अमेरिका में रहने वाले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के लोग जब तब किसी डरावनी फोन कॉल से सवेरे अपनी आंखें खोलते रहे हैं। पता चलता है कि किसी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ छातà¥à¤° की हतà¥à¤¯à¤¾ कर दी गई है। या किसी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी परिवार की उसके घर या सड़क पर हतà¥à¤¯à¤¾ या मौत हो गई है। हतà¥à¤¯à¤¾ और आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ की à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ खबरों से à¤à¥€ इस समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की सà¥à¤¬à¤¹à¥‡à¤‚ हà¥à¤ˆ हैं। à¤à¤¸à¤¾ खबरें सà¥à¤¨à¤•र आंखें à¤à¤° आती हैं और गला रà¥à¤‚ध जाता है जब पता लगता है कि किसी सनकी-सिरफिरे ने सà¥à¤•ूल में या उसके बाहर अंधाधà¥à¤‚ध गोलियां बरसाकर कई घरों के चराग बà¥à¤à¤¾ दिये। नैनो सेकिंड में सब खतà¥à¤® हो जाता है। हाल ही में सैन मेटो में हà¥à¤ˆ तà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¦à¥€ à¤à¥€ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ ही बà¥à¤°à¥€ खबरों का सिलसिला है जिसमें à¤à¤• यà¥à¤µà¤¾ पति-पतà¥à¤¨à¥€ और उनके जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ बचà¥à¤šà¥‡ मारे गà¤à¥¤
आंकड़े गंà¤à¥€à¤° और निराशाजनक हैं लेकिन कà¥à¤› à¤à¤¸à¤¾ है जिसे छिपाया नहीं जा सकता। संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका में हर साल लगà¤à¤— 43000 लोग बंदूक हिंसा से मरते हैं। बंदूक से निकली गोली 25000 लोगों की आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾ का सबब बनती है। संगठनों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° संखà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ अलग-अलग हो सकती हैं लेकिन यह निसà¥à¤¸à¤‚देह à¤à¤• सà¥à¤¨à¥à¤¨ करने वाला परिदृशà¥à¤¯ है कि जिस देश में 18 या 21 वरà¥à¤· की आयॠतक सिगरेट और शराब खरीदना अवैध है वहां बंदूकों के कारण इतनी सारी जानें चली जाती हैं।
अमेरिका में कटà¥à¤Ÿà¤°à¤ªà¤‚थियों का à¤à¥€ à¤à¤• वरà¥à¤— है। इसी वरà¥à¤— ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकियों सहित à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के लोगों को कई कारणों से निशाना बनाया है। उनके दिखने या कपड़े पहनने के तौर-तरीके पर à¤à¥€ इन समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के लोग कटà¥à¤Ÿà¤°à¤ªà¤‚थियों की नफरत का निशाना बने हैं। à¤à¤¸à¥‡ में सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• तौर पर अधिकारियों से यह मांग की जाती है कि वे नफरती गतिविधियों में शामिल लोगों पर घृणा अपराध के आरोप लगाà¤à¤‚। यह जानते हà¥à¤ à¤à¥€ कि à¤à¤¸à¥‡ मामलों में सजा मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकती है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ पर हाल ही में हà¥à¤ हमलों ने वाजिब तौर पर यह चिंता पैदा कर दी है कि कà¥à¤¯à¤¾ यह हिंसा जातीयता के आधार पर अचानक है अथवा किसी सोच के साथ। अलबतà¥à¤¤à¤¾, किसी à¤à¥€ लोकतंतà¥à¤° में कानूनी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तो चलानी ही होगी।
विडंबना यह है कि किसी समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के लिठदà¥à¤– और पà¥à¤°à¤²à¤¾à¤ª à¤à¤¸à¥‡ समय में है जब उसे गोद लेने वाली à¤à¥‚मि में उसके योगदान के लिठआम तौर पर मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ दी गई है। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अमेरिकियों ने किसी à¤à¥€ चà¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ पेशे में बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया है और उनकी औसत वारà¥à¤·à¤¿à¤• आय देश की औसत वारà¥à¤·à¤¿à¤• आय से लगà¤à¤— दोगà¥à¤¨à¥€ है। सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• या उचà¥à¤šà¤¤à¤° डिगà¥à¤°à¥€ वाले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अमेरिकियों की हिसà¥à¤¸à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ à¤à¥€ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ औसत से दोगà¥à¤¨à¥€ है। राजनीतिक, आरà¥à¤¥à¤¿à¤• और सामाजिक रूप से लगà¤à¤— 40 लाख का यह समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ à¤à¤• शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ आवाज बन गया है।
राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ जो बाइडन ने हाल ही में नासा में à¤à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मूल के वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• के साथ बातचीत में उपराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ कमला हैरिस और à¤à¤¾à¤·à¤£ लेखक विनय रेडà¥à¤¡à¥€ का जिकà¥à¤° करते हà¥à¤ कहा था- à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी इस देश पर कबà¥à¤œà¤¾ कर रहे हैं... आप लोग अविशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ हैं। राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ बाइडन इशारा कर रहे थे कि à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकियों ने 1911 के बाद से à¤à¤• लंबा सफर तय किया है जब अमेरिकी कांगà¥à¤°à¥‡à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ à¤à¤• विशेष आयोग ने कहा था कि हिंदà¥à¤“ं को 'संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका में अब तक आये अपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की सबसे कम वांछनीय जाति के रूप में माना जाता है।'
à¤à¤¸à¥‡ परिवेश में जहां मà¥à¤«à¥à¤¤ में कà¥à¤› नहीं मिलता à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकियों, चाहे वे छातà¥à¤° हों जो अपने सपनों और जà¥à¤¨à¥‚न की तलाश में à¤à¤¾à¤°à¤¤ से आठहों या पूरà¥à¤£ पेशेवर, ने समाज में अपना सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ करने के लिठकड़ी मेहनत की है। लेकिन टॉप टेन, टà¥à¤µà¥‡à¤‚टी या फिफà¥à¤Ÿà¥€ की सà¤à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¤ सूचियों में जगह बनाने की दौड़ में यह सोचने के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ समय नहीं दिया गया कि अब तक का यह रासà¥à¤¤à¤¾ कैसा रहा है और असफलताओं की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में कà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤†à¥¤ यहीं पर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के पेशेवरों को परामरà¥à¤¶ देने के लिठआगे आना चाहिà¤à¥¤ केवल बंदूकों या घर में हथियार की मौजूदगी को दोष देने से काम नहीं चलेगा।
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