अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ निवेश पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ सलाहकार फरà¥à¤® हेनले à¤à¤‚ड पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤°à¥à¤¸ की à¤à¤• हालिया रिपोरà¥à¤Ÿ को à¤à¤¾à¤°à¤¤ के तथाकथित राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ 'अचà¥à¤›à¤¾' और आशावादी बता रहे हैं। उनको यह रिपोरà¥à¤Ÿ फील गà¥à¤¡ का अहसास करा रही है। इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इसमें à¤à¤¾à¤°à¤¤ से पलायन करने वाले करोड़पतियों की संखà¥à¤¯à¤¾ पिछले साल के मà¥à¤•ाबले अनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ रूप से कम दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¥€ गई है। रिपोरà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पिछले साल à¤à¤¾à¤°à¤¤ से 5100 करोड़पति पलायन कर गये थे और इस बार 4300 देश छोड़ सकते हैं। यानी अगर आंकड़ों के ही हिसाब से गणित लगाà¤à¤‚ तो पिछली साल से 800 कम। यह अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ है, इसमें ऊपर नीचे हो सकता है।
तो तथातथित राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦à¥€ इसलिठखà¥à¤¶ हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤•ि पलायन में यह संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कमी इसलिठआई है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि अब à¤à¤¾à¤°à¤¤ की छवि बदल गई है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पटल पर चमक रहा है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ की धाक बढ़ी है। लोगों का सरकार और शासन को लेकर रà¥à¤– बदला है। अविशà¥à¤µà¤¾à¤¸ ...विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ में तबà¥à¤¦à¥€à¤² हो रहा है। अब à¤à¤¾à¤°à¤¤ में समृदà¥à¤§à¤¿ और तरकà¥à¤•ी की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं के दà¥à¤µà¤¾à¤° खà¥à¤² गठहैं और कारोबारी जमात निवेश को लेकर आशà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤ होती जा रही है। इसीलिठपलायन करने वाले करोड़पतियों की संखà¥à¤¯à¤¾ में कमी आने जा रही है। बकौल 'उनके' यह सब इसलिठहà¥à¤† कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि बीते 10 साल से और आने वाले पांच साल के लिठदेश की कमान à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ नायक के हाथ रहने वाली है जो सियासत में कीरà¥à¤¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ रच रहा है। घर के साथ बाहर à¤à¥€à¥¤
लेकिन यह तो करोड़पतियों की बात है। हर साल देश (à¤à¤¾à¤°à¤¤) छोड़ने वालों की संखà¥à¤¯à¤¾ लाखों में है। साल 2014 में नरेनà¥à¤¦à¥à¤° मोदी ने बतौर पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ देश की बागडोर अपने हाथ में ली और बदलाव का दौर शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤†à¥¤ वरà¥à¤· 2015 में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ नागरिकता छोड़ने वालों की संखà¥à¤¯à¤¾ 1,31,489 थी। बीते 10 साल में à¤à¥€ यह आंकड़ा कम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हà¥à¤† पर अंतत: बढ़ता गया। पिछले साल सरकार ने बताया था कि 2022 में सवा दो लाख से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ ने अपना देश छोड़ कहीं और बसने का फैसला किया। इन लाखों लोगों में अधिकांश विशà¥à¤¦à¥à¤§ कारोबारी नहीं हैं, अलग तबकों और पेशों से हैं। लिहाजा यह तो तय है कि हर वरà¥à¤— के लोग à¤à¤¾à¤°à¤¤ छोड़ रहे हैं। विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कारणों से। कारण सबके अलग हो सकते हैं लेकिन मंशा बेहतरी ही रही है या रहेगी यह तो तय है।
अब à¤à¤¸à¥‡ में वह दावा कमजोर पड़ जाता है कि बीते 10 साल में à¤à¤¸à¤¾ कोई चमतà¥à¤•ारी परिवरà¥à¤¤à¤¨ हà¥à¤† है जिसने करीब 800 करोड़पतियों को à¤à¤¾à¤°à¤¤ छोड़ने से रोक दिया। इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ सरकार यह बात लगातार कहती रही है कि जो काम 70 (करीब) साल में नहीं हà¥à¤† वह 10 साल में हो गया। यह सही है कि बीते 10 साल में à¤à¤¾à¤°à¤¤ की छवि और सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर कà¥à¤› बदलाव आया है। लेकिन अगर पलायन के इस गà¥à¤°à¤¾à¤« में उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय कमी न आकर बढ़ोतरी ही हà¥à¤ˆ है तो इसका मतलब साफ है कि देश छोड़ने का फैसला केवल सियासी दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण पर आधारित नहीं है।
दरअसल, पलायन à¤à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। यह मजबूरी में तो होता ही है 'मजबूती' में à¤à¥€ होता है। यानी समृदà¥à¤§à¤¿ में। जैसा कि हम देख रहे हैं। इसका मूल उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ अपनी सामाजिक, पारिवारिक और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• बेहतरी से होता है। हर इनसान आगे बढ़ना चाहता है। कारोबारी à¤à¥€ अपने कारोबार को आगे बढ़ाना चाहता है। सब लोग जिंदगी में तरकà¥à¤•ी हासिल करना चाहते हैं। और पलायन केवल à¤à¤¾à¤°à¤¤ का ही सच नहीं है। यह वैशà¥à¤µà¤¿à¤• है। चीन और बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¨ से à¤à¥€ लोग पलायन करते हैं। करोड़पतियों के पलायन के मामले में à¤à¤¾à¤°à¤¤ का नंबर इन दोनों देशों के बाद आने की बात कही जा रही है।
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