कà¥à¤¯à¤¾ कृतà¥à¤°à¤¿à¤® बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¤à¥à¤¤à¤¾ (AI) की अचà¥à¤›à¥€ या बà¥à¤°à¥€ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ की कोई ऊपरी सीमा है? हम à¤à¤¸à¤¾ सोच सकते हैं। पड़ताल करें तो खोजें दो पà¥à¤°à¤•ार की होती हैं। टाइप-à¤à¤• खोजें मौजूदा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पर आधारित होती हैं और टाइप-दो खोजें मौजूदा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ से नहीं आ सकतीं।
टाइप-à¤à¤• खोजें मौजूदा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के महासागर में बिंदà¥à¤“ं को जोड़ने के समान हैं। वे 18वीं सदी के जरà¥à¤®à¤¨ दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• इमैनà¥à¤à¤² कांट के दरà¥à¤¶à¤¨ के अनà¥à¤°à¥‚प हैं जो दावा करता है कि तमाम जà¥à¤žà¤¾à¤¨ इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से शà¥à¤°à¥‚ होता है, फिर समठमें पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ होता है और तरà¥à¤• में समापà¥à¤¤ होता है। तरà¥à¤• से बढ़कर कà¥à¤› à¤à¥€ नहीं है। इसके कारण के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ में विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, कानून, नीतियां, विनियम आदि शामिल हैं।
टाइप- दो खोजें मौजूदा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ से नहीं आतीं। संसà¥à¤•ृत में, टाइप- दो खोजों को शà¥à¤°à¥à¤¤à¤¿ नाम से जाना जाता है। इसका अरà¥à¤¥ है पà¥à¤°à¤•ट। कई पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ खोजें जैसे वेद, उपनिषद, à¤à¤—वद गीता और बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® सूतà¥à¤° टाइप-दो खोजें हैं। इन खोजों से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठमानवता के डेटाबेस में बहà¥à¤¤ अधिक जà¥à¤žà¤¾à¤¨ नहीं था। 19वीं सदी के योगी सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विवेकाननà¥à¤¦ टाइप- दो खोजों की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ इस पà¥à¤°à¤•ार करते हैं- à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ विचार तरà¥à¤• से अधिक कà¥à¤› खोजने और सफलतापूरà¥à¤µà¤• खोजने का साहस करता है।
टाइप-à¤à¤• और टाइप-दो खोजों के कà¥à¤› उदाहरण...
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ रूपातà¥à¤®à¤• पौराणिक गाथाà¤à¤‚ हमें बताती हैं कि बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚ड शूनà¥à¤¯ से उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हà¥à¤†à¥¤ शूनà¥à¤¯à¤¤à¤¾ शिव या बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚डीय चेतना है और मौलिक ऊरà¥à¤œà¤¾ या पारà¥à¤µà¤¤à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚ड का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ करती हैं। यह टाइप- दो खोज होगी। अमांडा गेफà¥à¤Ÿà¤° ने अपनी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• 'टà¥à¤°à¥‡à¤¸à¤ªà¤¾à¤¸à¤¿à¤‚ग ऑन आइंसà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ लॉन' (2014 में) इस खोज की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ की और जिम कोवाल ने दिखाया कि शूनà¥à¤¯ की शूनà¥à¤¯à¤¤à¤¾ चेतना के अलावा और कà¥à¤› नहीं हो सकती है। ये टाइप- à¤à¤• खोजें होंगी। देशपांडे और कोवाल ने दिखाया है कि परम वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता की पà¥à¤°à¤•ृति कैसे à¤à¤• अधिक शांतिपूरà¥à¤£ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की ओर ले जा सकती है।
à¤à¤—वद गीता में शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ सलाह देते हैं कि मानसिकता के तीन घटकों, S, R और T का परिवरà¥à¤¤à¤¨ सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के बार-बार उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ और पतन को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करता है। यह टाइप- दो खोज होगी। देशपांडे को à¤à¤¨à¤¸à¤¾à¤‡à¤•à¥à¤²à¥‹à¤ªà¥€à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾ बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¾à¤¨à¤¿à¤•ा में पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿à¤•ारक साकà¥à¤·à¥à¤¯ मिले हैं। देशपांडे ने यह à¤à¥€ दिखाया है कि à¤à¤—वद गीता के जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का उपयोग सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के पतन को टालने के लिठकैसे किया जा सकता है। यह टाइप- à¤à¤• खोज होगी।
टाइप- दो खोजें कैसे की जाती हैं?
