(रतन अगà¥à¤°à¤µà¤¾à¤²)
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में शिशॠकà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ à¤à¤• बड़ी चिंता का विषय है। इससे शिशà¥à¤“ं की मृतà¥à¤¯à¥ दर और दीरà¥à¤˜à¤•ालिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ बढ़ती हैं। राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ परिवार सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ (NFHS-5, 2019-20) के आंकड़े बताते हैं कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में पांच साल से कम आयॠके 36 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ अविकसित हैं, 33 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ कम वजन के हैं और 17 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बचà¥à¤šà¥‡ कमज़ोर हैं। सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ कहता है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में छह महीने से कम उमà¥à¤° के शिशà¥à¤“ं के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ दर केवल 55.6 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ है। सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ के 'सटीक' तरीकों के बारे में जागरूकता लगà¤à¤— न के बराबर है। इसका परिणाम ये होता है कि शिशà¥à¤“ं को मां के औसत दूध का लगà¤à¤— 28 फीसदी हिसà¥à¤¸à¤¾ ही मिल पाता है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि तमाम सरकारी अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ और कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ के बावजूद à¤à¤¾à¤°à¤¤ में शिशॠकà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ लगातार बनी हà¥à¤ˆ हैं।
इस गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ के समाधान के लिठWHEELS गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² फाउंडेशन ने मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ सरकार के राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ मिशन के सहयोग से नà¥à¤¯à¥‚ बोरà¥à¤¨ नà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨à¤² हेलà¥à¤¥ इनिशिà¤à¤Ÿà¤¿à¤µ नाम से à¤à¤• पहल शà¥à¤°à¥‚ की है। WHEELS विशà¥à¤µ सà¥à¤¤à¤° पर आईआईटी के पूरà¥à¤µ छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ का à¤à¤• सामाजिक मंच है। सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• और निजी à¤à¤¾à¤—ीदारी वाले इस विशिषà¥à¤Ÿ अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में à¤à¤• करोड़ से अधिक माताओं और शिशà¥à¤“ं को लाठपहà¥à¤‚चाना है। इस पहल को आरआईà¤à¤¸à¤Ÿà¥€ फाउंडेशन से अनà¥à¤¦à¤¾à¤¨ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है। इस अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ में तीन राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚- महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°, गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ और छतà¥à¤¤à¥€à¤¸à¤—ढ़ के कई जिलों से मिले सबक को à¤à¥€ शामिल किया गया है।
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ के समाधान के लिठवà¥à¤¹à¥€à¤²à¥à¤¸ ने नवजात शिशà¥à¤“ं के लिठपोषण के सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤°à¥‹à¤¤ - मां से सà¥à¤¤à¤¨ वाले दूध का उपयोग करने की योजना बनाई है। इसके लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ की कà¥à¤ªà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं की पहचान करने के लिठà¤à¥à¤—à¥à¤—ी वाले कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में अमेरिकी बाल रोग विशेषजà¥à¤ž डॉ रूपल दलाल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठशोध और फीलà¥à¤¡à¤µà¤°à¥à¤• और डॉ कनà¥à¤¨à¤¨ मौदगलà¥à¤¯à¤¾ के नेतृतà¥à¤µ में आईआईटी बॉमà¥à¤¬à¥‡ की टीम दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हेलà¥à¤¥ सà¥à¤ªà¥‹à¤•न टà¥à¤¯à¥‚टोरियल (à¤à¤šà¤à¤¸à¤Ÿà¥€) के माधà¥à¤¯à¤® से किठगठकारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखा गया है। इसका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ किफायती और समयानà¥à¤•ूल सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ तकनीक तैयार करना है। साथ ही फà¥à¤°à¤‚टलाइन पर काम करने वाले सामà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के लिठटà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग कंटेंट तैयार करके उसे लागू करना है। इसका 10 मिनट का कंटेंट 20 से अधिक à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं में उपलबà¥à¤§ है, जिसे ऑफ़लाइन या ऑनलाइन माधà¥à¤¯à¤® से खà¥à¤¦ सीखने के मकसद से डिजाइन किया गया है।
यह समाधान नवजात शिशॠके पहले दो वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ में विकास को मापने के लिठसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• मानकों के अनà¥à¤°à¥‚प है। यह à¤à¤ªà¥à¤²à¤¿à¤•ेशन न केवल समाधान की पà¥à¤°à¤—ति और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पर नज़र रखता है बलà¥à¤•ि à¤à¤¸à¥‡ वरà¥à¤•रà¥à¤¸ और मांओं की पहचान à¤à¥€ करता है जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अतिरिकà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ या à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ की सलाह की जरूरत होती है। इसमें मौजूदा कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ à¤à¤•ीकृत किया गया है, जैसे कि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ माताओं को विटामिन व आयरन की आपूरà¥à¤¤à¤¿ की जाती है, उनका टीकाकरण किया जाता है और पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤—त वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं जैसे कि समय-समय पर विजिट करना, डेटा जà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨à¤¾ और संपरà¥à¤• बनाठरखने को à¤à¥€ à¤à¤•ीकृत किया गया है।
104 करोड़ की आबादी वाले à¤à¤¾à¤°à¤¤ देश में सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की जटिलता और उनकी विशालता को समà¤à¤¨à¤¾ आसान नहीं है। हालांकि तकनीक, इनोवेशन, इमà¥à¤ªà¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ इकोसिसà¥à¤Ÿà¤® की ताकत और पबà¥à¤²à¤¿à¤•-पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ à¤à¤¾à¤—ीदारी से इस तरह की पहल à¤à¤• उमà¥à¤®à¥€à¤¦ जगाती है कि हम लाखों लोगों के जीवन को संवारने वाला पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ समाधान पेश कर सकते हैं। आईआईटी बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड से समाज और देश à¤à¤¸à¥€ ही उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करता है।
मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ सरकार के राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ मिशन की मिशन डायरेकà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤‚का दास कहती हैं कि नीतिगत रूप से नवजात शिशॠको पहले छह महीनों में सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराना अनिवारà¥à¤¯ है। हम इस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® को पहले मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में सात सबसे चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€à¤ªà¥‚रà¥à¤£ जिलों में लागू करने जा रहे हैं। उसके बाद इसे मासà¥à¤Ÿà¤° टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤° बेंच के जरिठराजà¥à¤¯ के बाकी हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में लागू किया जाà¤à¤—ा।
PanIIT कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ की पहल पर शà¥à¤°à¥‚ इस WHEELS मिशन को à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सà¤à¥€ 29 राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के अलावा दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के कई अनà¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ लागू करने की योजना है। उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है कि इस तकनीकी पहल से सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ हो सकेगा कि हर बचà¥à¤šà¥‡ का मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• पूरी तरह से विकसित हो सके और उसे सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ जीवन जीन का मौका मिल सके।
(लेखक IITs के पूरà¥à¤µ छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ की पहल - वà¥à¤¹à¥€à¤²à¥à¤¸ गà¥à¤²à¥‹à¤¬à¤² फाउंडेशन के पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚ट व बोरà¥à¤¡ मेंबर हैं। उनसे ratan@wheelsglobal.org पर संपरà¥à¤• किया जा सकता है। इस लेख में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ विचार और राय लेखक के अपने हैं। यह जरूरी नहीं है कि वे नà¥à¤¯à¥‚ इंडिया अबà¥à¤°à¥‰à¤¡ की आधिकारिक नीति या सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करते हों।)
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