आनंद पारà¥à¤¥à¤¸à¤¾à¤°à¤¥à¥€
à¤à¤• दशक पहले इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• कार उदà¥à¤¯à¤®à¥€ और 'à¤à¤•à¥à¤¸' (पूरà¥à¤µ में टà¥à¤µà¤¿à¤Ÿà¤°) के मालिक à¤à¤²à¥‹à¤¨ मसà¥à¤• ने पहली बार सेमी-वैकà¥à¤¯à¥‚म टà¥à¤¯à¥‚बों में 600 किमी पà¥à¤°à¤¤à¤¿ घंटे से अधिक की गति से लोगों को जमीन पर ले जाने के लिठà¤à¤• साहसी तरीका पेश किया था। लेकिन हाइपरलूप वन का यह सपना चूर हो चà¥à¤•ा है। सैन जोस (सीà¤) मरà¥à¤•री नà¥à¤¯à¥‚ज ने पिछले महीने बà¥à¤²à¥‚मबरà¥à¤— का हवाला देते हà¥à¤ रिपोरà¥à¤Ÿ किया है कि इसके लगà¤à¤— सà¤à¥€ 200 से अधिक करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को बैठा दिया गया है। इसके लास वेगास टेसà¥à¤Ÿ टà¥à¤°à¥ˆà¤• को बेच दिया गया है और इसकी तकनीक और बौदà¥à¤§à¤¿à¤• संपदा संà¤à¤µà¤¤à¤ƒ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– शेयरधारक और दà¥à¤¬à¤ˆ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ समूह, डीपी वरà¥à¤²à¥à¤¡ को हसà¥à¤¤à¤¾à¤‚तरित कर दी गई है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤ ने à¤à¤• समय में बेंगलà¥à¤°à¥ हवाई अडà¥à¤¡à¥‡, सिटी सेंटर और मैसूरà¥, महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° में मà¥à¤‚बई और पà¥à¤£à¥‡, और आंधà¥à¤° में अमरावती और विजयवाड़ा के बीच जैसे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के बीच हाइपरलूप लिंक सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करने के लिठअमेरिकी डेवलपर के साथ कम से कम तीन समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ जà¥à¤žà¤¾à¤ªà¤¨à¥‹à¤‚ पर हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° किà¤à¥¤
विमान की गति के साथ जमीन पर परिवहन के रूप में हाइपरलूप वन के मूल विचार ने 2014 के बाद से नियमित रूप से दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की सà¥à¤°à¥à¤–ियां बटोरी हैं। वरà¥à¤œà¤¿à¤¨ à¤à¤¯à¤°à¤²à¤¾à¤‡à¤‚स के रिचरà¥à¤¡ बà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¤¸à¤¨ सहित अनà¥à¤¯ लोगों ने 450 मिलियन डॉलर का इसमें निवेश किया। कà¥à¤› वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक इसे वरà¥à¤œà¤¿à¤¨ हाइपरलूप के नाम से ही जाना जाता था, जब तक कि बà¥à¤°à¥ˆà¤¨à¤¸à¤¨ ने अपनी हिसà¥à¤¸à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ नहीं खींच ली और इस दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में डीपी वरà¥à¤²à¥à¤¡ ने कदम रखा।
हाइपरलूप के लिठà¤à¤• समय में à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कà¥à¤› पेशेवर काम करते थे। इनमें पà¥à¤£à¥‡ के पावर इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¨à¤¿à¤•à¥à¤¸ इंजीनियर तनय मांजरेकर शामिल हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हाइपरलूप पॉड में टेसà¥à¤Ÿ टà¥à¤°à¥ˆà¤• की सवारी करने वाले पहले दो दिगà¥à¤—जों में से à¤à¤• होने का गौरव पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ था, हालांकि इसकी गति 175 किमी पà¥à¤°à¤¤à¤¿ घंटे की रही।
लेकिन कोविड के वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ ने हाइपरलूप पर à¤à¥€ अपना असर डाला और मारà¥à¤š 2022 में à¤à¤• घोषणा में कहा गया कि परियोजना को लोगों के बजाय माल परिवहन के लिठफिर से तैयार किया जा रहा है। इसने दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ को कम कर दिया। पà¥à¤£à¥‡ से मà¥à¤‚बई की यातà¥à¤°à¤¾ 3 घंटे के बजाय 25 मिनट में या सैन फà¥à¤°à¤¾à¤‚सिसà¥à¤•ो से कैलिफोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में लॉस à¤à¤‚जिलà¥à¤¸ के बीच 6 घंटे की डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µ को घटाकर 45 मिनट की ईचà¥à¤›à¤¾ रखने वाले लोगों का इसके लिठगहरा आकरà¥à¤·à¤£ था। à¤à¤• तरह से मामला नैपथà¥à¤¯ में चला गया।
