वासिनी शà¥à¤¯à¤¾à¤®à¤¾ चरण à¤à¤¾ : à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत के विशाल और जटिल बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚ड में राग रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ ढांचे के रूप में खड़े हैं, जो धà¥à¤¨à¥‹à¤‚ से परे हैं। इन जटिल रचनाओं को लयबदà¥à¤§ तरीके से बà¥à¤¨à¤¾ जाता है, जो नियमों के à¤à¤• जटिल सेट दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ संचालित होते हैं। जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सावधानीपूरà¥à¤µà¤• संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ किया गया है और पीढ़ियों के माधà¥à¤¯à¤® से इसे आगे बढ़ाया गया है। फिर à¤à¥€, राग सिरà¥à¤« संगीत संरचनाओं से अधिक हैं। वे मानवीय à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤à¤µ की गहन गहराई को वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने के माधà¥à¤¯à¤® हैं।
रागों की उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ का पता पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ वैदिक शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से लगाया जा सकता है, जहां संगीत को à¤à¤• पवितà¥à¤° कला के रूप में समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया है। जो आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• परंपराओं और अनà¥à¤·à¥à¤ ानों के साथ अटूट रूप से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है। नाटà¥à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°, दूसरी शताबà¥à¤¦à¥€ ईसा पूरà¥à¤µ के आसपास ऋषि à¤à¤°à¤¤ मà¥à¤¨à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रचित à¤à¤• मौलिक गà¥à¤°à¤‚थ है। यह रागों के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तों को वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ रूप से संहिताबदà¥à¤§ करने वाले शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ गà¥à¤°à¤‚थों में से à¤à¤• है।
जैसे-जैसे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत विकसित हà¥à¤†, रागों ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत परंपराओं और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं खà¥à¤¦ को जोड़ा। इसके कारण मधà¥à¤° और लयबदà¥à¤§ अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का à¤à¤• समृदà¥à¤§ संसार बना। बंगाल के बाउल के रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ मंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ से लेकर à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ आंदोलन की à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ कविता तक, रागों को उपमहादà¥à¤µà¥€à¤ª के विविध सांसà¥à¤•ृतिक और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• परंपराओं दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ढाला गया है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• परंपरा में, राग केवल संगीत रचनाà¤à¤‚ नहीं हैं। यह गहन आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• महतà¥à¤µ के साथ जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हैं। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, रागों में गायक और शà¥à¤°à¥‹à¤¤à¤¾ दोनों के à¤à¥€à¤¤à¤° विशिषà¥à¤Ÿ à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं, मन की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ को जगाने की शकà¥à¤¤à¤¿ होती है। संगीत पर à¤à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ संसà¥à¤•ृत गà¥à¤°à¤‚थ संगीत रतà¥à¤¨à¤¾à¤•र के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, 'राग दिवà¥à¤¯ राजकà¥à¤®à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की तरह हैं, जो आकाशीय चमक से चमकती हैं। उनकी मधà¥à¤° धाराओं से अमृत पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ होता है, जो मानव हृदय का पोषण करता है।'
रागों की महतà¥à¤¤à¤¾ में यह विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सांसà¥à¤•ृतिक ताने-बाने में गहराई से समाया हà¥à¤† है। वे अकà¥à¤¸à¤° विशेष समय, मौसम और देवताओं से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ होते हैं। पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• राग का अपना अनूठा आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• सार माना जाता है।
रागों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ संगीत के दायरे से परे है। वे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ उपमहादà¥à¤µà¥€à¤ª में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ धारà¥à¤®à¤¿à¤• समारोहों और अनà¥à¤·à¥à¤ ानों में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। हिंदू मंदिरों में रागों के मधà¥à¤° सà¥à¤µà¤° गूंजते हैं, à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ वातावरण को बढ़ाते हैं। परमातà¥à¤®à¤¾ को आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• à¤à¥‡à¤‚ट के रूप में सेवा करते हैं। सिख परंपरा में शबद कीरà¥à¤¤à¤¨ की पà¥à¤°à¤¥à¤¾ है। इसमें गà¥à¤°à¥ गà¥à¤°à¤‚थ साहिब से पवितà¥à¤° à¤à¤œà¤¨à¥‹à¤‚ का सामूहिक गायन शामिल है। यहां तक कि इसà¥à¤²à¤¾à¤® (à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सूफी पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं) में रागों को आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤• जगह मिली है। यहां à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ गीत जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कवà¥à¤µà¤¾à¤²à¥€ के रूप में जाना जाता है। वे रागों के मधà¥à¤° ढांचे पर आधारित होते हैं
