à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सबसे पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§, सबसे समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤µà¤¿à¤¦à¥ और देश के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– संवैधानिक विशेषजà¥à¤ž फली सैम नरीमन का 21 फरवरी को तड़के 95 वरà¥à¤· की आयॠमें निधन हो गया। बॉमà¥à¤¬à¥‡ हाई कोरà¥à¤Ÿ में 22 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक वकालत करने के बाद नरीमन दिलà¥à¤²à¥€, सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ चले गà¤à¥¤ वहां वह 1971 से वरिषà¥à¤ वकील थे। नरीमन वरà¥à¤· 1972 में अतिरिकà¥à¤¤ सॉलिसिटर जनरल नियà¥à¤•à¥à¤¤ किठगà¤à¥¤ मगर जून 1975 में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने तब इसà¥à¤¤à¥€à¤«à¤¾ दे दिया जब à¤à¤¾à¤°à¤¤ की तदà¥à¤•ालीन पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ इंदिरा गांधी के नेतृतà¥à¤µ वाली सरकार ने आंतरिक आपातकाल की घोषणा कर दी।
इसके बाद के दशकों में नरीमन ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ की शीरà¥à¤· अदालत में आठकà¥à¤› सबसे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ मामलों पर बहस की। इन मामलों में से कई फैसले संवैधानिक कानून को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करने वाले और à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• रहे। उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखी गई कई पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों (मधà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¥à¤¤à¤¾ पर à¤à¤• शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला सहित) में से चार à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° में उनके योगदान के जीवंत पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ के रूप में सामने आती हैं।
उनकी 2012 की आतà¥à¤®à¤•था 'बिफोर मेमोरी फेडà¥à¤¸' संविधान दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों में उनके दृढ़ विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ और राजनीति तथा नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤ªà¤¾à¤²à¤¿à¤•ा के बीच अशांत संबंधों पर उनके वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त विचारों को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ है। à¤à¤• गलत निरà¥à¤£à¤¯ की सà¥à¤µà¥€à¤•ारोकà¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ है। विशेष रूप से à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² गैस तà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¦à¥€ मामले में यूनियन कारà¥à¤¬à¤¾à¤‡à¤¡ के बचाव में जिसे बाद में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया कि वह à¤à¤• गलती (पेपरबैक रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ 699) थी।
'इंडियाज़ लीगल सिसà¥à¤Ÿà¤® : कैन इट बी सेवà¥à¤¡' (2017) आपराधिक नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ के साथ-साथ जनहित याचिका, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• समीकà¥à¤·à¤¾ और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤• सकà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ जैसे समकालीन नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° के पहलà¥à¤“ं की जांच करती है। इसमें वह असमानता और सकारातà¥à¤®à¤• कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ जैसे सामाजिक मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ संबोधित करते (पेपरबैक 250 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡) हैं।
'गॉड सेव द सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ' (2018) à¤à¤¾à¤°à¤¤ की शिखर अदालत की कारà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€, पà¥à¤°à¥‡à¤¸, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤ªà¤¾à¤²à¤¿à¤•ा और अलà¥à¤ªà¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤•ों के संबंध में सरकार की नीतियों, सà¥à¤ªà¥à¤°à¥€à¤® कोरà¥à¤Ÿ तथा नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤ªà¤¾à¤²à¤¿à¤•ा, राजनेताओं और संसद, मीडिया और इसके अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के अधिकारों की बात करती (पेपरबैक 499 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡) है।
नरीमन की महान रचना 'यू मसà¥à¤Ÿ नो द कॉनà¥à¤¸à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚शन' (सितंबर 2023) à¤à¤¾à¤°à¤¤ के संविधान के इतिहास और उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ का पता लगाती है और 31 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 2023 तक महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ मामलों और पà¥à¤°à¤®à¥à¤– संवैधानिक विकासकà¥à¤°à¤® की जांच करती है। यह सामानà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ और कानून का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने वालों के लिठà¤à¤• संदरà¥à¤ के रूप में बेजोड़ (हारà¥à¤¡ कवर 899 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡) है।
ये चारों किताबें अमेज़ॅन और फà¥à¤²à¤¿à¤ªà¤•ारà¥à¤Ÿ जैसी ऑनलाइन साइटों पर रियायती कीमतों पर उपलबà¥à¤§ हैं। फली नरीमन की जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की विरासत इन पनà¥à¤¨à¥‹à¤‚ में जीवित है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login