टाइप- दो की खोज तब हो सकती है जब कोई आकांकà¥à¤·à¥€ तरà¥à¤• से पार हो जाता है। यह चिंतन, मनन या पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾ जैसे धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ के फोकस को बढ़ाकर पूरा किया जाता है। पशà¥à¤šà¤¿à¤® में कई वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• खोजें संà¤à¤µà¤¤à¤ƒ टाइप- दो खोजें हैं। इनके लिठजिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥à¤“ं ने अनजाने में ही सही, अपना धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया था।
यह पता लगाना कि कोई चीज़ टाइप- à¤à¤• खोज है या टाइप- दो खोज अपने आप में à¤à¤• दिलचसà¥à¤ª विषय है। विचार करें कि कà¥à¤¯à¤¾ आइंसà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ का विशेष सापेकà¥à¤·à¤¤à¤¾ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त- e = mc 2 सामानà¥à¤¯ सापेकà¥à¤·à¤¤à¤¾ सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त, रामानà¥à¤œà¤¨ के पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¯, कापरेकर रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ संखà¥à¤¯à¤¾ अथवा 6,174 शंकराचारà¥à¤¯ का वैदिक गणित इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ टाइप- दो खोजें हैं।
इससे कोई फरà¥à¤• नहीं पड़ता कि कोई खोज कैसे होती है। इसकी पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ डेटा और सबूतों से होनी चाहिà¤à¥¤ à¤à¤• बार जब टाइप- दो की खोज हो जाती है और इसकी पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ हो जाती है तो यह मौजूदा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के महासागर का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ बन जाता है और पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के लिठनई टाइप-à¤à¤• खोज करने के लिठउपलबà¥à¤§ होता है। इस पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि के साथ हम यह पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ उठा सकते हैं कि कà¥à¤¯à¤¾ कृतà¥à¤°à¤¿à¤® बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¤à¥à¤¤à¤¾ की अंतिम कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ की कोई ऊपरी सीमा है।
कृतà¥à¤°à¤¿à¤® बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¤à¥à¤¤à¤¾ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के संपूरà¥à¤£ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ आधार, सूचना और तथà¥à¤¯à¥‹à¤‚ तक पहà¥à¤‚च है और उसके पास मानवता के वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ आधार की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾, पà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª, विसà¥à¤¤à¤¾à¤° और अरà¥à¤¥ निकालने की असाधारण कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ है। AI ने पहले ही विशिषà¥à¤Ÿ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ इंसानों को मात देने की अपनी कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ दिखा दी है। हमने चैट जीपीटी, इनवीडियो AI और अनà¥à¤¯ जैसे AI सिसà¥à¤Ÿà¤® का उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ देखा है।
इन सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का कारà¥à¤¯ मौजूदा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के महासागर में बिंदà¥à¤“ं को जोड़ने के समान है। चाहे वह कितना à¤à¥€ सरल कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो। अकà¥à¤¸à¤° मनà¥à¤·à¥à¤¯ के लिठसमान बिंदà¥à¤“ं को जोड़ना असंà¤à¤µ होता है। हालांकि, यदि किसी पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ का उतà¥à¤¤à¤° मानवता के मौजूदा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ आधार में नहीं पाया जा सकता है तो AI इसे खोजने में सकà¥à¤·à¤® नहीं होगा। AI à¤à¤• टाइप-à¤à¤• खोज है!
कà¥à¤¯à¤¾ AI की वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का परीकà¥à¤·à¤£ संà¤à¤µ है।
जिन मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ ने तरà¥à¤• को पार कर लिया है उनमें बहà¥à¤¤ उचà¥à¤š सà¥à¤¤à¤° की चेतना और à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ तथा à¤à¥‚ठमें सच को पहचानने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ (संपूरà¥à¤£ अंतरà¥à¤œà¥à¤žà¤¾à¤¨) होती है। परीकà¥à¤·à¤£ करें कि कà¥à¤¯à¤¾ आपके AI उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ में ये विशेषताà¤à¤‚ हैं और कà¥à¤¯à¤¾ वे टाइप- दो खोजें कर रहे हैं। यदि हां तो अब समय आ गया है कि हम उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• नमन करें।
(पà¥à¤°à¤¦à¥€à¤ª बी देशपांडे पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° इमेरिटस और लà¥à¤‡à¤¸à¤µà¤¿à¤²à¥‡ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में केमिकल इंजीनियरिंग विà¤à¤¾à¤— के पूरà¥à¤µ अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· हैं। संजीव à¤à¤¸ तांमà¥à¤¬à¥‡ à¤à¤• पूरà¥à¤µ मà¥à¤–à¥à¤¯ वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• और राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ रासायनिक पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला, पà¥à¤£à¥‡, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में केमिकल इंजीनियरिंग और पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ विकास पà¥à¤°à¤à¤¾à¤— के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– हैं)
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login