रागों की दिवà¥à¤¯ उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ में विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ पौराणिक कथाओं और लोककथाओं में गहराई से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हैं। इनमें कई कहानियों और किंवदंतियों का वरà¥à¤£à¤¨ है कि कैसे इन सà¥à¤µà¤°à¥‹à¤‚ को सà¥à¤µà¤¯à¤‚ देवताओं से उपहार के रूप में मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया गया है। à¤à¤¸à¥€ ही à¤à¤• मनोरम कथा जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤· और वासà¥à¤¤à¥à¤•ला पर à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ संसà¥à¤•ृत गà¥à¤°à¤‚थ 'बृहतà¥-संहिता' में मिलती है। à¤à¤¸à¤¾ कहा जाता है कि दिवà¥à¤¯ संगीतकार के रूप में जाने जाने वाले दिवà¥à¤¯ ऋषि नारद ने à¤à¤—वान शिव से रागों की पेचीदगियों के बारे में जाना। अपनी करामाती धà¥à¤¨à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से नारद शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ कालिंदी नदी के रोष को शांत करने में सकà¥à¤·à¤® थे। à¤à¤• उपलबà¥à¤§à¤¿ जिसने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 'कालिंदी-à¤à¤µà¤¨à¤¾à¤µà¤°à¥€' की उपाधि दी।
à¤à¤• अनà¥à¤¯ किंवदंती राग à¤à¥ˆà¤°à¤µà¥€ की दिवà¥à¤¯ उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ की बात करती है। यह à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संगीत परंपरा में सबसे समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• रूप से शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ रागों में से à¤à¤• है। à¤à¤¸à¤¾ कहा जाता है कि इस राग का जनà¥à¤® à¤à¤—वान शिव और देवी पारà¥à¤µà¤¤à¥€ के मिलन से हà¥à¤† था। जो उनके दिवà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‡à¤® और सृजन की असीम ऊरà¥à¤œà¤¾ का सार था।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत में कई राग विशिषà¥à¤Ÿ देवताओं, à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अवधारणाओं के साथ अपने जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हैं। à¤à¤¸à¤¾ ही à¤à¤• राग à¤à¥ˆà¤°à¤µà¥€ है, जिसे अकà¥à¤¸à¤° 'रागों की रानी' कहा जाता है। यह शिकà¥à¤·à¤¾ और कला की संरकà¥à¤·à¤• देवी सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ के साथ निकटता से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ हà¥à¤† है। à¤à¤• और पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ राग राग मलà¥à¤¹à¤¾à¤° है, जो मानसून के मौसम से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ à¤à¤• राजसी राग है। à¤à¤¸à¤¾ कहा जाता है कि राग मलà¥à¤¹à¤¾à¤° के गायन मातà¥à¤° से बारिश के बादल आने और सूखी धरती की पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ बà¥à¤à¤¾à¤¨à¥‡ की शकà¥à¤¤à¤¿ होती है।
रागों के जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• सार गà¥à¤°à¥-शिषà¥à¤¯ परंपरा में गहराई से जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ है। इस परंपरा में गà¥à¤°à¥ केवल à¤à¤• शिकà¥à¤·à¤• नहीं है, बलà¥à¤•ि à¤à¤• आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शिषà¥à¤¯ (छातà¥à¤°) को राग जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की गहन गहराई पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ सौंपी गई है।
आधà¥à¤¨à¤¿à¤• यà¥à¤— में रागों का गहन आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• सार दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° के संगीतकारों और शà¥à¤°à¥‹à¤¤à¤¾à¤“ं को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता रहा है। सांसà¥à¤•ृतिक सीमाओं को पार करता है। दिवà¥à¤¯ संबंध के लिठसारà¥à¤µà¤à¥Œà¤®à¤¿à¤• लालसा के साथ गूंजता है। à¤à¤¸à¥€ ही à¤à¤• कलाकार हैं अनà¥à¤·à¥à¤•ा शंकर। वह पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ सितार वादक और संगीतकार हैं। अपने à¤à¤²à¥à¤¬à¤® 'टà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤¸ ऑफ यू' के माधà¥à¤¯à¤® से वह à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत के कालातीत जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करती है। इसे समकालीन संवेदनाओं से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है। पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ और आधà¥à¤¨à¤¿à¤• का सामंजसà¥à¤¯à¤ªà¥‚रà¥à¤£ मिशà¥à¤°à¤£ बनाती है।
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° रागों को à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को पार करने और कलाकार और शà¥à¤°à¥‹à¤¤à¤¾ को परमातà¥à¤®à¤¾ से जोड़ने की शकà¥à¤¤à¤¿ से ओतपà¥à¤°à¥‹à¤¤ किया जाता है। राग की उपासना à¤à¤• पवितà¥à¤° पà¥à¤°à¤¥à¤¾ है जो सदियों से देखी जाती रही है। इसमें à¤à¤•à¥à¤¤ राग देवताओं को पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾, अनà¥à¤·à¥à¤ ान और पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ चढ़ाते हैं। माना जाता है कि शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ का यह रूप राग के आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• सार के साथ गहरे संबंध को सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• बनाता है। इससे राग के साधक को à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं और अवसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं का अनà¥à¤à¤µ करने की अनà¥à¤®à¤¤à¤¿ मिलती है। ये दिवà¥à¤¯ धà¥à¤¨à¥‡à¤‚ हमें हमारी आंतरिक दिवà¥à¤¯à¤¤à¤¾ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ की दिशा में मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ करती रहें। हम हमेशा रागों से मंतà¥à¤°à¤®à¥à¤—à¥à¤§ रहें, जहां संगीत परमातà¥à¤®à¤¾ की आवाज बन जाता है।
वासिनी शà¥à¤¯à¤¾à¤®à¤¾ चरण à¤à¤¾ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ मैथिली लोक संगीत कलाकार और à¤à¤¾à¤°à¤¤ में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संसà¥à¤•ृति और शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत के विशेषजà¥à¤ž हैं।
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