लेकिन खास तौर पर पà¥à¤£à¥‡ और चेनà¥à¤¨à¤ˆ के आसपास केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤…प, जो अपने पेस के माधà¥à¤¯à¤® से सà¥à¤•ेल-डाउन हाइपरलूप पॉडà¥à¤¸ लगाने के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ चरणों में हैं, हार नहीं मान रहे हैं। चेनà¥à¤¨à¤ˆ में आईआईटी मदà¥à¤°à¤¾à¤¸ में सलाह देने वाली दो टीमें नियमित रूप से अपने काम को पूरा कर रही हैं। 2017 के बाद से, 50 सदसà¥à¤¯à¥€à¤¯ टीम को à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार, à¤à¤²à¤à¤‚डटी और टà¥à¤¯à¥‚ब इनà¥à¤µà¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ ऑफ इंडिया से फंड मिला है। रेलवे ने à¤à¥€ रà¥à¤šà¤¿ दिखाई है। परिणाम यह है कि चनà¥à¤¨à¤ˆ और बेंगलà¥à¤°à¥ के बीच 350 किलोमीटर के टà¥à¤°à¥ˆà¤• पर काम को गति मिल रही है जो यातà¥à¤°à¤¾ के समय को 30 मिनट तक कम कर सकती है।
कंपनी ने चेनà¥à¤¨à¤ˆ में 400 मीटर का परीकà¥à¤·à¤£ टà¥à¤°à¥ˆà¤• बनाने के लिठटाटा सà¥à¤Ÿà¥€à¤² और आरà¥à¤¸à¥‡à¤²à¤° मितà¥à¤¤à¤² के साथ à¤à¤¾à¤—ीदारी की है। पिछले साल इसने कà¥à¤› संयà¥à¤•à¥à¤¤ विकास के लिठनीदरलैंड सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हाइपरलूप पà¥à¤²à¥‡à¤¯à¤° हारà¥à¤¡à¥à¤Ÿ हाइपरलूप के साथ à¤à¤• समà¤à¥Œà¤¤à¥‡ पर हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° किà¤à¥¤
कारà¥à¤—ो à¤à¥€ पà¥à¤£à¥‡ सà¥à¤Ÿà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤…प Quintrans, हाइपरलूप को पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दे रहा है। इस पर 2021 से काम कर रहा है। निवेश में 100,000 अमरीकी डालर से अधिक जà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨à¥‡ के बाद, कà¥à¤µà¤¿à¤‚टà¥à¤°à¤¾à¤‚स के पास काफी फंड है। पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में इसे लेकर हलचल है। सà¥à¤µà¤¿à¤Ÿà¥à¤œà¤°à¤²à¥ˆà¤‚ड के जà¥à¤¯à¥‚रिख में यूरोपीय हाइपरलूप वीक 2023 में, सà¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ परियोजनाओं का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ किया गया और टीम आविषà¥à¤•ार जैसी कà¥à¤› परियोजनाओं को टॉप 3 में आंका गया। EHW 2024 इस साल जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ में होगा और इसमें फिर से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ à¤à¤¾à¤—ीदारी देखने की उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है।
अब जब अमेरिका में मूल हाइपरलूप को छोड़ दिया गया है, तो कà¥à¤¯à¤¾ यह à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ को मिटा देगा या वे हाइपरलूप वन की राख से फीनिकà¥à¤¸ की तरह उठेंगे? यह कहना अà¤à¥€ जलà¥à¤¦à¤¬à¤¾à¤œà¥€ होगा। लेकिन सरकार के सहयोग के बिना, यह कठिन कारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤¤ होता है। à¤à¤• समय तो सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ संचालित रेलवे ने रà¥à¤šà¤¿ दिखाई थी। लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग के सदसà¥à¤¯ डॉ वीके सारसà¥à¤µà¤¤ के हवाले से दो महीने पहले खबर सामने आई थी कि अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾-हाई-सà¥à¤ªà¥€à¤¡ टà¥à¤°à¥‡à¤¨ विकलà¥à¤ª के रूप में इस नई तकनीक में निकट अवधि के हित को खारिज कर दिया था।
कोई अनà¥à¤¯ बड़ा कॉरपोरेट या सरकारी रà¥à¤šà¤¿ दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° और आंधà¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ जैसी राजà¥à¤¯ सरकारें अà¤à¥€ à¤à¥€ अपनी मूल योजनाओं को खà¥à¤²à¤¾ रख सकती हैं। लेकिन वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• रूप से, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ अà¤à¥€ à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• धरातल के करीब नहीं हैं। हाइपरलूप परिवहन पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ आज à¤à¤• सपने की तरह दिखता है। लेकिन 10 साल बाद कà¥à¤¯à¤¾ होगा ? कौन जानता है।
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