¤²à¥‡ से दो-चार बातें कर लेते हैं, जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सालों से जानता है।
लेकिन इस सबके पहले à¤à¤• अहम चीज़ होती है—कॉफी।
तांबे के दावरा-टंबलर की हलà¥à¤•ी खनक के बीच गरà¥à¤®à¤¾à¤—रà¥à¤® फिलà¥à¤Ÿà¤° कॉफी को ऊपर-नीचे उंडेला जाता है ताकि उसमें सही à¤à¤¾à¤— आ सके। अमà¥à¤®à¤¾ मà¥à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ नाना को टंबलर पकड़ाती हैं, "यह सिरà¥à¤« कॉफी पीने की बात नहीं है, बलà¥à¤•ि इसे महसूस करने, अखबार पर चरà¥à¤šà¤¾ करने और मन को ताजगी देने का तरीका है।"
यह à¤à¥€ पढ़ेंः नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• सिटी में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ रेसà¥à¤Ÿà¥‹à¤°à¥‡à¤‚ट बà¥à¤–ारा गà¥à¤°à¤¿à¤² की धमाकेदार वापसी, 25 साल की यातà¥à¤°à¤¾ का जशà¥à¤¨
लंदन में चेनà¥à¤¨à¤ˆ की खà¥à¤¶à¤¬à¥‚
दूसरी तरफ, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के à¤à¤• अलग कोने में वेमà¥à¤¬à¤²à¥€, लंदन के à¤à¤• शांत घर में—à¤à¤• दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ NRI दंपतà¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ अपनी सà¥à¤¬à¤¹ बिलà¥à¤•à¥à¤² वैसे ही शà¥à¤°à¥‚ करता है। जहां आसपास की गलियों में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤•फासà¥à¤Ÿ टी की खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ फैली होती है, वहीं उनके रसोईघर में अब à¤à¥€ "नरसà¥à¤¸ कॉफी" की तेज़ सà¥à¤—ंध होती है। यह कॉफी हर à¤à¤¾à¤°à¤¤ यातà¥à¤°à¤¾ पर चेनà¥à¤¨à¤ˆ से खासतौर पर लाई जाती है।
80 वरà¥à¤·à¥€à¤¯ शà¥à¤°à¥€ सà¥à¤¬à¥à¤°à¤®à¤£à¥à¤¯à¤®, जो दशकों पहले यूके में बस गठथे, कहते हैं, "हम à¤à¤²à¥‡ ही लंदन में रहते हैं, लेकिन हमारी जड़ें गहरी हैं। मेरी पतà¥à¤¨à¥€ आज à¤à¥€ सà¥à¤¬à¤¹ जलà¥à¤¦à¥€ उठती हैं, पूजा करती हैं और फिर मà¥à¤à¥‡ उसी पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ चांदी के टंबलर में कॉफी परोसती हैं—बिलà¥à¤•à¥à¤² चेनà¥à¤¨à¤ˆ की तरह।"
हैदराबाद में à¤à¤¨à¤†à¤°à¤†à¤ˆ संसà¥à¤•ृति
हैदराबाद के जà¥à¤¬à¤²à¥€ हिलà¥à¤¸ में, जहां कई à¤à¤¨à¤†à¤°à¤†à¤ˆ सालों विदेश में बिताने के बाद वापस लौटे हैं, वहां à¤à¥€ फिलà¥à¤Ÿà¤° कॉफी का वही महतà¥à¤µ है। लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ और विटà¥à¤ ल कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ ने 25 साल नà¥à¤¯à¥‚ जरà¥à¤¸à¥€ में बिताà¤, कहते हैं, "हमारे पास घर में कई आधà¥à¤¨à¤¿à¤• कॉफी मशीनें हैं, लेकिन हमारी पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ सà¥à¤Ÿà¥€à¤² की फिलà¥à¤Ÿà¤° में रातà¤à¤° टपकती हà¥à¤ˆ डेकोकà¥à¤¶à¤¨ वाली कॉफी का कोई मà¥à¤•ाबला नहीं।"
उनका दिन सà¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤¤à¤® के मंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ से शà¥à¤°à¥‚ होता है, फिर à¤à¤• बालाजी मंदिर की छोटी सी यातà¥à¤°à¤¾ और नाशà¥à¤¤à¥‡ से पहले सà¥à¤Ÿà¥€à¤² टंबलर में à¤à¤¾à¤—दार फिलà¥à¤Ÿà¤° कॉफी। "यह हमारे साथ चेनà¥à¤¨à¤ˆ की यादों को हर दिन जीवंत रखता है," कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ कहते हैं।
à¤à¤• पेय से बढ़कर
दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परिवारों के लिठपरंपराओं को जीवित रखना सिरà¥à¤« पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ यादों में खोने à¤à¤° की बात नहीं है, बलà¥à¤•ि यह अपनी पहचान बनाठरखने का जरिया à¤à¥€ है। चाहे वह कॉफी पीने की अनूठी परंपरा हो, केले के पतà¥à¤¤à¥‡ पर रसम-à¤à¤¾à¤¤ खाने का आनंद हो, या फिर हर शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° मंदिर जाने की आदत—ये सà¤à¥€ चीज़ें उनकी जड़ों से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ रहने का माधà¥à¤¯à¤® हैं।
लंदन की अयà¥à¤¯à¤° गरà¥à¤µ से कहती हैं, "मेरे पोते-पोतियां अब सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¤¬à¤•à¥à¤¸ की जगह फिलà¥à¤Ÿà¤° कॉफी की डिमांड करते हैं। यह उनके खून में है!"
संसà¥à¤•ारों से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ à¤à¤• महक
आज जब दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ तेज़ी से मॉडरà¥à¤¨ हो रही है, तब à¤à¥€ फिलà¥à¤Ÿà¤° कॉफी सिरà¥à¤« à¤à¤• पेय नहीं, बलà¥à¤•ि अपनेपन, सà¥à¤•ून और संसà¥à¤•ृति का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• बनी हà¥à¤ˆ है।
चाहे आप चेनà¥à¤¨à¤ˆ में हों, हैदराबाद में, लंदन में या दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के किसी à¤à¥€ कोने में—à¤à¤• à¤à¤¾à¤—दार, कड़क फिलà¥à¤Ÿà¤° कापी सिरà¥à¤« à¤à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¦ नहीं, बलà¥à¤•ि घर की याद, à¤à¤• परंपरा और à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ है, जो कà¤à¥€ धà¥à¤‚धली नहीं होती।
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